पहाड़ों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल: रातभर अस्पतालों के चक्कर काटते रहा घायल, इलाज के दौरान मौत

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उत्तराखंड में पहाड़ों का हेल्थकेयर सिस्टम खुद ही आईसीयू में नजर आ रहा है। ताजा मामला अल्मोड़ा के भतरौजखान का है। जहां एक पूर्व प्रधान को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। लेकिन अस्पताल से जो तस्वीरें सामने आई है उसने सबको हैरान कर दिया। साथ ही उत्तराखंड में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के दावों की पोल खोल दी है।

घायल अवस्था में इलाज के लिए भटकता रहा पीड़ित

पीड़ित के परिजनों के फ़ोन से देर रात अस्पताल का वीडियो रिकॉर्ड किया गया है। परिजनों के मुताबिक रात भौनली गांव के पूर्व प्रधान गणेश गिरी दीवार से गिर गए थे। जिस वजह से वो गंभीर रुप से घायल हो गए। आनन फानन में उनके परिजन उन्हें लेकर भतरौंजखान के PHC सेंटर लेकर गए। वहां से जो तस्वीर सामने आई है उससे देख कर लग रहा है मानो पीएचसी सेंटर खुद आईसीयू में हो।

पहाड़ की हेल्थकेयर पर उठे सवाल

पूर्व प्रधान के परिवार द्वारा शूट किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि पीएचसी सेंटर के सभी कमरे बंद थे और उनमें ताला जड़ा हुआ था। हालांकि पीएचसी सेंटर की दीवार पर एक फोन नंबर लिखा हुआ था। जो शायद इमरजेंसी में फोन करने के लिए था। पीड़ित के परिजनों के मुताबिक जैसे ही उस नंबर पर फोन किया तो उस नंबर में इंकमिंग सुविधाएं बंद थी। यानी उस फोन नंबर पर रिचार्ज ही नहीं कराया गया था।

हालत गंभीर होने के बाद लगाए अस्पतालों के चक्कर

घायल के परिजनों का कहना है कि उसी पीएचसी में कुछ देर बाद डॉक्टर पहुंचे और उन्होंने गणेश गिरी का इलाज करना जरूर शुरू किया। इलाज शुरू होते ही गणेश गिरी की हालत और खराब होने लगी। जिसके चलते भतरोंजखान पीएचसी से पूर्व प्रधान को रानीखेत रेफर किया। हालत को लगातार गंभीर होता देख आनन फानन में गणेश को अल्मोड़ा के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।

अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी पूर्व प्रधान की मौत

गंभीर हालत में रात भर तीन अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी पूर्व प्रधान गणेश गिरी की मौत हो गई। जिसके बाद एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे। साथ ही अस्पताल पर लापरवाही करने के भी आरोप लगने लगे। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही के सभी आरोपों से इंकार कर दिया है।

DM ने दिए जांच के आदेश

अल्मोड़ा के CMO डॉ. हरीश चंद्र पंत का कहना है कि पीएचसी में डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों तैनात हैं। सूचना मिलते ही डॉक्टर अस्पताल पहुंचे। करीब डेढ़ घंटे तक मरीज का इलाज किया और हालत गंभीर होने पर उन्हें रेफर किया। वहीं, स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की लापरवाही की चर्चाओं के बीच जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने इस पूरे मामले में जांच के आदेश दिए हैं।

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