यहाँ रानीखेत में भेड़ को बचाने के लिए बाघ से भिड़ गया चरवाहा अस्पताल में भर्ती

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रानीखेत एसकेटी डॉट कॉम

अपने हाथों से पाले जाने कोई भी जानवर अपने सगे से भी ज्यादा प्यारा लगता है जब कभी उसकी जान पर कोई खतरा होता है तो उसको बचाने के लिए पालने वाला अपनी जान पर भी खेल जाता है ऐसा ही क्या रानीखेत के द्वारसों गांव में घटा जहां गुलदार के द्वारा भेड़ पर हमला किए जाने के बाद चरवाहे ने गुलदार के साथ गूथम गुँथा कार दी.

रानीखेत के द्वारसौं गांव में उच्च हिमालय से भेड़ लेकर पहुंचे चरवाहे का तेंदुए से सामना हो गया। भेड़ बचाने के लिए चरवाहा भी तेंदुए से भिड़ गया। तेंदुए ने उन पर हमला कर दांत गड़ा दिए। कुत्तों के शोर मचाने पर तेंदुआ भाग गया। राजकीय अस्पताल रानीखेत में चरवाहे का इलाज चल रहा है।

सर्दियों में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोग निचले क्षेत्रों में प्रवास पर आते हैं। शनिवार को पंडेरगाव, चमोली निवासी यशपाल सिंह नेगी ने शनिवार शाम भेड़-बकरियों के झुंड के साथ परंपरागत पड़ाव द्वारसौं के कालीगाड़ जंगल में डेरा डाला। साथ में मित्र डबल सिंह भी थे। खाना खाने के बाद सब सो गए थे। देर रात तेंदुए ने भेड़ों के झुंड पर हमला कर दिया और तेंदुआ एक भेड़ को उठाकर ले जाने लगा।यशपाल सिंह ने भेड़ को बचाने का प्रयास किया लेकिन तेंदुए ने उन पर हमला कर हाथ में दांत गड़ा दिए। शोर मचने पर दल के साथ पहुंचे कुत्तों ने तेंदुए को वहां से खदेड़ दिया। द्वारसौं वन चौकी के वनकर्मी राजेंद्र प्रसाद को सूचना मिलने के बाद वह भी मौके पर पहुंच गए। घायल यशपाल सिंह को निजी वाहन से राजकीय अस्पताल रानीखेत पहुंचाया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में पिंजरा लगाने की मांग उठाई.
रात में सूचना मिलने के बाद मैं स्वयं टीम को लेकर वहां पहुंचा। घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है हालांकि उनकी हालत खतरे से बाहर है। जल्द उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है। – तापस मिश्रा, वन क्षेत्राधिकारी रानीखेत

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