हरीश रावत की सरकार को गिराने के सूत्रधार कैलाश विजयवर्गीय के मोर्चा संभालने से कांग्रेस अलर्ट, हमारे सर्वे में भाजपा 35 के आंकड़े से पहले ही रुक सकती है!

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देहरादून एसकेटी डॉट कॉम

उत्तराखंड में मतगणना मैं अब कुल मिलाकर 48 घंटे का समय बचा हुआ है वही एग्जिट पोलों में किसी भी पार्टी के समस्त बहुमत की बात सामने नहीं आने से भाजपा व कांग्रेस सतर्क हो गई हैं। 1-2 एग्जिट पोल की सर्वे को अगर छोड़ दे तो लगभग सभी चैनलों के सर्वे में बहुमत के पास पहुंचने कि किसी भी पार्टी की संभावना नहीं बताई जा रही है। ऐसी संभावनाओं के बाद भारतीय जनता पार्टी के महामंत्री एवं वर्ष 2016 में हरीश रावत की सरकार को अस्थिर करने के सूत्रधार कैलाश विजयवर्गीय देहरादून में डेरा डाल दिया है। उन्होंने भाजपा के वर्तमान एवं पूर्व मुख्यमंत्रियों के अलावा पार्टी के कई नेताओं से विचार-विमर्श किया है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने कैलाश विजयवर्गीय को उत्तराखंड में सरकार द्वारा स्थापित करने का जिम्मा सौंप रखा है इसके लिए उन्हें फ्री हैंड भी दिया गया है ऐसा संकेत मिला है। बहुमत के करीब रुकने एवं सरकार गठन के लिए किस तरह से रणनीति अपनाई जाएगी इसके लिए पार्टी के नेताओं से बातचीत करने के बाद विभिन्न छोटी पार्टियों एवम निर्दलियों के साथ संपर्क स्थापित करने की तैयारियां शुरू हो गई है। विजय वर्गी को सरकार बनाने एवं बनती हुई सरकार को रोकने की महारत हासिल बताई जाती है। गत विधानसभा चुनाव जो 2017 में हुए थे वहां मणिपुर और गोवा मैं भाजपा की सरकार गठन करने में अमित शाह के साथ मुख्य रूप से कैलाश विजयवर्गीय ने ही मुख्य भूमिका निभाई थी। इसके अलावा कैलाश विजयवर्गीय ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के सरकार के समय वहां भाजपा का माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी विभिन्न पार्टियों तथा तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं को भारतीय जनता पार्टी में शामिल करने तथा उन्हें टिकट दिलाने में भी उन्होंने अपनी महारथ का उपयोग किया था।

भारतीय जनता पार्टी पंजाब मैं कहीं भी सरकार बनाते हुए नहीं दिख रही है वही उत्तर प्रदेश मैं वह सरकार बनाने के करीब खड़ी है इसके अलावा गोवा और मणिपुर में बड़े दल के रूप में उभरने तथा किसी भी तरह से सरकार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी पूरा जोर लगाएगी। लेकिन उत्तराखंड में जिस तरह से कांग्रेस के साथ तगड़ी फाइट सर्वे में दिखाई जा रही है उससे भारतीय जनता पार्टी ने इस मोर्चे पर किसी भी तरह से सरकार के गठन के लिए कोई दूर कसर नहीं छोड़ने का निर्णय लिया है

उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की संभावनाएं काफी प्रबल देखी जा रही है लेकिन जिस तरह से पार्टी ने 60 पार का नारा दिया था। वह आप भाजपा के पार्टी कार्यालयों तथा उनके प्रेस कॉन्फ्रेंस से गायब हो गया है पार्टी अब यह भी मान चुकी है कि वह सत्ता की दौड़ में कांग्रेस से कड़े मुकाबले में फंसी हुई है ऐसे में किसी भी तरह से वह उत्तराखंड में इस सरकार के इंजन को केंद्र के इंजन से जुड़ना चाहती है। सच की तोप ने पूरे प्रदेश मैं अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से जनता से जो फीडबैक लिया है उससे निश्चित रूप से भाजपा सरकार बनाने के 35 के जादुई आंकड़े पर पहुंचने से पहले ही फिसल रही है ।

कुमाऊं मंडल की 20 सीटों में दोनों पार्टियां एक दूसरे से नजदीक मुकाबला करती हुई दिख रही है लेकिन यहां पर कांग्रेस भाजपा से कुछ बढ़त मैं देख रही है। कॉन्ग्रेस 13 सीटों से 15 सीटों के बीच दिख रही है वहीं भारतीय जनता पार्टी 5 से 7 सीटों के बीच सिमटती से हुई नजर आ रही है। गढ़वाल मंडल में जहां भारतीय जनता पार्टी की स्थिति मजबूत दिख रही है वही कॉन्गस बहुत पीछे भी नहीं है। गढ़वाल की 30 सीटों में भारतीय जनता पार्टी आधी सीटों पर जीती हुई दिखाई दे रही है जबकि कांग्रेस यहां पर पिछड़ती हुई नजर आ रही है। लेकिन कांग्रेस इतनी भी नहीं पिछड़ रही है की वह इसका घाटा कुमाऊं की सीटों से पूरा कर ले रही है कांग्रेस सिर्फ उतनी सीटों पर ही पीछे हैं जितने निर्दलीय जीतेंगे ।तीन से चार निर्दलीय प्रत्याशी अथवा छोटी पार्टियों के प्रत्याशी जीतेंगे इतना अंतर कांग्रेसका कम रह जाएगा।

प्रदेश की शेष बची 20 सीटें जो तराई की सीटें गिनी जाती हैं उनमें कांग्रेस की बढ़त भाजपा के लिए चिंता का विषय बना हुआ है इन 20 सीटों में 11 सीटें हरिद्वार की तथा 9 सीटें उधम सिंह नगर की शामिल है यह 20 सीटें इस समय सत्ता को साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है पहले बात की जाए उधम सिंह नगर की तो यहां पर कांग्रेस के पक्ष में 5-4 या 6 -3 का आंकड़ा जाता हुआ दिख रहा है। वही हरिद्वार जिले की बात करें तो यहां पर भी भाजपा को निर्दलीयों और अन्य छोटी पार्टियों के द्वारा जीती जाने वाली सीटों का नुकसान हो रहा है अर्थात जैसा गढ़वाल मंडल में है कांग्रेस को नुकसान हो रहा है वैसा ही हरिद्वार जिले में बसपा तथा निर्दलीयों के जीतने से भाजपा को नुकसान हो रहा है। हरिद्वार में 11 सीटों में तथा निर्दलीयों को मिलाकर तीन से चार सीटें जीतने की संभावना है। इ

इसके अलावा 5 से 7 सीटें कांग्रेस के पक्ष में जाने की उम्मीद है भाजपा को यहां तीन से चार सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर अगर 70 सीटों की बात करें तो निश्चित रूप से 2012 के आंकड़े से थोड़ा सा सुधरा हुआ आंकड़ा आने की उम्मीद है। तब की परिस्थितियों और अबकी परिस्थितियों में काफी अंतर आ चुका था उस दौरान केंद्र में कांग्रेस नीत संप्रग सरकार थी तथा 1 सीट से कांग्रेस भाजपा से आगे बढ़त बना चुकी थी इसीलिए बड़े राजनीतिक दल के रूप में कांग्रेस को सरकार बनाने का न्योता दिया गया। लेकिन इस बार परिस्थितियां बदली है केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है तथा वर्ष 2017 के चुनावी माहौल को देखते हुए निश्चित रूप से भारतीय जनता पार्टी ऐसी परिस्थितियों को अपने और अवसर के रूप में बदलने का पूरा प्रयास करेगी और इसी के लिए कैलाश विजयवर्गीय ने देहरादून में डेरा डाल रखा है।

वर्ष 2017 में तब गोवा और मणिपुर की सरकारों के गठन में जिस तरह से भाजपा ने राजनैतिक हथकंडे को डंडे के रूप में इस्तेमाल किया था और अपनी सरकार बनाई थी उससे उत्तराखंड कांग्रेस भी संशय में है। केंद्र में सत्तासीन होने तथा केंद्र का ही नुमाइंदा राज्यपाल का निर्णय सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा बद्रीनाथ के निवर्तमान विधायक महेंद्र भट का यह बयान इस शंका की पुष्टि करता है कि कहीं न कहीं भाजपा किसी भी कीमत पर केंद्र के इंजन के साथ उत्तराखंड को जोड़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा।

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