#festival यम का यमुना से मिलने का त्यौहार है दुति त्यार, पहाड़ों में भाई दूज पर मनाया जाता है धूमधाम से

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रक्षाबंधन के बाद भैयादूज भाई-बहन के प्रेम का एक अनूठा त्यौहार होता है। भाई-बहन के प्रेम का ये खास त्यौहार पहाड़ों में एक अनोखे तरीके से मनाया जाता है। देवभूमि उत्तराखंड के आंचल में इसे दुति त्यार कहा जाता है। जिसे पहाड़ों में खासकर कुमाऊं में धूमधाम से मनाया जाता है।

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यम का यमुना से मिलने का त्यौहार है दुति त्यार
देशभर नें भाईदूज का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है। पहाड़ों में इसे दुति त्यार के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक कहा जाता है माता यमुना सूर्य देव की पुत्री हैं और सूर्य की छाया और संज्ञा नाम की दो पत्नियों से यमुना, यम, शनिदेव तथा वैवस्वत मनु प्रकट हुए। जिस वजह से यमुना, यमराज और शनिदेव की बहन कही जाती हैं।

DUTI TYAR
बताया जाता है की कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया के दिन माता यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने निवास स्थान यमनोत्री में आमंत्रित करती हैं। यमुना के बार-बार आग्रह पर यमराज अपनी बहन के घर जाते हैं। लेकिन इससे पहले वो सभी नरक वासियों को मुक्त कर देते हैं।

DUTI TYAR
जब यमुना को ये पता चलता है तो वो काफी खुश होती हैं और कहती हैं कि आज के दिन अपने भाई का टीका करने और उसे भोजन करवाने वाली बहन को कभी भी यम का भय नहीं होगा। तब से यम दुति, भैया दूज या भ्रातृ टीका नाम का ये त्यौहार सारे देश भर में मनाया जाता है। इस दिन यमुना के दर्शन का भी विशेष महत्व शास्त्रों में वर्णित है।

पहाड़ों में भाई दूज पर मनाया जाता है धूमधाम से दुति त्यार
उत्तराखंड में इस त्यौहार को एक अनूठे ढंग से मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई के च्यूड़ों से टीका करती है। इन च्यूड़ों को दुति त्यार से कुछ दिन पहले से तैयार करना पड़ता है। च्यूडे़ बनाने के लिए पहाड़ी लाल धान को भिगो कर हल्का भून कर ओखली में कूटा जाता है।

दुति त्यार के दिन हरेले कि तरह ही बहन अपने हाथ में दूब और च्यूड़े पकड़ कर अपने भाई के पैर घुटने और कंधे का क्रमश स्पर्श कर उन च्यूड़ों को सिर पर रखती है। ऐसा एक से तीन बार किया जाता है। ये करने के साथ बहन अपने भाई को आशीष देती है –
जी रये जाग रये
स्याव जस चतुर है जाये, बाग जस बलवान है जाये
आकाश जस उच्च है जाये धरती जस चौड़ है जाये
दूब जस हरी जड़ हो ब्यर जस फइए
हिमाल में हयूं छन तक गंगज्यू में पाणी छन तक
यो दिन यो मास भेटने रये