कैप्टन ने हरदा को किया बेपर्दा, पंजाब से हुई छुट्टी!

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चंड़ीगढ़ एसकेटी डॉटकॉम

पंजाब में सत्ताधारी पार्टी के अंदर मची उथल-पुथल के बाद अब इसकी आंच प्रभारी हरीश रावत तक पहुंच गई है हरीश रावत को संभवत हाईकमान ने छुट्टी दे ने का मन बना लिया है। पंजाब का प्रभार अब सह प्रभारी रह चुके कैबिनेट मंत्री हरीश चौधरी को दीया जा रहा है।

दरसल हरीश रावत के बयान वहां के नेताओं में गलतफहमी पैदा करते रहे जिससे वहां सुलह के बजाय झगड़ा बढ़ता गया जिसका असर वहां पंजाब को आगामी 2022 में बड़े नुकसान के रूप में देखा जा रहा है।

हरीश रावत सिद्धू और कैप्टन के बीच सामाजस्य बनाने के बजाय गलतफहमी बढ़ाते चले गए जिसकी वजह से कभी अमरिंदर तो कभी सिद्धू भारी होने लगे, कैप्टन की नाराजगी के बावजूद हरीश रावत ने सिद्धू को प्रधान बनवा दिया जिसका असर यह रहा की कैप्टन को अपनी बेइज्जती महसूस हुई और उन्होंने मुख्यमंत्री पद के साथ ही कांग्रेस को भी छोड़ने का मन बना लिया।

इधर चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद जब सिद्ध नाराज हुए तो उन्होंने प्रधान पद से इस्तीफा दे दिया इसके बाद हरीश रावत एक बार फिर से पंजाब जाना चाहते थे लेकिन हाईकमान ने उन्हें रोक दिया।

इसके बावजूद भी उन्होंने गुपचुप सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच होटल में मुलाकात करवाई और सिद्धू को डपट लगाते हुए शांत रहने को कहा। 1 मंत्री डीजी पी, तथा एजी के मामले को लेकर दोनों के बीच सहमति बनाई इस दौरान चौहान हरीश चौधरी भी मौजूद रहे।

माना यह जा रहा है की कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद सिद्धू शांत होकर बैठ गए थे लेकिन हरीश रावत ने सिद्धू को सक्रिय करते हुए उन्हें भविष्य का नेता बताया । कुछ मंत्रियों जोकि कैप्टन के खास थे के द्वारा नाराजगी व्यक्त करने के बाद रावत ने अपना बयान बदलते हुए कैप्टन के नेतृत्व में 2022 का चुनाव लड़ने की बात कही जिसके बाद सिद्धू गरम हो गए और उन्होंने अपने समर्थक मंत्रियों के माध्यम से पंजाब में माहौल गरमा दिया ।

इसके बाद सिद्धू को अध्यक्ष बनाना पड़ा। सिद्धू के अध्यक्ष बनने के बाद भी मामला ठंडा नहीं हुआ वह है अपने समर्थकों और विधायकों सके हरीश रावत और रणदीप सिंह सुरजेवाला को विधायकों के कैप्टन के खिलाफ नाराजगी के पत्र हाईकमान तक पहुंचा दिए तथा सिद्धू ने सुरजेवाला और हरीश रावत को अलग-अलग बातें बताई जिसस ब मामला सुधारने के बजाय उलझता गया और 1 महीने में तीन बार मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस को सत्ता में लाने वाले कैप्टन को हाईकमान ने तलब किया जिससे वह नाराज हो गए और उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने कहा कि सिद्धू ने अपनी कलाकारी दिखाते हुए हरीश रावत और रणदीप सिंह सुरजेवाला को भ्रम में डाल दिया कैप्टन ने अपने बयान में कहा कि हरीश रावत कहते हैं कि 43 विधायकों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ शिकायत की है जबकि सुरजेवाला ने यह संख्या 78 बताएं अब यह दो नेता बताएं कि कौन सी बात सच्ची है। वहीं उन्होंने हरीश रावत द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया कि वह अकाली नेताओं से मिले हुए हैं अगर वह अकाली नेताओं से मिले हुए होते तो 13 साल से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं लड़ रहे होते।

कुल मिलाकर यह कहा जाए कि हरीश रावत पंजाब का मामला संभाल नही पाए। जिसकी वजह से पंजाब में कांग्रेस को सत्ता हस्तांतरण करना पड़ा और अब कैप्टन ने सिद्धू की ओर निशाना साध दिया है उन्होंने कहा है कि वह किसी भी कीमत पर सिद्धू को जीतने नहीं देंगे। और इसके अलावा ना वह कांग्रेसमें रहेंगे ना वह भाजपा में जाएंगे बल्कि अपने नेतृत्व में राजनीतिक दल का गठन करेंगे जो पंजाब के लोगों की शिकायतों को दूर करेगा।

उन्होंने गृह मंत्री से मिलने वाली अटकलों को दूर करते हुए कहा कि पंजाब के ऊपर सीमा पार से ड्रोन आ रहे हैं कुछ ड्रोन तो वापस जा रहे हैं बाकी कहां जा रहे हैं इस संबंध में उन्होंने गृहमंत्री हमेशा से मुलाकात की और उन्हें सुरक्षा के बारे में स्थिति स्पष्ट की।

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