आखिर किस वजह से ब्रिटेन के आंखों की किरकिरी बना भारत !

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हल्द्वानी एसकेटी डॉट कॉम

200 से अधिक साल तक भारत को अपना गुलाम बनाए रखने वाले बिट्रेन की आंखों में भारत चुभने लगा है। बी ट्रेन की ओर से संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूस के खिलाफ लाए निंदा प्रस्ताव के खिलाफ भारत ने एक बार फिर तटस्थ रुख अपनाते हुए वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। उसके साथ ही भारत के रुख को देखते हुए 34 अन्य देशों में भी भारत की तरह ही तटस्थ रूख अपना लिया है । वहीं 5 देशों ने इंग्लैंड की इस निंदा प्रस्ताव का विरोध किया है। भारत की ओर से रूस का उसके समर्थन और विरोध लो करने तथा तटस्थ रूख अपनाने बनने से इंग्लैंड इंग्लैंड के जीबी न्यूज़ चैनल के एंकर में ट्वीट करते हुए कहा कि भारत को इंग्लैंड की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद रोक देनी चाहिए तथा एक पैसे की भी मदद नहीं देनी चाहिए। उनके इस ट्वीट के बाद भारत की ओर से सैकड़ों लोगों ने उनका जोरदार तरीके से जवाब देते हुए कहा कि दुनिया में 200 वर्षों से अधिक लोगों को गुलाम बनाए रखने की मनसा आज भी इंग्लैंड अपने मन में पाले हुए हैं। उसे समझ लेना चाहिए कि लूटपाट कर ले गया कोहिनूर का हीरा जो उनकी महारानी बड़े शान से दिखाती हैं को भारत को कब लौटा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में इंग्लैंड के प्रस्ताव पर 193 देशों के वोटिंग का चार्ट

भारत ने संयुक्त राष्ट्र परिषद की सुरक्षा परिषद में भी तटस्थ रुख अपनाया अब महासभा में भी भारत ने अपने रुख में कोई परिवर्तन नहीं किया जिससे इंग्लैंड तिल मिलाया हुआ है उसे लगता है कि भारत अभी 200 साल पुराना देश होगा और उसके हिसाब से ही वह उसके प्रस्ताव पर सहमति देगा लेकिन भारत ने अपना रुख क्लियर करते हुए कहा कि वह दोनों देशों को कूटनीतिक वार्ता के दौरान इस मसले को हल करना चाहिए। भारत के इस ग्रुप से दुनिया यह समझ गई है कि वह एक बहुत बड़ा आर्थिक बाजार है तथा वह किसी भी तरह की दबाव में आने वाला नहीं है। भारत में किसी की भी सरकार रहे लेकिन विदेश नीति के तहत वह अपने स्टैंड पर कायम है। भारत सुरक्षा परिषद में 1948 में अपना मसला लेकर गया था तब इंग्लैंड और अमेरिका ने उसकी बात को अनसुना कर पाकिस्तान की बात को बढ़ावा देने का प्रयास किया था। जबकि रसिया ने उसकी बात का समर्थन किया था तथा अभी भी वह है कई बार रसिया के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक राय रखता है।

यूक्रेन पर हमले के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा (UNGA) में रूस की आलोचना वाले प्रस्‍ताव से भारत का कन्‍नी काटना अंग्रेजों को काफी अखरा है। भारत और पाकिस्‍तान (India-Pakistan) स tvहित 35 देशों ने इस बाबत प्रस्‍ताव पर वोटिंग में हिस्‍सा नहीं लिया। इस पर जाने-माने न्‍यूज प्रेजेंटर एलेस्‍टेयर स्‍टीवर्ट (Alastair Stewart) ने खासतौर से भारत-पाकिस्‍तान पर निशाना साधा। ब्रि‍टेन से उन्‍हें सहायता के तौर पर आगे से एक पाई देने से मना करने की अपील की। उनके ट्वीट ( Reaction on Alastair Stewart) करते ही भारतीयों ने ब्रि‍टेन की औकात याद दिला दी। ब्रिटेन के लूटपाट के इतिहास को याद दिला है।


संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में बुधवार को रूस की निंदा करने वाला प्रस्‍ताव लाया गया था। इसमें 141 देशों ने यूक्रेन के पक्ष में वोट किया था। भारत, पाकिस्‍तान और चीन समेत 35 देशों ने वोटिंग में हिस्‍सा नहीं लिया। 5 देशों ने रूस का खुलकर समर्थन किया।

महासभा में 193 सदस्‍य हैं। बुधवार को इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए मतदान किया। यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता की कड़े शब्दों में निंदा की।

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