पार्टी में दोस्ती, होटल में दुष्कर्म का आरोप…
दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट यूनिट ने इंटरपोल (INTERPOL), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), गृह मंत्रालय (MHA) और विदेश मंत्रालय (MEA) के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी से बलात्कार के एक आरोपी को सफलतापूर्वक…
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट यूनिट ने इंटरपोल (INTERPOL), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), गृह मंत्रालय (MHA) और विदेश मंत्रालय (MEA) के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी से बलात्कार के एक आरोपी को सफलतापूर्वक वापस भारत ला दिया है।
आरोपी की पहचान केरल के कन्नूर निवासी और ‘जॉयलुकास’ (Joyalukkas) में सीनियर मैनेजर, सजीर पल्ली मूप्पन उर्फ सजीर पीएम (38) के रूप में हुई है। उसे अबू धाबी से प्रत्यर्पित करके 4 नवंबर, 2026 को भारत लाया गया, ताकि वह 20 वर्षीय महिला के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले में मुकदमे का सामना कर सके।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 1 अक्टूबर, 2025 की रात दिल्ली के पंजाबी बाग स्थित एक लाउंज में कंपनी कर्मचारियों के लिए एक बर्थडे पार्टी आयोजित की गई थी। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी ने महिला को शराब और नशीले पदार्थ दिए और फिर उसका यौन उत्पीड़न किया।
शिकायत के अनुसार, कंपनी में मैनेजर के तौर पर काम करने वाले आरोपी ने महिला को शराब और नशीले पदार्थ दिए। इसके बाद वह उसे करोल बाग के एक होटल में ले गया, जहां 2 अक्टूबर, 2025 की तड़के उसने महिला की मर्जी के खिलाफ उसका यौन उत्पीड़न किया।
यह भी आरोप है कि होटल में चेक-इन करते समय, पीड़िता की पहचान छिपाने के लिए आरोपी ने किसी तीसरे व्यक्ति के पहचान दस्तावेज दिए थे। घटना के बाद, महिला ने सबसे पहले कंपनी प्रबंधन को इस बारे में सूचित किया। 4 अक्टूबर, 2025 को प्रबंधन ने आरोपी को ‘शो-कॉज नोटिस’ (कारण बताओ नोटिस) जारी किया और ‘प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरासमेंट’ (POSH) ढांचे के तहत अपनी आंतरिक समिति के माध्यम से जांच शुरू की। हालांकि, आरोपी इस आंतरिक जांच में शामिल नहीं हुआ।
कानूनी कार्रवाई के डर से, आरोपी 4 अक्टूबर, 2025 से ही कंपनी से गायब हो गया और कथित तौर पर देश छोड़कर भागने की योजना बनाने लगा। इसके बाद, 18 दिसंबर 2025 को पीड़िता ने कंपनी के अधिकारियों को ईमेल के जरिए एक और औपचारिक शिकायत भेजी।
इस बीच, अपने यात्रा दस्तावेज तैयार करवाकर, आरोपी 5 जनवरी 2026 को भारत से भाग गया और बाद में दुबई, UAE में प्लंबिंग के सामान की एक दुकान पर काम करने लगा।18 फरवरी 2026 को पीड़िता ने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर, करोल बाग पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 64(1), 123, 319 और 3(5) के तहत FIR नंबर 237/26 दर्ज की गई और मामले की जांच शुरू हुई।
जांच के दौरान, पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उसका बयान दर्ज किया गया। जांच टीम ने पंजाबी बाग के लाउंज और करोल बाग के होटल से जरूरी तकनीकी और दस्तावेजी सबूत जुटाए। घटनाओं के क्रम को स्थापित करने और आरोपों की पुष्टि करने के लिए होटल के रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, पहचान दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री को भी रिकॉर्ड में शामिल किया गया।
शुरुआत में, करोल बाग पुलिस स्टेशन की एक टीम ने आरोपी को खोजने के लिए काफी प्रयास किए और उसकी तलाश में केरल तक गई। केरल में जांच के दौरान पता चला कि आरोपी पहले ही भारत छोड़ चुका था। आगे की तकनीकी जांच से यह स्पष्ट हुआ कि वह 5 जनवरी 2026 को UAE चला गया था।
आरोपी के देश से भाग जाने को देखते हुए, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खोजने के लिए 30 अप्रैल 2026 को ‘भारतपोल’ (BHARATPOL) के माध्यम से इंटरपोल (INTERPOL) को एक सूचना भेजी गई। आरोपी के प्रत्यर्पण (extradition) को सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई, जिसका काम जरूरी शुरुआती तैयारी करना, आवश्यक दस्तावेज तैयार करना और CBI तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय करना था।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लगातार प्रयासों और समन्वय के जरिए, आरोपी के संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में होने का पता चला। ‘घोषित अपराधी’ (PO) से जुड़ी जरूरी कार्यवाही पूरी होने के बाद, 7 जुलाई 2026 को इंटरपोल के जरिए उसके खिलाफ ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ (RCN) जारी किया गया।
जांच टीम ने प्रत्यर्पण (extradition) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और जरूरी कानूनी व प्रशासनिक औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए CBI, इंटरपोल, गृह मंत्रालय (MHA), विदेश मंत्रालय (MEA), ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BOI) और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार तालमेल बनाए रखा। टीम ने ‘भारतपोल’ (BHARATPOL) का भी इस्तेमाल किया, जो CBI द्वारा विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इंटरपोल से जोड़ता है। यह प्लेटफॉर्म अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग, सूचनाओं के सुरक्षित आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय सहायता के अनुरोधों (जिसमें इंटरपोल नोटिस जारी करना भी शामिल है) में मदद करता है।
जरूरी कानूनी कार्यवाही पूरी होने के बाद, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी में सक्षम प्राधिकारी ने 9 अक्टूबर 2026 को प्रत्यर्पण के अनुरोध को मंजूरी दे दी। इसके बाद, इंस्पेक्टर कपिल खोखर, सब-इंस्पेक्टर काजल त्यागी और सब-इंस्पेक्टर संदीप की तीन सदस्यीय पुलिस टीम बनाई गई। इस टीम को 31 अक्टूबर 2026 को UAE भेजा गया, ताकि जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें और आरोपी को वापस भारत लाया जा सके। 4 नवंबर 2026 को, सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताओं और कागजी कार्रवाई को पूरा करने के बाद, UAE के अधिकारियों ने आरोपी को आधिकारिक तौर पर दिल्ली पुलिस की टीम को सौंप दिया।
इसके बाद, UAE से प्रत्यर्पण (extradition) के जरिए आरोपी को वापस भारत लाया गया। अब भारत में कानून की उचित प्रक्रिया के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि टीम की लगातार कोशिशों, बारीकी से की गई फॉलो-अप कार्रवाई और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल की वजह से ही आरोपी का प्रत्यर्पण संभव हो सका।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि वे लगातार जांच, ‘भारतपोल’ (BHARATPOL) जैसे प्लेटफॉर्म के प्रभावी इस्तेमाल, और CBI, इंटरपोल (INTERPOL), गृह मंत्रालय (MHA), विदेश मंत्रालय (MEA) व अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अपराधी चाहे कहीं भी हों, उन्हें कानून के दायरे में लाया जा सके
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