सत्ता से बाहर रहने से कांग्रेस का वित्तीय ढांचा गड़बड़ाया पार्टी कार्यालय समेत कई आवासों का किराया भी नही दे पाई

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दिल्ली एसकेटी डॉट कॉम

वर्ष 2014 में सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस का आर्थिक ढांचा गड़बड़ा गया है आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि पार्टी के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय के अलावा कई अन्य आवासों का भी किराया जमा नहीं हो पाया है आरटीआई से मांगी गई जानकारी के अनुसार सत्ता से दूर जाने के बाद कांग्रेस की स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि वो अपने मुख्यालय का किराया नहीं दे पा रही है। पार्टी मुख्यालय तो छोड़िए, कांग्रेस की अंतरिम अक्ष्यक्ष सोनिया गांधी के सरकारी आवास समेत कई नेताओं के कब्जे वाली संपत्तियों के किराए का भी भुगतान नहीं गया है। यह जानकारी आरटीआई के जवाब में दी गई है।


कार्यकर्ता सुजीत पटेल की ओर से दायर एक आरटीआई के जवाब में, यह पता चला है कि कांग्रेस पार्टी मुख्यालय समेत कई संपत्तियों का किराया लंबित है। केंद्रीय आवास और शहरी विकास मंत्रालय के आरटीआई जवाब में कहा गया है कि अकबर रोड पर कांग्रेस पार्टी मुख्यालय का 1269902 रुपए का किराया लंबित है और आखिरी बार किराए का भुगतान दिसंबर 2012 में किया गया था। इसी तरह 10 जनपथ रोड स्थित सोनिया गांधी के आवास के लिए 4610 रुपए का किराया लंबित है और पिछला किराया सितंबर 2020 में मिला था।


चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में सोनिया गांधी के निजी सचिव, विन्सेंट जॉर्ज के कब्जे वाले बंगले का 507911 रुपए किराया बकाया है। उन्होंने बंग्ले का आखिरी बार किराया 2013 में भुगतान किया था। आवास नियमों के अनुसार, जो राष्ट्रीय और राज्य के राजनीतिक दलों को आवास की अनुमति देता है, प्रत्येक पार्टी को अपना कार्यालय बनाने के लिए तीन साल का समय दिया जाता है, जिसके बाद सरकारी बंगला खाली करना होगा।


कांग्रेस को जून 2010 में 9-ए राउज़ एवेन्यू पर पार्टी कार्यालय बनाने के लिए जमीन आवंटित की गई थी। कांग्रेस पार्टी को 2013 तक अकबर रोड कार्यालय और कुछ और बंगले खाली करने थे लेकिन पुरानी पार्टी ने अभी तक ऐसा नहीं किया है। जुलाई 2020 में, सरकार ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को एक महीने के भीतर लोधी रोड आवास खाली करने का नोटिस भेजा था।

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