धामी ने लिखी विधानसभा अध्यक्ष को यह चिठ्ठी, क्या हो पायेगी जांच !

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देहरादून एसकेटी डॉट कॉम

विधानसभा सचिवालय में नेताओं के रिश्तेदारों की सिर्फ सिफारिश के आधार पर लगी नौकरियों की अभी पूरे राज्य में सोशल मीडिया समेत तमाम तरह के समाचार पत्रों, चैनलों मे चर्चा बनी हुई है.

इस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा अध्यक्ष रितु भूषण खंडूरी को 1 अगस्त को पत्र लिखकर सारे मामलों की जांच करने का आग्रह किया था उनसे अपेक्षा की थी के इन सभी मामलों कि अगर जांच हो तो विधानसभा की गरिमा बनी रहेगी इसके अलावा उन्होंने यह भी अवगत कराया कि सरकार द्वारा यूके ट्रिपल एससीई के पेपर लीक मामले में कार्यवाही करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया है तथा इसके लिए सरकार निष्पक्ष होकर जांच को अंजाम तक पहुंचाएगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा अध्यक्ष से यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की नियुक्तियों में पारदर्शिता अपनाई जानी बहुत आवश्यक है

इन सारे मामलों में राज गठन से आज तक के विधानसभा अध्यक्षों ने अपने अपने कार्यकाल में विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए सैकड़ों लोगों को नौकारियों पर लगाया. जिनमें सत्तारूढ़ पार्टियों के नेताओं के पुत्र पुत्रियां रिश्तेदार तथा उनके पीआरो के रिश्तेदारों को भी इन नौकरियों पर लगाया था.

पूर्व में विधानसभा अध्यक्ष रहे गोविंद सिंह कुंजवाल और प्रेमचंद्र अग्रवाल ने इस संबंध में अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि इससे पूर्व भी उत्तर प्रदेश उत्तराखंड में मुख्यमंत्रियों के रिश्तेदारों तथा मंत्रियों के रिश्तेदारों को भी विधान सभा सचिवालय में विशेष अधिकार के तहत नौकरियां दी गई है इसके बाद जनता में यह बात चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या विशेषाधिकार नेताओं के पुत्र पुत्रियों और मंत्रियों के रिश्तेदारों के लिए ही होता है सूची पर गौर किया जाए तो इनमें अधिकांश मंत्रियों नेताओं और पार्टी से जुड़े हुए बड़े नेताओं के रिश्तेदार ही नौकरियों पर रखे गए हैं विशेषाधिकार का लाभ किसी भी आमजन को नहीं मिला है इनमें योग्यता भी नहीं देखी गई है.

मुख्यमंत्री के विधानसभा अध्यक्ष को लिखे इस पत्र को एक महीना भी चुका है लेकिन राजनीतिक और रूप से अलग माने जाने वाले विधानसभा अध्यक्ष पर काबिज रितु भूषण खंडूरी ने अभी इस मामले पर अपना कोई निर्णय नहीं दिया है और ना ही इस संबंध में कोई किसी किस्म की कारवाही गतिमान है.

विधानसभा अध्यक्ष रितु भूषण खंडूरी को मुख्यमंत्री धामी द्वारा 1 अगस्त को लिखा गया यहां पत्र

माना यह जा रहा है कि भाजपा आलाकमान ने इस मामले में किसी भी तरह से मुंह खोलने अथवा कार्यवाही ना करने का संदेश भी नेताओं को दिया है लेकिन क्या विधानसभा अध्यक्ष रितु भूषण खंडूरी अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर उन मामलों की निष्पक्ष जांच करके इनमें योग्यता के अनुसार नियुक्तियां होने प्रशस्त कर सकेगी.

क्या हुआ है राजनीतिक रूप से अपने पिता की ईमानदार छवि पद चिन्हों पर चलकर इन सारे मामलों में जांच के आदेश देकर गीता के अनुसार छटनी कर यहां की नियुक्तियां कर पाएंगे और भविष्य के लिए क्या कोई नियम बन पाएगा अथवा विशेषाधिकार आज जो अधिकार विधानसभा अध्यक्षों को है वह इसके लिए अपने चेहतो के लिए ही करते रहेंगे. यूके ट्रिपल एससी पेपर लीक मामले में क्या सरकार इस पूरे मामले में दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नकल करके अथवा घूस देकर नौकरी पाए लोगों को बाहर कर पाएगी या सिर्फ हाकम सिंह के हाकिमो बचाकर इन इन परीक्षाओं को रद्द करके अपने कर्तव्य से इतिश्री कर लेंगे

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