वोटर लिस्ट में गजब का खेल! कहीं नाम ‘राम ने यादव को मारा’, तो पिता बन गए ‘बी.कॉम’

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Uttar Pradesh Voter List
UP Voter List Error

UP Voter List Error: मतदाता सूची (Voter List) में नाम दर्ज कराने के लिए लोग फॉर्म भरते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में विधान परिषद चुनाव (Legislative Council Election) की एक सूची में नामों का ऐसा ‘खेल’ सामने आया है कि पढ़ने वाले भी हैरान रह जाएं। कहीं मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ दर्ज होने का दावा है, तो कहीं पिता के नाम वाले कॉलम में ‘बी.कॉम’ लिखा मिला। यानी मतदाता सूची में नाम की जगह पूरा वाक्य और पिता की पहचान की जगह डिग्री! इन कथित गड़बड़ियों (Alleged Irregularities) ने चुनाव आयोग (Election Commission) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने निशाना साधा, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer-CEO) के कार्यालय ने इसे सॉफ्टवेयर की संभावित तकनीकी त्रुटि (Technical Error) और मानवीय लापरवाही (Human Error) से जुड़ा मामला बताया है।

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जब नाम का अनुवाद बना पूरा वाक्य

ये विसंगतियां (Discrepancies) इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (Allahabad-Jhansi Graduate Constituency) की मतदाता सूची में सामने आने की बात कही गई है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान के दौरान सोशल मीडिया (Social Media) पर ऐसी प्रविष्टियों के स्क्रीनशॉट और सूचियां साझा की गईं। इसके बाद चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची तैयार करने वाले सॉफ्टवेयर पर बहस छिड़ गई।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, पहली बार ऑनलाइन पंजीकरण (Online Registration) की सुविधा के तहत नामों को अंग्रेजी से हिंदी में लिप्यंतरित (Transliteration) करने की व्यवस्था की गई थी। इसी प्रक्रिया में कुछ नामों का सही लिप्यंतरण करने के बजाय उनका अर्थ निकालने जैसी गलती होने की आशंका जताई गई।

उदाहरण के तौर पर, किसी व्यक्ति का नाम ‘रामहित यादव’ है और अंग्रेजी में उसे ‘Ramhit Yadav’ लिखने के बजाय ‘Ram hit Yadav’ टाइप कर दिया जाए, तो सॉफ्टवेयर इसे ‘राम ने यादव को मारा’ जैसे वाक्य में बदल सकता है। यानी नाम के बीच एक स्पेस (Space) ने पहचान को ही कहानी बना दिया! हालांकि, यह आयोग की ओर से दी गई संभावित त्रुटि की व्याख्या है, न कि हर वायरल प्रविष्टि की स्वतंत्र पुष्टि।

14.81 लाख प्रविष्टियों में 158 पर उठे सवाल

सीईओ कार्यालय के मुताबिक, कुल 14,81,310 प्रविष्टियों (Entries) में 158 ऐसी प्रविष्टियां मिलीं, जिनमें मतदाताओं या उनके परिजनों के नाम असामान्य दिखाई दे रहे थे। कार्यालय का कहना है कि नामों को संपादित (Edit) करके ठीक करने की व्यवस्था मौजूद थी, लेकिन कुछ मामलों में त्रुटियां सुधार के बिना रह गईं।

वहीं, पिता के नाम वाले कॉलम में ‘B.Com’ दर्ज होने को मानवीय भूल या लापरवाही से जुड़ा मामला बताया गया। अब सवाल यह है कि जब मतदाता सूची चुनाव की बुनियादी जरूरत है, तो उसमें दर्ज विवरण की जांच किस स्तर पर हुई? सॉफ्टवेयर ने गलती की, उसे भरने वाले ने ध्यान नहीं दिया या जांच के दौरान चूक हुई—इन सवालों का जवाब जिम्मेदारी तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

साकेत गोखले ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना

तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress-TMC) के सांसद साकेत गोखले (Saket Gokhale) ने इन कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने सॉफ्टवेयर की गलती वाले स्पष्टीकरण को बहाना बताते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) की कमी है।

गोखले ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम (Algorithm) को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग करते हुए मतदाता सूची तैयार करने में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड (Source Code) सार्वजनिक करने की बात कही।

हालांकि, गोखले के आरोप राजनीतिक आरोप हैं। मतदाता सूची में गलत प्रविष्टियां मिलना अपने आप में चुनाव में धांधली (Election Fraud) का प्रमाण नहीं है। इसके लिए अलग से तथ्यात्मक जांच और सबूत जरूरी होंगे।

‘सॉफ्टवेयर है कि हिट की दुकान?’- श्रीनिवास का तंज

कांग्रेस से जुड़े श्रीनिवास बी.वी. (Srinivas B.V.) ने भी नाम के कथित गलत अनुवाद पर व्यंग्य किया। उन्होंने ‘रामहित यादव’ के उदाहरण के जरिए सवाल उठाया कि अंग्रेजी में नाम टाइप करने के दौरान स्पेस की गलती से पूरा वाक्य कैसे बन गया। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, ‘सॉफ्टवेयर है कि हिट की दुकान?’

यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर सामने आई उन प्रविष्टियों को लेकर थी, जिनमें नाम पहचान के बजाय किसी घटना का विवरण लगने लगे। मामला तकनीकी गलती का हो या डेटा की जांच में चूक का, सवाल यही है कि ऐसी प्रविष्टियां मतदाता सूची में शामिल होने से पहले पकड़ी क्यों नहीं गईं।

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