रसोई गैस का नया कनेक्शन चाहने वालों को बड़ा झटका! उत्तराखंड में पोर्टल बंद
अगर आप उत्तराखंड में घरेलू रसोई गैस का नया कनेक्शन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आपका इंतजार और लंबा हो सकता है। शहर में तेल कंपनियों की ओर से नए एलपीजी (LPG) कनेक्शन जारी करने पर रोक लगातार बनी हुई है। इस रोक की वजह से पहली बार नया गैस कनेक्शन लेने वाले परिवारों और शहर में आए नए लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ताजा स्थानीय जानकारियों के मुताबिक, देहरादून में नए कनेक्शन के लिए लंबित आवेदनों की संख्या बढ़कर 1932 से ज्यादा हो गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जिन लोगों के पास पहले से गैस कनेक्शन मौजूद है, उनके लिए अपने कनेक्शन को दूसरी एजेंसी या स्थान पर ट्रांसफर कराने की सुविधा पूरी तरह चालू है।
नए और पुराने कनेक्शन के ट्रांसफर को लेकर भ्रम दूर करें
नए कनेक्शन पर रोक और पुराने कनेक्शन के ट्रांसफर की अलग-अलग व्यवस्था के कारण उपभोक्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। इस पर स्थिति साफ करते हुए जिला आपूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने बताया कि मौजूदा उपभोक्ता तय प्रक्रिया का पालन करके अपना गैस कनेक्शन आसानी से दूसरी एजेंसी में ट्रांसफर करवा सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं को अपनी पुरानी एजेंसी से जरूरी कागजात लेकर नई एजेंसी में जमा कराने होंगे।
जिले की 70 गैस एजेंसियों पर यह ट्रांसफर सुविधा सुचारू रूप से चल रही है। हालांकि, नए कनेक्शन पर लगी रोक कब हटेगी और प्रक्रिया दोबारा कब शुरू होगी, इसकी कोई निश्चित तारीख फिलहाल सामने नहीं आई है।
14.2 किग्रा सिलेंडर का पोर्टल मार्च से बंद, आवेदकों की बढ़ी परेशानी
यह समस्या देहरादून में पहली बार नहीं आई है। इससे पहले छह सितंबर की रिपोर्ट में भी करीब 1930 आवेदन पेंडिंग होने और कई महीनों से नए कनेक्शन की प्रक्रिया प्रभावित रहने की बात सामने आई थी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाले पारंपरिक घरेलू गैस सिलेंडर के नए कनेक्शन का ऑनलाइन पोर्टल 25 मार्च से ही बंद पड़ा है। कंपनियों का कहना था कि मौजूदा उपभोक्ताओं को बिना रुकावट गैस आपूर्ति बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि, मौजूदा समय में भी रोक हटाने की कोई निश्चित समयसीमा या तेल कंपनियों का नया विस्तृत आदेश उपलब्ध नहीं हो पाया है।
नया कनेक्शन न मिलने की सबसे गाज उन लोगों पर गिर रही है जो देहरादून में किराये के मकान में रहने आए हैं या जिन्होंने हाल ही में अपनी नई गृहस्थी बसाना शुरू किया है। नए शहर में रहने के लिए खाना पकाने का नियमित साधन सबसे पहली जरूरत होती है। कनेक्शन शुरू होने की तारीख स्पष्ट न होने से ऐसे परिवारों के लिए अपने मासिक खर्च और दैनिक जरूरतों का बजट बनाना काफी कठिन साबित हो रहा है।
क्या है 10 किग्रा कंपोजिट सिलेंडर का विकल्प?
गैस कनेक्शन पर लगी इस रोक के बीच उपभोक्ताओं को तत्काल राहत देने के लिए 10 किलोग्राम वाला ‘कंपोजिट सिलेंडर’ एक विकल्प के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडेन (Indane) और भारत गैस (Bharat Gas) की एजेंसियों पर यह सुविधा शुरू की जा चुकी है। जिला आपूर्ति अधिकारी ने भी इन एजेंसियों पर कंपोजिट सिलेंडर की उपलब्धता की पुष्टि की थी।
शुरुआती दौर में इस सिलेंडर को लेने का शुरुआती खर्च लगभग 4,500 से 5,000 रुपये के बीच बताया गया था, लेकिन उपभोक्ताओं को वर्तमान में कुल कितना भुगतान करना होगा, इसकी सटीक जानकारी संबंधित गैस एजेंसी से प्राप्त करनी होगी।
कंपोजिट सिलेंडर लेने से पहले समझें रिफिल की दर और नियम
कंपोजिट सिलेंडर खरीदने से पहले उपभोक्ताओं के लिए उसकी श्रेणी और रिफिल दरों को सही तरीके से समझना बेहद जरूरी है। इंडियन ऑयल (IOCL) की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उनका 10 किलोग्राम वाला ‘एक्स्ट्रालाइट नाउ’ (XtraLite Now) सिलेंडर एक फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) प्रोडक्ट है।
इसका सीधा मतलब यह है कि इसके रिफिल की कीमत नियमित घरेलू सब्सिडी या दरों पर नहीं, बल्कि स्थानीय कमर्शियल (वाणिज्यिक) एलपीजी दरों के हिसाब से तय होती है। इसलिए केवल सिलेंडर का छोटा या आकर्षक आकार देखकर इसे सामान्य 14.2 किग्रा वाले सब्सिडी वाले कनेक्शन के बराबर खर्च वाला न मानें। शुरुआती उपकरण की लागत और बाद में रिफिल के खर्च का सही आकलन करके ही फैसला लें।
बिना एड्रेस प्रूफ के भी मिल जाएगा यह सिलेंडर
कंपनी के अनुसार, यह कंपोजिट सिलेंडर उन ग्राहकों के लिए बेहद फायदेमंद है, जिनके पास देहरादून का स्थानीय निवास प्रमाण पत्र (Local Address Proof) नहीं है या जिन्हें इसे देने में परेशानी होती है। इसे लेने के लिए उपभोक्ताओं को केवल अपना एक पहचान पत्र (ID Proof) और चालू मोबाइल नंबर देना होता है।
उपभोक्ता अपने नजदीकी अधिकृत वितरकों या बिक्री केंद्रों से इसकी उपलब्धता की जानकारी ले सकते हैं। हालांकि, दूसरे शहर जाने पर रिफिल की सुविधा वहां की स्थानीय उपलब्धता और नियमों पर निर्भर करेगी, इसलिए सभी कंपनियों के कंपोजिट सिलेंडर पर इन शर्तों को एक समान न समझें।
कैसा होता है कंपोजिट सिलेंडर? जानिए इसकी खासियत
पारंपरिक भारी लोहे (स्टील) के सिलेंडर के मुकाबले कंपोजिट सिलेंडर की बनावट काफी आधुनिक और अलग होती है। इंडियन ऑयल के तकनीकी विवरण के मुताबिक, इसे तीन परतों से तैयार किया जाता है—जिसमें अंदरूनी लाइनर, फाइबर आधारित कंपोजिट परत और एक मजबूत बाहरी आवरण शामिल है।
इसका वजन बेहद हल्का होता है और इसमें एक पारदर्शी (स्मार्ट) विंडो दी जाती है, जिससे उपभोक्ता बाहर से ही देख सकते हैं कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है। हालांकि, हल्की बनावट और आधुनिक डिजाइन की सुविधा के साथ-साथ उपभोक्ता को इसके नियमित रिफिल की उपलब्धता और कुल जेब पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखकर ही इसे खरीदना चाहिए।
पुराने कनेक्शन वाले और नए आवेदक इन बातों का रखें ध्यान
जिन लोगों के पास पहले से घरेलू गैस कनेक्शन मौजूद है, उन्हें नया आवेदन करने के बजाय अपनी एजेंसी से सीधे ट्रांसफर की प्रक्रिया समझनी चाहिए। शहर बदलने या एजेंसी बदलने के दौरान जरूरी दस्तावेज और पुराने उपकरण जमा कराने के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए अपनी पुरानी और नई दोनों एजेंसियों से पूरी जानकारी साफ कर लें। किसी भी मध्यस्थ या दलाल के चक्कर में फंसने के बजाय केवल अधिकृत गैस एजेंसी से ही सही फीस और जरूरी दस्तावेजों की सूची प्राप्त करें।
फिलहाल देहरादून के नए आवेदकों के सामने सबसे बड़ी अनिश्चितता नियमित घरेलू कनेक्शन दोबारा शुरू होने की तारीख को लेकर है। ट्रांसफर सुविधा पुराने उपभोक्ताओं को राहत दे रही है, जबकि नए आवेदकों को कंपोजिट सिलेंडर जैसे विकल्पों की शर्तों को समझकर ही कदम उठाना चाहिए। जब तक कंपनियों द्वारा आधिकारिक घोषणा नहीं की जाती, तब तक किसी भी अफवाह या अनुमानित तारीख को सच न मानें।
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