उत्तराखंड के जाबांज पत्रकार राहुल कोटियाल को कवरेज के दौरान पड़े डंडे
देहरादून skt. com
उत्तराखंड के जांबाज पत्रकार राहुल कोटियाल को दिल्ली जंतर मंतर में कवरेज करने के दौरान पड़े पुलिस के लठ, जांघों के नीचे आए चोट से लाल निशान
साभार गॉव वाला
बारामासा के फाउंडर राहुल कोठियाल के पुलिस के लठ खाते रहे लेकिन एक भी कदम पीछे नहीं लिया ना वहां से भागने की कोशिश की। एक ईमानदार और रीढ़ वाले पत्रकार का जज्बा कैसे उसे किसी भी चुनौती के लिए हमेशा तैयार रखता है ये हम सबने कल सामने आई वीडियो फुटेज में देख लिया है।
खैर मुझे ताज्जुब नहीं हुआ कि पुलिस डंडे बरसाती रही लेकिन ये पीछे नहीं हटे उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए इन्हें साल 2013 और 2016 में रामनाथ गोयनका पुरस्कार मिला।
2016 में यह पुरस्कार उन्होंने टीवी जगत के सबसे अधिक पसंद किए जाने पत्रकारों में से एक रवीश कुमार के साथ लिया। इसके अलावा साल 2019 में न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी की बस्तर से की गयी रिपोर्ट श्रृंखला के लिए भी इन्हें प्रतिष्ठित रेड इंक अवार्ड दिया गया था।
जो बंदा बस्तर जैसी जगहों पर ग्राउंड रिपोर्टिंग करने की हिम्मत रखता हो वो चार डंडे खाकर ऐसे प्रोटेस्ट कवर करना छोड़ देगा ऐसा कभी नहीं हो सकता। मुझे भरोसा है कि पुलिस की लाठी इनकी पत्रकारिता को और अधिक धार देगी।
आपके जज्बे को नमन Rahul Kotiyal 👍👍#
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