चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान: वोटर लिस्ट से नाम कटने वाले लोग अब ऐसे जुड़वा सकेंगे अपना नाम
इस समय मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) यानी एसआईआर की प्रक्रिया जोरों पर चल रही है। इसी के तहत गत 5 अगस्त को मतदाता सूची का नया ड्राफ्ट भी प्रकाशित कर दिया गया है।
झारखंड के गिरिडीह से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। झारखंड में इस समय मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) यानी एसआईआर की प्रक्रिया जोरों पर चल रही है। इसी के तहत गत 5 अगस्त को मतदाता सूची का नया ड्राफ्ट भी प्रकाशित कर दिया गया है।
लेकिन इस प्रक्रिया के सामने आते ही एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जिसके तहत अकेले गिरिडीह जिले में ही 2,75,560 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। अगर आपका या आपके किसी परिवार वाले का नाम भी इस लिस्ट से गायब है, तो चिंता करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने इसे सुधारने का पूरा मौका दिया है।
सूची से गायब हुआ नाम तो ऐसे दोबारा जुड़वाएं, जानें पूरा प्रोसेस
यदि प्रारूप मतदाता सूची में आपका नाम नहीं है या फिर वह विलोपित (कटे हुए) लोगों की सूची में चला गया है, तो आपको बिल्कुल भी परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। भारत निर्वाचन आयोग ने ऐसे सभी मतदाताओं को अपना नाम दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल करवाने का सुनहरा अवसर दिया है।
इस काम के लिए आपको मुख्य रूप से ‘प्रपत्र-6’ (Form 6) भरना होगा। हालांकि इस बार सिर्फ आवेदन फॉर्म जमा कर देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके साथ आपको दो पृष्ठों का एक विशेष घोषणा पत्र (Declaration Form) भी अनिवार्य रूप से देना होगा।
घोषणा पत्र में क्या-क्या भरना होगा और क्या हैं सख्त नियम?
इस घोषणा पत्र में आवेदक को अपना पूरा नाम, सही पता, मोबाइल नंबर, माता-पिता या पति-पत्नी का विवरण, यदि उपलब्ध हो तो ईपीआईसी (EPIC) नंबर और साथ ही यह जानकारी भी देनी होगी कि आपका नाम पहले किस मतदाता सूची में दर्ज था।
इसके अलावा आपको यह शपथ भी लिखित रूप में देनी होगी कि आपने किसी दूसरे देश की नागरिकता नहीं ली है और आपका नाम दुनिया के किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है। आपको बता दें कि यदि इस घोषणा पत्र में कोई भी जानकारी गलत पाई जाती है, तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
बीएलओ करेंगे दस्तावेजों की जांच, कौन-कौन से कागजात होंगे मान्य?
जैसे ही आप अपना घोषणा पत्र और फॉर्म जमा करेंगे, संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड के आधार पर इसकी पूरी जांच और सत्यापन करेगा। यदि पुराने रिकॉर्ड से आपकी दी गई जानकारी का मिलान नहीं हो पाता है, तो निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी आपसे आपकी जन्म तिथि, जन्म स्थान या फिर भारतीय नागरिकता से जुड़े जरूरी दस्तावेज मांग सकते हैं।
निर्वाचन आयोग ने जन्म वर्ष के आधार पर दस्तावेजों की अलग-अलग व्यवस्था तय की है। पहचान और नागरिकता के पुख्ता प्रमाण के तौर पर जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मैट्रिक का प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल), परिवार रजिस्टर, कोई भी सरकारी पहचान पत्र, भूमि आवंटन पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसे निर्धारित कागजात वैध माने जाएंगे और स्वीकार किए जाएंगे।
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