बड़ी आपदा के मुहाने पर जोशीमठ, 559 मकानों में दरारें, लोगों में दहशत

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जोशीमठ बड़े भूधंसाव के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है। यहां के लोग पिछले कई दिनों से भूधंसाव पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए आंदोलन कर रहे थे। लोगों ने धरना प्रदर्शन किया, जुलूस निकाला। अब जाकर शासन जागा और जोशीमठ में भूधंसाव को लेकर सर्वे कराने के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही पूरे इलाके में ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने के लिए भी योजना बनाई गई है।


जोशीमठ भारत की धार्मिक सांस्कृतिक विरासत का एक अहम कस्बा है। सैकड़ों सालों से जोशीमठ बद्रीनाथ के दर्शन करने के लिए आने वालों के लिए जोशीमठ एक अहम पड़ाव रहा है। इसके साथ ही ये सामरिक महत्व से भी बेहद अहम कस्बा है लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही ने इस पूरे नगर के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।


जोशीमठ नगर में हाल ही में भूधंसाव की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। नगर पालिका की रिपोर्ट के अनुसार जोशीमठ के 559 मकानों में दरारें आ गईं हैं। हर तीन दिनों में 40 से अधिक मकानों में दरार रिपोर्ट की जा रही है। यही नहीं ब्रदीनाथ हाईवे पर दो बड़े होटल भूधंसाव के कारण तिरछे होकर एक दूसरे से चिपक गए हैं। आशंका है कि ये कभी भी ध्वस्त हो सकते हैं।


नगर पालिका ने इस संबंध में जो विस्तृत रिपोर्ट बनाई है उसके मुताबिक गांधीनगर वार्ड में 133, मारवाड़ी में 28, रविग्राम में 153 मकान भूधंसाव की चपेट में हैं। इसके अलावा भी कई मकानों में बड़ी दरारेें आ चुकी हैं। कई लोगों ने अपना मकान खाली कर दिया है और सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। इसके साथ ही कई लोग अब भी दरारों वाले मकानों में रहने का खतरा उठा रहें हैं। ये वो लोग हैं जिनके पास कोई और चारा नहीं है।


अब जागे सरकारी अधिकारी
इस पूरे मामले में सरकारी मशीनरी की सुस्ती ने जोशीमठ नगर को बड़ी तबाही के मुहाने पर खड़ा कर दिया। सूत्रों की माने तो जोशीमठ में भूधंसाव की आशंका कई साल पुरानी है। इसके बावजूद यहां ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत नहीं किया गया। इसके साथ ही कई लोगों ने ऑलवेदर रोड के निर्माण के लिए जोशीमठ के नीचे से निकाले जा रहे बाइपास के लिए जेसीबी से हो रही कटिंग को लेकर सवाल उठाए हैं। ये कई कारण एक साथ मिले और अब जोशीमठ नगर बड़ी आपदा के मुहाने पर आ गया है।


अब फिर होगा सर्वे, ड्रेनेज सिस्टम के लिए टेंडर
जोशीमठ में हो रहे भूधंसाव का फिर एक बार नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा। आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा ने इस संबंध में चमोली के डीएम को निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अब सिंचाई विभाग भी जागा है और जोशीमठ में कंसल्टेंट नियुक्त कर ड्रेनेज प्लान और डीपीआर बनाने की तैयारी चल रही है। डीपीआर के लिए 20 जनवरी को टेंडर निकाला जाएगा।


वहीं आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रभावित लोगों के पुनर्वास की तैयारी शुरु की है। इस संबंध में 15 जनवरी को बैठक बुलाई गई है। वहीं अलकनंदा नदी की ओर से हो रहे कटाव को रोकने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।

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