विधानसभा के सचिव मुकेश सिंघल की बढ़ेगी परेशानी, नियम विरुद्ध ले रहे थे IAS की पे स्केल!

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विधानसभा में बैकडोर से हुई भर्तियों की जांच शुरु होने के बाद अब विधानसभा के सचिव मुकेश सिंघल के ऊपर सबसे बड़ी मुसिबत आ सकती है। माना जा रहा है कि उनकी पूरी सर्विस अब दांव पर लगी हुई है।


दरअसल मुकेश सिंघल को विधानसभा अध्यक्षों ने विशेषाधिकार के सहारे देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक सेवा यानी IAS अफसरों के समकक्ष लाकर खड़ा कर दिया। इसे ऐसे समझिए कि मुकेश सिंघल पर विधानसभा अध्यक्षों की जबरदस्त मेहरबानी रही।


मुकेश सिंघल विधानसभा में बतौर शोध अधिकारी नियुक्त हुए। उन्हें प्रमोशन देकर वरिष्ठ शोध अधिकारी बनाया गया। इसके बाद विधानसभा ने शोध अधिकारियों के पदनाम बदलने की अनुमति मांगी। वित्त विभाग ने कहा कि इससे वित्तीय बोझ बढ़ेगा। पर विधानसभा ने स्पष्ट किया कि सिर्फ नाम बदला जाएगा और इससे वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। लिहाजा वित्त विभाग ने अनुमति दे दी लेकिन शर्त लगाई कि इस कैडर के अधिकारियों को किसी अन्य कैडर में समायोजित नहीं किया जाएगा।


इसके बाद मुकेश सिंघल पर मेहरबानी जारी रही। यही नहीं नियम विरुद्ध मुकेश सिंघल को सचिव कैडर में समायोजित कर दिया गया। उन्हे उप सचिव से होते हुए संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्ति दी गई। इसी दौरान विधानसभा के सचिव जगदीश चंद्र रिटायर हो गए। उधर प्रेमचंद अग्रवाल ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए मुकेश सिंघल को प्रभारी सचिव और बाद में विधानसभा का सचिव बना दिया।



सूत्र बतातें हैं कि मुकेश सिंघल पर विधानसभा अध्यक्षों की मेहरबानी का अंजाम ये हुआ कि वो लेवल 14 की पे स्केल तक पहुंच गए। यानी 16 साल की लंबी नौकरी करने के बाद जितना एक आईएएस अफसर तनख्वाह पाता है उतनी ही तनख्वाह अब मुकेश सिंघल को भी मिलने लगी।


खबरें हैं कि वित्त सचिव अमित नेगी ने विधानसभा को इस संबंध में पत्र भी लिखा लेकिन अध्यक्षों ने अपने विशेषाधिकार के तहत इन पत्रों को दबा दिया।


वहीं अब जब विधानसभा में हुई नियुक्तियों की जांच शुरु हुई है तो मुकेश सिंघल का कमरा खुद विधानसभा अध्यक्ष ने अपने सामने सील करा दिया है। बताया जा रहा है कि मुकेश सिंघल मेहरबानियों वाली नौकरियों से जुड़ी पत्रावलियां अपने पास ही रखते थे।

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