गोल्ड में आने वाली है सबसे बड़ी गिरावट, ₹1.10 लाख से भी कम रह जाएगी कीमत? बैंक ऑफ अमेरिका ने कारण भी बताए!
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| सोने में लगातार दूसरे हफ्ते गिरावट के बीच बैंक ऑफ अमेरिका (BofA Gold Price Outlook) ने ऐसा अनुमान दिया है, जो निवेशकों की चिंता बढ़ा सकता है। बैंक का कहना है कि चालू साल की चौथी तिमाही में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे जा सकती है।
बैंक का अनुमान है कि कीमत करीब 3,750 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकती है। भारतीय करेंसी में देखें तो यह स्तर करीब ₹1.15 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बैठ सकता है, हालांकि वास्तविक भारतीय कीमतें डॉलर-रुपया विनिमय दर (Exchange rate) और घरेलू बाजार की स्थिति पर निर्भर करेंगी।
क्यों बदला बैंक ऑफ अमेरिका का रुख?
बैंक ऑफ अमेरिका पिछले दो साल से सोने को लेकर काफी तेजी का अनुमान लगाने वाले संस्थानों में रहा है। बैंक सबसे पहले 5,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर का अनुमान लगाने वालों में शामिल था। हालांकि अब उसका रुख पहले के मुकाबले सतर्क हुआ है। इसकी बड़ी वजह ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।
1.10 लाख से नीचे पहुंच सकता है सोना?
बैंक के ताजा आउटलुक के मुताबिक, ऊंची ऊर्जा कीमतें सोने के लिए चुनौती बन सकती हैं। खासकर मध्य पूर्व और ईरान से जुड़े संघर्ष पर बाजार की नजर है। BofA के एनालिस्ट का कहना है कि,
अगर मध्य पूर्व में लंबे समय तक तनाव बना रहता है और कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती है, तो 2027 में सोने की औसत कीमत करीब 3,500 डॉलर प्रति औंस (भारतीय करेंसी में करीब 1.08 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) रह सकती है। हालांकि, बैंक ने इसे अपना मुख्य अनुमान नहीं बताया है।”
जनवरी में दिया था 5000 डॉलर का टारगेट
BofA के मुताबिक, अभी सोने की कीमतों को निवेशकों की मजबूत मांग से सहारा मिल रहा है। जनवरी में बैंक ने कहा था कि, सोने को करीब 5,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बनाए रखने के लिए निवेश मांग में लगभग 14% की बढ़ोतरी जरूरी होगी। लेकिन अब बैंक का कहना है कि मौजूदा निवेश मांग करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास की कीमत को ही सहारा देती है। बैंक के अनुसार,
5,000 डॉलर (भारतीय करेंसी में करीब 1.55 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) के स्तर तक पहुंचने के लिए निवेशकों की मांग में और तेज बढ़ोतरी जरूरी है, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसा मुश्किल हो सकता है।”
क्या हो सकता है सबसे बड़ा जोखिम?
सोने के लिए एक और बड़ा जोखिम सेंट्रल बैंकों की बिकवाली हो सकता है। BofA के मुताबिक,
तेल की बढ़ती कीमतों से ऊर्जा आयात करने वाले देशों की करेंसी और करंट अकाउंट पर दबाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ केंद्रीय बैंक अपनी अर्थव्यवस्था और मुद्रा को सहारा देने के लिए सोना बेच सकते हैं।”
बैंक ने बताया कि दूसरी तिमाही में तुर्की की अगुवाई में केंद्रीय बैंकों ने करीब 60 टन सोना बेचा। मार्च में भी केंद्रीय बैंक नेट सेलर बने थे। BofA के मुताबिक, अगर यह रुझान दोबारा मजबूत होता है और साथ ही रिटेल निवेशक गोल्ड ETF से पैसा निकालना शुरू करते हैं, तो सोने की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।
अभी कहां ट्रेड कर रहा सोना?
ग्लोबल मार्केट में सोना अभी 4217 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार (gold rate today) कर रहा है। वहीं चांदी 61 डॉलर के ऊपर ट्रेड (silver price today) कर रही है। वहीं भारतीय वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर गोल्ड की कीमत 1,50,250 रुपए (gold price today) प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2,25,545 प्रति किलोग्राम (silver rate today) हो गई है।
बता दें कि ये हफ्ता लगातार दूसरा हफ्ता है, जब सोना और चांदी सस्ता हुआ है। इस हफ्ते सोना करीब 3200 रुपए और चांदी 9100 रुपए तक सस्ती हुआ है।
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