पत्रकार उमेश कुमार की याचिका बनी पूर्व सीएम के खास सलाहकारों के लिए मुसीबत, सरकार से हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

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नैनीताल एसकेटी डॉटकॉम

इलेक्ट्रॉनिक चैनल के पत्रकार उमेश कुमार द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खास सलाहकारों के लिए मुसीबत बन सकती है। खास सलाहकारों धीरेंद्र पंवार एवं रमेश भट्ट पर याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इन्होंने देहरादून में 45 बीघा जमीन कौड़ियों के भाव खरीद कर वहां पहुंचने के लिए सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग कर भारी भरकम पुल का निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री के प्रभाव के चलते करवा दिया।

अक्सर यह देखा जाता है की कार्यदाई संस्था चाहे वह लोनिवि हो अथवा कोई अन्य वह अपने तय समय सीमा से भी अधिक सीमा में भी कार्य को पूरा नहीं कर पाती है लेकिन यहां पर लोक निर्माण विभाग ने मुख्यमंत्री के प्रभाव में इतनी तेजी से काम किया कि भारी-भरकम पुल सिर्फ 12 महीने में ही तैयार हो गया। जबकि समय सीमा तय होने के बाद भी कई पुल बरसो लटके रहते हैं।

पत्रकार उमेश कुमार की याचिका पर सरकार से इस पुल के निर्माण में हुई धन की बर्बादी पर जवाब 3 हफ्ते में देने को कहा है। पत्रकार उमेश कुमार ने याचिका में कहा कि इन दोनों सलाहकारों ने बंजर भूमि पर सैकड़ों की आबादी दिखाकर नदी पर पुल तैयार करवाया जबकि वहां पर कोई भी आबादी नहीं है इस पर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। हाईकर्ट में न्यायमूर्ति आर एस चौहान और आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में दाखिल उमेश कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा गया है कि सरकार इस मामले में 3 सप्ताह में आपत्ति दर्ज करें और याचिकाकर्ता भी इस मामले में ठोस सबूत पेश करें।

अदालत द्वारा इस याचिका का संज्ञान लेने के बाद अब इन दोनों सलाहकारों के प्रभाव में किए गए कार्य से सरकार के लिए जवाब देना भारी पड़ सकता है। उमेश कुमार इलेक्ट्रॉनिक चैनल के स्वामी भी रहे हैं और उन्होंने कई ऐसे मामले उजागर किए हैं जिनके कारण वह सुर्खियों में रहे हैं। उन्होंने पूर्व सीएम हरीश रावत कास्टिंग भी किया था इसके अलावा भाजपा की 2008 के बाद निशंक सरकार के कई प्रोजेक्ट पर भी सिंह किया ।

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