हाथ-पैर में बार-बार झुनझुनी होती है? इसके पीछे हो सकती हैं ये 7 छिपी वजहें
हाथों या पैरों में अचानक चींटियों जैसी रेंगन, सुई चुभने जैसा हल्का एहसास या कुछ देर का सुन्नपन — यह अनुभव लगभग हर किसी को कभी न कभी होता है। दरअसल, hath pair me jhunjhuni ke karan कई हो सकते हैं और ज्यादातर मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। लेकिन जब यही झुनझुनी बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो वजह समझना जरूरी हो जाता है।
असल में झुनझुनी तब होती है जब शरीर की नसों को मिलने वाले संकेतों में रुकावट आ जाती है। नसें दिमाग और शरीर के बीच संदेश पहुंचाती हैं। जब किसी नस पर दबाव पड़ता है, तो दिमाग को अजीब संकेत मिलने लगते हैं — और वही हमें झुनझुनी या सुन्नपन के रूप में महसूस होता है।
एक ही पोजिशन में देर तक बैठने से नसें क्यों दब जाती हैं
झुनझुनी का सबसे आम कारण है — लंबे समय तक एक ही पोजिशन में बैठना, खड़े रहना या सोना। हाथ पर सिर रखकर सो जाना, पैर पर पैर चढ़ाकर घंटों बैठना या झुककर काम करना — इन सबमें किसी न किसी नस पर दबाव पड़ता है और खून का संचार धीमा हो जाता है। पोजिशन बदलते ही यह एहसास कुछ मिनटों में अपने आप गायब हो जाता है।
गर्दन, कमर या कलाई की नस पर लगातार दबाव भी झुनझुनी की वजह बन सकता है। दिनभर मोबाइल-लैपटॉप पर झुके रहने वालों की गर्दन की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हाथों-उंगलियों में झुनझुनी हो सकती है। लगातार टाइपिंग या भारी सामान उठाने से कलाई की नस भी प्रभावित हो सकती है।
झुनझुनी के पीछे की ये 7 वजहें जान लीजिए — इनमें से कोई एक आपकी भी हो सकती है
1. एक ही पोजिशन में देर तक रहना — नस दबने से होने वाली झुनझुनी सबसे आम और आमतौर पर हानिरहित होती है।
2. नसों पर लगातार दबाव — गर्दन, कमर या कलाई की नस का दबना, जैसे गलत पोस्चर या एक जैसा काम बार-बार करने से, हाथ-पैरों में बार-बार झुनझुनी हो सकती है।
3. विटामिन B12 की कमी की संभावना — B12 की कमी से नसें कमजोर हो सकती हैं, जिससे हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन महसूस हो सकता है। शाकाहारी खानपान वालों में इसकी आशंका थोड़ी ज्यादा मानी जाती है।
4. डायबिटीज में नसों पर असर की संभावना — लंबे समय से बढ़ा शुगर लेवल नसों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे खासतौर पर पैरों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन हो सकता है।
5. खून का संचार धीमा होना — ठंड में, लंबे समय निष्क्रिय रहने पर या शरीर में पानी की कमी से हाथ-पैरों तक खून का प्रवाह कम हो सकता है और झुनझुनी हो सकती है।
6. थकान, तनाव और नींद की कमी — लगातार तनाव या अधूरी नींद में शरीर की संवेदनशीलता बढ़ जाती है और मामूली झुनझुनी भी ज्यादा महसूस होने लगती है।
7. कुछ दवाओं या स्वास्थ्य स्थितियों का असर — कुछ दवाओं के दौरान या थायरॉयड जैसी स्थितियों में भी झुनझुनी एक संभावित लक्षण हो सकती है। ऐसी स्थिति में खुद दवा बंद न करें, डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
ध्यान रहे, ये सभी संभावित कारण हैं, निश्चित निदान नहीं। असली वजह सिर्फ जांच के बाद ही पता चल सकती है, इसलिए अंदाजे पर कोई नतीजा न निकालें।
झुनझुनी कब बन जाती है खतरे की घंटी? इन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर से मिलें
अगर झुनझुनी शरीर के एक तरफ अचानक शुरू हो और साथ में बोलने में दिक्कत, चेहरे का टेढ़ापन या एक हाथ-पैर में कमजोरी महसूस हो, तो यह आपात स्थिति हो सकती है — तुरंत डॉक्टर या अस्पताल जाएं। झुनझुनी लगातार बढ़ रही हो, हफ्तों से बनी हो, या चलने-फिरने में दिक्कत हो रही हो, तब भी जांच जरूरी है।
रोजमर्रा में बचाव के लिए हर आधे-एक घंटे में पोजिशन बदलें, हल्की स्ट्रेचिंग करें, गर्दन-कंधे सीधे रखें, पर्याप्त पानी पिएं और संतुलित आहार लें। सोते समय हाथ तकिए के नीचे न दबाएं। ये छोटे बदलाव नसों पर पड़ने वाले रोज के दबाव को काफी कम कर देते हैं।
कुल मिलाकर, कभी-कभार की झुनझुनी घबराने की बात नहीं, लेकिन शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं। सही जानकारी और समय पर डॉक्टर की सलाह ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
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