जेन-जी के बाद बुजुर्ग पेंशनभोगियों का केन्द्र सरकार को अल्टीमेटम, कहा- अब होगी आरपार की लड़ाई
EPS-95 Pension Protest: देश भर के लाखों बुजुर्ग कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए जीवनयापन करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS-95) के तहत मिलने वाली बेहद कम पेंशन से नाराज देश के सेवानिवृत्त कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर पेंशनभोगियों ने अपनी मांगों को लेकर महाआंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। सरकार को अल्टीमेटम देते हुए पेंशनर्स ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
देशभर के ईपीएस-95 (EPS-95) पेंशनधारक पिछले लंबे समय से अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ‘ईपीएस-95 नेशनल एजिटेशन कमेटी’ के बैनर तले देश के कोने-कोने से आए बुजुर्ग पेंशनर्स ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर डेरा डालकर जोरदार प्रदर्शन किया है। इन बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन के 30 से 35 साल देश की सेवा और संगठित क्षेत्र में नौकरी करने में बिता दिए, लेकिन आज के इस महंगाई के दौर में उन्हें मात्र 1,000 से 1,171 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन मिल रही है, जिसमें गुजारा करना असंभव है।
क्या हैं संगठन की प्रमुख मांगें?
प्रमुख मांगें, जिन पर अड़े हैं पेंशनभोगीआंदोलनकारियों और राष्ट्रीय नेतृत्व ने सरकार के सामने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- न्यूनतम पेंशन में वृद्धि : ईपीएस-95 के तहत मिलने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर तुरंत 7,500 रुपये किया जाए।
- महंगाई भत्ता (DA) : पेंशन के साथ-साथ महंगाई भत्ते (DA) को जोड़ा जाए ताकि बढ़ती महंगाई से राहत मिल सके।
- मुफ्त चिकित्सा सुविधा : बुजुर्ग पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथियों को आयुष्मान भारत योजना या अन्य माध्यमों से मुफ्त और उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्रियान्वयन : उच्च पेंशन (Higher Pension) के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों को बिना किसी पेचीदगी या भेदभाव के पूरी तरह से लागू किया जाए।
सरकार को कड़ा अल्टीमेटम और आगे की रणनीति
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्षों और वक्ताओं ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि सरकार ने उनकी इन जायज मांगों पर जल्द ही सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो देश भर के पेंशनभोगी और अधिक कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
चेतावनी दी गई है कि जरूरत पड़ने पर देश के सभी ईपीएफओ (EPFO) कार्यालयों के बाहर तालेबंदी की जाएगी, सांसदों के आवासों के समक्ष प्रदर्शन और आमरण अनशन जैसे रास्ते अपनाए जाएंगे। पेंशनभोगियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल पैसों की नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान और बुढ़ापे की सुरक्षित जिंदगी की है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस बड़े और देशव्यापी बुजुर्ग आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है।
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