दैन्यम भी पलायनम भी, रामनगर से हरिद्वार या लालकुंआ जा सकते हैं हरदा

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देहरादून एसकेटी डॉट कॉम

कांग्रेस की दूसरी सूची के बाद मुझे घमासान से न दैन्यं न पलायनम् का मंत्र देने वाले हरीश रावत दैन्यम भी हो रहे हैं और पलायन भी कर सकते हैं। रामनगर में प्रत्याशी घोषित होने के बाद जिस तरह से रंजीत सिंह रावत ने अपना स्टैंड नहीं बदला है उससे अब बब्बर शेर शेर की मार से वापस जाने को तैयार हो सकता है। चुनाव अभियान समिति के चेयरमैन को यह लग रहा है कि उनके रामनगर आने से कांग्रेस को जीत के बजाय हार का सामना करना पड़ सकता है ।

इसलिए उन्होंने निर्णय बदलते हुए रंजीत रावत को रामनगर देकर स्वयं हरिद्वार ग्रामीण अथवा लाल कुआं सीट पर चुनाव लड़ने की संभावना पर पार्टी को विचार करने को कहा है। हरिद्वार ग्रामीण की सीट अभी भी घोषित नहीं की गई है इस सीट पर उनकी बेटी अनुपमा रावत की दावेदारी भी है कांग्रेस पार्टी में किसी भी प्रत्याशी को 2 सीट नहीं दिए के फैसले के बाद अब उनके सामने दो ही विकल्प बचे हैं कि वह यह तो हरिद्वार ग्रामीण उसे चुनाव लड़ने अथवा लाल कुआं जैसी सुरक्षित सीट की ओर रुख करें।

जानकारी के अनुसार अभी 6 सीटों पर पेच फंसा हुआ है 27 तारीख अंतिम तिथि होने के कारण अब आज इन सीटों पर भी छाया हुआ कोहरा छट जाने की उम्मीद है। लाल कुआं विधानसभा में भी पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने टिकट बंटवारे को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके समर्थकों का दबाव है कि वह एक बार फिर कांग्रेस पार्टी के इस फैसले पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्दलीय ताल ठोक सकते हैं जिससे कांग्रेस पार्टी विचलित नजर आ रही है। तथा कांग्रेस की घोषित प्रत्याशी संध्या डालाकोटी दुर्गापाल के दरवाजे पर दस्तक दे रही है लेकिन दुर्गापाल समर्थकों ने उन्हें दरवाजे से ही बैरंग लौटा दिया। ठंड के इस मौसम में चढ़े राजनीतिक गर्म माहौल से राजनीतिक चिंतकों के माथे पर भी पसीने ला दिए हैं।

जानकारी के अनुसार चौबट्टा खाल ,रुड़की, हरिद्वार ग्रामीण ,सल्ट सीटें अभी घोषित होने के बाद क्या नया राजनीतिक नजारा देखने को मिलेगा कहा नहीं जा सकता है। हरक सिंह को किस सीट से उतारा जाए अथवा वह सिर्फ और सिर्फ पार्टी के लिए चुनाव लड़ाने का काम करेंगे या नहीं इस पर भी बात होनी तय है। रामनगर में हो रहे राजनीतिक नुकसान को देखते हुए हरीश रावत ने एक बार फिर पार्टी हाईकमान से उनके लिए नई परिस्थितियों के हिसाब से सीट तय करने को कहां है। वही कालाढूंगी सीट पर भी पार्टी क्या निर्णय लेती है यह भी काफी रोचक रहेगा। महेश शर्मा की कई समर्थकों ने पार्टी के इस निर्णय पर विरोध जताया है। जबकि अन्य दावेदारों ने इस पर अभी कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसके अलावा संगठन नेवी डॉक्टर महेंद्र सिंह पाल की दावेदारी पर कोई विरोध नहीं जताया

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