कांग्रेस की हार की रिपोर्ट पहुँची आलाकमान के पास कौन बनेगा नेता प्रतिपक्ष और किसके हाथ में होगी पार्टी की कमान

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देहरादून एसकेटी डॉट कॉम

उत्तराखंड राज्य में मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत कर दी है तथा पहली भी कैबिनेट बैठक में यूनिफॉर्म सिविल कोड कानून लाने की घोषणा कर दी वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस अपनी हार की समीक्षा कर चुकी है और कई नेताओं पर कार्यवाही की तलवार लटकने की संभावना है। समीक्षा करने की जिम्मेदारी संभालने वाले स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडे ने 3 दिन तक चले इस मंथन की रिपोर्ट आलाकमान को सौंप दी है। इसके अलावा अब पार्टी नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नए चेहरों पर विचार कर रही है। पार्टी में अभी वर्तमान में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के इस्तीफे के बाद प्रदेश कार्यकारिणी के बिना पार्टी चल रही है वही 29 मार्च से विधानसभा से शुरू होने वाले पहले सत्र मैं नेता प्रतिपक्ष की तैनाती के लिए भी चेहरा तय करना है स्टॉ

पार्टी आलाकमान को यह फैसला लेना है कि किस चेहरे को विधानसभा में सरकार के खिलाफ खड़ा किया जाए और किसे संगठन की जिम्मेदारी दी जाए। नेता प्रतिपक्ष के लिए कई नाम सामने आए हैं जिनमें मुख्य रूप से निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के अलावा दलित चेहरे के रूप में यशपाल आर्य युवा चेहरे के रूप में भुवन कापड़ीराजेंद्र भंडारी तथा धारचूला से लगातार तीन बार पार्टी का परचम लहराने वाले युवा हरीश धामी का नाम आया है हरीश धामी ने तो स्वयं ही अपने नाम की पैरवी करते हुए कहा कि जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी ने युवा मुख्यमंत्री दिया है वैसे ही कांग्रेस को भी सदन में युवा को कमान देनी चाहिए।

वही प्रदेश अध्यक्ष के चेहरे पर भी मंथन चल रहा है निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को एक बहुत बड़ा वर्ग दोबारा प्रदेश अध्यक्ष चाहता है इसके बारे में तर्क यह दिया जा रहा है कि गणेश गोदियाल को काफी कम समय मिला है और उन्हें सीधे चुनाव में जाना पड़ा पूरे प्रदेश में दोनों के कारण वह अपनी सीट पर ज्यादा समय नहीं दे पाए जिसकी वजह से उनकी बहुत ही कम मतों से हार हुई जो की पार्टी के लिए काफी सदमा है। वही कई अन्य चेहरे जिन पर पार्टी काफी मंथन कर रही है इन चारों में भुवन कापड़ी प्रकाश जोशी तथा सुमित हृदेश का नाम भी चल रहा है। कांग्रेस पार्टी युवाओं पर ज्यादा फोकस करने की नीति पर चलेगी ताकि वह भारतीय जनता पार्टी के युवा नेतृत्व का जवाब दे सके युवा मतदाताओं की तादाद अधिक होने की वजह से भी यह निर्णय कारगर हो सकता है। पार्टी गढ़वाल तथा कुमाऊं मंडल को बराबर तवज्जो देने के लिए एक जगह से नेता प्रतिपक्ष एक जगह से प्रदेश अध्यक्ष बनाने के परंपरागत पर चलेगी इस पर काफी मंथन चल रहा है। 29 तारीख को विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है पार्टी ठीक इससे पहले यह निर्णय लेगी ऐसा अधिकतर लोगों का मानना है और यह निर्णय चौंकाने वाला भी हो सकता है पार्टी में इस बार कई वरिष्ठ नेता चुनाव हार चुके हैं। स्क्रीनिंग कमिटी के चेयरमैन रह चुके तथा पार्टी की समीक्षा करने का प्रभाव उठा रहे अविनाश पांडे ने कहा कि उन्होंने समीक्षा रिपोर्ट हाईकमान तक पहुंचा दी है

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