नेपाल की बाढ़ बनी जहरीला पानी! छूते ही शरीर पर फैल रहा खौफनाक इंफेक्शन, भारत के इस राज्य में भी हड़कंप
नेपाल जलप्रलय के 12 दिन बाद तबाही ने नया मोड़ ले लिया है। नेपाल से आए दूषित पानी से यूपी के कुशीनगर और महराजगंज में जहरीला त्वचा इंफेक्शन फैल रहा है। नेपाल में 1300 से ज्यादा जानें गईं और 5000 लापता हैं। जानिए सीमा पार का पूरा हाल।
Kathmandu: नेपाल में आई कुदरती आफत के 12 दिन बीत जाने के बाद भी तबाही के निशान मिटने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक तरफ जहां नेपाल मलबे के ढेर में अपनों की तलाश और जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की जंग लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस प्रलय का खतरनाक असर अब भारतीय सीमा में दिखने लगा है।
नेपाल से बहकर भारत की ओर आए पानी ने कुशीनगर और महराजगंज के सीमावर्ती इलाकों में एक नई चिकित्सा आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है। बाढ़ का पानी अब केवल तबाही का कारण नहीं, बल्कि जहरीला संक्रमण बनकर उभरा है।
दूषित पानी से बढ़ा छूत का खतरा, घर-घर फैल रहा त्वचा इंफेक्शन
कुशीनगर और महराजगंज के कई गांवों में बाढ़ का पानी संपर्क में आते ही त्वचा से संबंधित गंभीर बीमारियां फैला रहा है। आपदा के बाद जब बुजुर्ग और किसान अपने जलमग्न खेतों में काम करने उतरे, तो वे सबसे पहले इस बीमारी की चपेट में आए।
पीड़ित लोगों के शरीर पर लाल चकत्ते, दाने और असहनीय खुजली की शिकायत हो रही है। चिंताजनक बात यह है कि यह संक्रमण अब एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैल रहा है, जिससे इसकी चेन तोड़ना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
बैक्टीरिया का हमला: शरीर पर पड़ रहे गहरे निशान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ के रुके हुए पानी में ई. कोलाई (E. coli) और फेकल बैक्टीरिया जैसे घातक जीवाणु अत्यधिक मात्रा में पनप रहे हैं। महराजगंज जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि यह बैक्टीरिया त्वचा की ऊपरी सुरक्षात्मक परत को कमजोर कर देते हैं, जिससे चंद दिनों के भीतर ही मरीज की हालत बिगड़ने लगती है। पीपरीघाट और सेवरही के दर्जनों ग्रामीण इस समय शरीर पर पड़ रहे निशानों और दानों के कारण इलाज कराने को मजबूर हैं।
नेपाल में तबाही के 12 दिन: अपनों की तलाश और फिर से खड़े होने की जंग
सीमा पार नेपाल में भी हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। 12 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद नेपाली सेना और इंजीनियर अस्थायी पुलों के सहारे राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं। अब तक 1,344 से अधिक लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है, जबकि 5,000 लोग अब भी लापता हैं।
भारी भूस्खलन और सैलाब के कारण 7,500 से अधिक घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और कई किलोमीटर लंबी सड़कें पानी में बह गईं। लोग मलबे में जीवन का सामान तलाश रहे हैं।
चीन के सीमावर्ती इलाकों में विनाश और पर्यटन पर नेपाल का बयान
चीन ने 12 दिनों बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया को गिरयोंग काउंटी में प्रवेश की अनुमति दी, जहां तबाही का खौफनाक मंजर देखने को मिला। आव्रजन चौकी समेत बुनियादी ढांचा पूरी तरह जमींदोज हो चुका है।
इस विकट परिस्थिति के बीच नेपाल सरकार ने मित्र राष्ट्रों से अपील की है कि वे अपनी ट्रैवल एडवाइजरी केवल बाढ़ प्रभावित हिस्सों तक ही सीमित रखें, क्योंकि देश के बाकी पर्यटन क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं।
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 सच की तोप व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें


