ब्रेकिंग-BJP नेता की थी जिला पंचायत उपाध्यक्ष के भाई पर फायरिंग, अब किया आत्मसमर्पण

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हरिद्वार के कनखल में दिनदहाड़े हुई फायरिंग की सनसनीखेज घटना में घायल हुए सचिन चौहान और कृष्णपाल उर्फ नानू के मामले में आरोपी अतुल चौहान ने आत्मसमर्पण कर दिया है। बता दें अतुल चौहान बीजेपी गुट के बताए जा रहे हैं।

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BJP नेता की थी जिला पंचायत उपाध्यक्ष के भाई पर फायरिंग

आरोपी बताए जा रहे बीजेपी नेता अतुल चौहान ने कनखल थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया है। साथ ही अपना लाइसेंसी हथियार भी पुलिस के सुपुर्द कर दिया है। जिसके बाद से ही पुलिस अतुल से पूछताछ में जुटी हुई है। साथ ही अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। गोलीकांड के बाद तहसील प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में खड़ी नजर आ रही है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब हालात पहले से तनावपूर्ण थे, तब प्रशासन ने लापरवाही की चूक क्यों की।

अवैध प्लाटिंग से जुडा है मामला

दरअसल पूरा मामला अवैध प्लाटिंग से जुडा हुआ है। जिसकी शिकायत अतुल चौहान के द्वारा की गई थी। उसी शिकायत को लेकर तहसील प्रशासन शिकायतकर्ता अतुल चौहान को लेकर मौके पर पहुंचा था। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक जिस विवाद को सुलझाने के नाम पर तहसील प्रशासन मौके पर पहुंचा था, वहां न तो पुलिस बल को साथ ले जाया गया और न ही किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

तहसील प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल

हैरानी की बात यह है कि शिकायतकर्ता को भी मौके पर बुला लिया गया, मानो हालात के बिगड़ने का इंतजार किया जा रहा हो। नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए तहसील प्रशासन ने ग्राम प्रधान को तक सूचना देना जरूरी नहीं समझा जबकि किसी भी गांव में मौका मुआयना करने से पहले ग्राम प्रधान को सूचित करना प्रशासनिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा होता है। बावजूद इसके गोलीकांड के दौरान न तो प्रधान मौजूद था, न पुलिस और नतीजा सामने है।

तहसील प्रशासन की इसी गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली ने हालात को हिंसा की आग में झोंक दिया। अगर प्रशासन ने नियमों के अनुसार काम किया होता, तो आज दो लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझते नजर नहीं आते। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और भारी पुलिस बल तैनात है। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर बाद में पुलिस तैनात की जा सकती है, तो पहले क्यों नहीं?

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