राहुल गांधी का सबसे पसंदीदा BJP नेता कौन? नाम सुनकर उड़ जाएंगे बीजेपी के भी होश
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर Gen-Z यानी आज के युवाओं और छात्रों के साथ एक बेहद दिलचस्प ‘आस्क मी एनीथिंग’ (AMA) सेशन आयोजित किया. इस बातचीत के दौरान जब एक यूजर ने उनसे उनके पसंदीदा बीजेपी नेता का नाम पूछा, तो राहुल गांधी ने बिना किसी हिचकिचाहट के पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम ले लिया. इतना ही नहीं, उन्होंने मुस्कुराते हुए उन्हें “अंकल अमरिंदर” कहकर संबोधित किया.
राहुल गांधी का यह जवाब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि कैप्टन अमरिंदर सिंह वही नेता हैं, जिन्हें पंजाब कांग्रेस में मचे भारी घमासान के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. बाद में उन्होंने कांग्रेस से राहें जुदा कर बीजेपी का दामन थाम लिया था.
राजीव गांधी से गहरी दोस्ती और ‘अंकल’ कहने के पीछे की वजह
राहुल गांधी का कैप्टन अमरिंदर सिंह को “अंकल” कहना कोई महज औपचारिक सम्मान नहीं है, बल्कि इसके पीछे दोनों परिवारों का दशकों पुराना गहरा रिश्ता रहा है. कैप्टन अमरिंदर सिंह और देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (राहुल गांधी के पिता) देहरादून के मशहूर दून स्कूल में एक साथ पढ़ाई करते थे. दोनों के बीच बेहद गहरी और पारिवारिक दोस्ती थी. राजीव गांधी के कहने पर ही कैप्टन अमरिंदर पहली बार सक्रिय राजनीति में आए थे और 1980 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने.
राहुल गांधी बचपन से ही कैप्टन अमरिंदर सिंह को देखते आ रहे हैं. गांधी परिवार में उन्हें हमेशा एक वरिष्ठ पारिवारिक सदस्य जैसा दर्जा और सम्मान मिला. यही वजह है कि आज भले ही दोनों के राजनीतिक रास्ते पूरी तरह अलग हो चुके हैं, लेकिन राहुल गांधी उन्हें आज भी “अंकल” कहकर ही पुकारते हैं.
2021 का वो राजनीतिक मोड़ और कड़वाहट भरा इस्तीफा
भले ही दोनों परिवारों के ऐतिहासिक रिश्ते बेहद मजबूत रहे हों, लेकिन साल 2021 में राजनीतिक परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं. पंजाब कांग्रेस में नवजोत सिंह सिद्धू के साथ जारी तीखी खींचतान और पार्टी हाईकमान के दखल के बाद सितंबर 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से भारी मन से इस्तीफा देना पड़ा था.
इस्तीफा देने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुलकर अपना दर्द बयां किया था. उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे खुद को ‘अपमानित’ महसूस कर रहे हैं और कांग्रेस हाईकमान (राहुल-प्रियंका) ने उनके साथ सही बर्ताव नहीं किया. इसके बाद उन्होंने अपनी अलग पार्टी ‘पंजाब लोक कांग्रेस’ बनाई और सितंबर 2022 में अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया.
राहुल गांधी के इस जवाब के पीछे के सियासी मायने
राहुल गांधी के इस बेबाक जवाब के कई सियासी और व्यक्तिगत मायने निकाले जा रहे हैं. पहला यह कि राहुल गांधी ने यह दिखाने की कोशिश की है कि वैचारिक और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद वे पुराने पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंधों का पूरा सम्मान करते हैं.
दूसरा, Gen-Z युवाओं से जुड़ने के लिए राहुल गांधी ने यह तरीका अपनाया, जिससे युवाओं के बीच उनकी एक सहज और ईमानदार छवि बने, जहां वे राजनीतिक कड़वाहट के ऊपर व्यक्तिगत जुड़ाव को रखते हैं. तीसरा और सबसे अहम, जिस नेता की कांग्रेस से विदाई विवादों से भरी रही, उनका नाम खुलकर लेना यह दर्शाता है कि राहुल गांधी अतीत के राजनीतिक विवादों को अपने निजी रिश्तों के आड़े नहीं आने देना चाहते.
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