दिवाली के बाद कैबिनेट में होगी नए चेहरों की एंट्री, इन दिग्गजों के नामों की चर्चा तेज़, जल्द मिल सकता है मंत्री पद!

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mp cabinet expansion sidelined veterans eyed for ministerial births post diwali

दिवाली के त्योहार के तुरंत बाद प्रशासनिक और राजनैतिक मोर्चे पर बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज होने वाली है।

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दिवाली के त्योहार के तुरंत बाद प्रशासनिक और राजनैतिक मोर्चे पर बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज होने वाली है। हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य संगठन और सरकार की उच्च स्तरीय बैठकों के बाद एक ठोस रोडमैप तैयार किया गया है। इस योजना के तहत, दिसंबर के पहले पखवाड़े तक मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बड़ा बदलाव किया जाएगा, जबकि खाली पड़े पदों को भरने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार की अंतिम प्रक्रिया नए साल में पूरी की जा सकती है

भोपाल। मध्य प्रदेश में दिवाली के त्योहार के तुरंत बाद प्रशासनिक और राजनैतिक मोर्चे पर बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज होने वाली है। हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य संगठन और सरकार की उच्च स्तरीय बैठकों के बाद एक ठोस रोडमैप तैयार किया गया है। इस योजना के तहत, दिसंबर के पहले पखवाड़े तक मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बड़ा बदलाव किया जाएगा, जबकि खाली पड़े पदों को भरने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार की अंतिम प्रक्रिया नए साल में पूरी की जा सकती है

इस बदलाव का सबसे मुख्य आधार मंत्रियों की दूरी और उनका परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड है। सरकार उन मंत्रियों के प्रभार वाले जिले बदलने जा रही है, जिनके गृह जिले से उनके वर्तमान प्रभार वाले जिलों की दूरी बहुत अधिक है। नेतृत्व का मानना है कि प्रभार वाले जिलों को गृह जिले के नजदीक लाने से मंत्रियों की अपने क्षेत्रों में सक्रियता और प्रशासनिक पकड़ और मजबूत होगी

परफॉर्मेंस के आधार पर इन दिग्गजों को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास मंत्रियों के साल भर के कामकाज की पूरी रिपोर्ट मौजूद है। इसी रिपोर्ट कार्ड और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए आने वाले समय में इन प्रमुख चेहरों को बड़ी सांगठनिक या प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं:

अनुभव और वरिष्ठता: बुंदेलखंड अंचल के सबसे सीनियर विधायकों में शुमार और नौ बार के विधायक गोपाल भार्गव के नाम की चर्चा राजनैतिक गलियारों में उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव के कारण हमेशा बनी हुई है।

महिला और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: मालवा-निमाड़ क्षेत्र को मजबूती देने और कैबिनेट में महिला भागीदारी बढ़ाने के लिहाज से इंदौर की प्रभावी नेत्री मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ का नाम रेस में आगे माना जा रहा है। अंचल और सामाजिक समीकरण: विंध्य और महाकौशल क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने के लिए अर्चना चिटनीस, शैलेंद्र कुमार जैन और प्रदीप लारिया के नामों पर भी गंभीरता से विचार होने की चर्चा है। 

क्या है नेतृत्व की सटीक रणनीति?

पार्टी स्तर पर इस फेरबदल को लेकर होमवर्क पूरी तरह से मुकम्मल हो चुका है। इस रणनीति का पहला चरण दिवाली के ठीक बाद दिसंबर में प्रभार वाले जिलों को बदलकर शुरू होगा। इसके बाद नए साल में होने वाले कैबिनेट विस्तार के जरिए कुछ नॉन-परफॉर्मिंग चेहरों के विभागों को बदला जा सकता है, जबकि कुछ मंत्रियों को संगठन में राष्ट्रीय या प्रादेशिक स्तर पर बड़ी सांगठनिक भूमिका में भेजा जा सकता है।

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