प्रीतम के भाई से जुड़े वायरल कथित ऑडियो मामले पर सियासत, सीएम ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश

उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक प्रीतम सिंह के भाई से जुड़े एक कथित वायरल ऑडियो प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच होना बेहद आवश्यक है। गुरुवार को मुख्यमंत्री धामी ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इस प्रकरण की पार्टी स्तर पर भी जांच की जा रही है, ताकि इसके वास्तविक तथ्य जनता के सामने आ सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में यह भी कहा कि सरकार हर पीड़ित के साथ मजबूती से खड़ी है और प्रदेश में न्याय तथा निष्पक्षता हमेशा सर्वोपरि है।
मधु चौहान ने बोला था तीखा हमला, की थी जांच की मांग
इससे पहले, बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने इस वायरल ऑडियो क्लिप को लेकर कांग्रेस पार्टी और प्रीतम सिंह के परिजनों पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने मांग की थी कि इस पूरे वायरल ऑडियो की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऑडियो में जिस प्रकार की धमकी भरी भाषा, महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियां और अभद्र गाली-गलौज सामने आई है, वह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। भाजपा नेत्री ने आरोप लगाया कि यदि वायरल ऑडियो में सामने आए तथ्य सही हैं, तो यह सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी की महिला सम्मान और न्याय की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस पार्टी को तत्काल यह स्पष्ट करना चाहिए कि महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली इस भाषा और दबंगई पर उसका आधिकारिक रुख क्या है।
‘न्याय यात्रा’ पर उठाए सवाल
मधु चौहान ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ कांग्रेस पार्टी प्रदेशभर में ‘न्याय यात्रा’ निकालकर न्याय और महिला सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके अपने नेताओं और परिजनों से जुड़े वायरल ऑडियो में कथित तौर पर अमर्यादित भाषा और धमकियों के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान की रक्षा केवल मंचों से भाषण देने से नहीं होती, बल्कि उसे अपने व्यवहार और आचरण में साबित करना पड़ता है।भाजपा नेत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी असहमति का जवाब धमकी, दबंगई और गाली-गलौज से देना किसी भी सभ्य राजनीतिक संस्कृति के अनुकूल नहीं हो सकता
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