भाजपा प्रदेश कार्यालय से इस चौराहा तक निकला विरोध मार्च, बड़ी संख्या में महिलाएं उतरीं सड़क पर

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महिला मोर्चा

भाजपा महिला मोर्चा ने शनिवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और विरोध मार्च निकाला। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक निशा सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता भाजपा प्रदेश कार्यालय से हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचीं

पटना: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर बिहार भाजपा महिला मोर्चा ने शनिवार को पटना में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और विरोध मार्च निकाला। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक निशा सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता भाजपा प्रदेश कार्यालय से हाथों में तख्तियां लेकर इनकम टैक्स चौराहा होते हुए डाकबंगला चौराहा तक पहुंचीं। 

इस दौरान महिला मोर्चा की नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जेएनयू प्रकरण को लेकर कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाए और छात्राओं को न्याय दिलाने की मांग की।

विरोध मार्च को संबोधित करते हुए भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष निशा सिंह ने कहा कि जेएनयू की 11 छात्राओं की ओर से प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजाम पर यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। महिला मोर्चा नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की ओर से मामले की जांच की गई और आरोपों को सही पाया गया। 

उन्होंने कहा कि छात्राओं की ओर से लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। उनका आरोप है कि अंक देने के नाम पर कथित तौर पर उनका शोषण करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी राजनीतिक दल को अपने नेता के बचाव में खड़ा होने के बजाय पीड़ित छात्राओं के साथ खड़ा होना चाहिए। 

भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि महिला अधिकारों और न्याय की बात करने वाले राहुल गांधी इस गंभीर मामले पर मौन क्यों हैं।

निशा सिंह ने कहा कि महिलाओं और छात्राओं के सम्मान तथा सुरक्षा से जुड़े मामलों में भाजपा महिला मोर्चा किसी भी प्रकार की चुप्पी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि देश की बेटियों के साथ अन्याय के खिलाफ भाजपा महिला मोर्चा सड़क से लेकर हर मंच तक आवाज उठाता रहेगा।

प्रदेश की महामंत्री प्रीति शेखर ने कहा कि जेएनयू में महिला विद्यार्थियों से जुड़े कथित यौन दुर्व्यवहार के गंभीर मामले में कांग्रेस सांसद डॉ. आंगोमचा बिमोल अकोइजाम के विरुद्ध विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जाँच के बाद उन्हें प्रोफेसर पद से बर्खास्त किया जाना एक गंभीर विषय है। यह मामला महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

राहुल गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या महिला सम्मान का मुद्दा केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित है, या पार्टी अपने नेताओं और सांसदों से भी जवाबदेही की अपेक्षा रखती है?

उंन्होने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट मत है कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के मामले में किसी भी व्यक्ति को उसके राजनीतिक पद या प्रभाव के आधार पर विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए। महिला विद्यार्थियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और कानून के अनुरूप निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।

कांग्रेस को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। महिला अधिकारों की बात करने वाले नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे पीड़िताओं के न्याय, उनकी गरिमा और संस्थानों में सुरक्षित वातावरण के पक्ष में स्पष्ट रूप से खड़े हों।

उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान कोई राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है। न्याय के प्रश्न पर चुप्पी नहीं, जवाबदेही जरूरी है।

विरोध मार्च में विधान परिषद सदस्य निवेदिता सिंह, अनामिका सिंह पटेल, शीला प्रजापति, मुख्य सचेतक संजीव चौरसिया, उप सचेतक रत्नेश कुशवाहा, विधायक संजय गुप्ता, महामंत्री प्रीति शेखर, नितिन अभिषेक, उपाध्यक्ष हरीभूषण ठाकुर, अनामिका पासवान, सुषमा साहू, प्रदेश मंत्री सरला रजक, प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल, प्रदेश मीडिया सह प्रभारी अमित प्रकाश बबलु, जिला अध्यक्ष रूपनारायण मेहता, युवा मोर्चा अध्यक्ष जीतेंद्र सिंह, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष प्रमोद चंद्रवंशी सहित प्रदेश पदाधिकारी, विभिन्न मोर्चों के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए।

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