दो साल पहले बनी 4 करोड़ की कोठी पर 22 करोड़ का प्रॉपर्टी टैक्स! 12 करोड़ का वाटर टैक्स देख इस नेता के उड़े होश
Property Tax:नगर निगम की टैक्स निर्धारण व्यवस्था का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. वार्ड नंबर2 के रामनगर स्थित मल्हीपुर रोड पर रहने वाले समाजवादी पार्टी नेता फरहाद गाड़ा के परिवार को नगर निगम की ओर से जीआईएस सर्वे के आधार पर ऐसा प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस मिला, जिसे देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। नोटिस में मकान की वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक हाउस टैक्स और जलकर का बकाया दर्शाया गया है. मामला सहारनपुर का है
फरहाद गाड़ा के अनुसार उनकी कोठी करीब 816 गज में बनी है. इसका निर्माण लगभग दो वर्ष पहले हुआ था और उनका परिवार पिछले एक साल से यहां रह रहा है. उन्होंने बताया कि मकान की मौजूदा बाजार कीमत करीब 4 करोड़ रुपये है, लेकिन नगर निगम की ओर से भेजे गए नोटिस में 22 करोड़ रुपये से अधिक का संपत्ति कर निर्धारित कर दिया गया. इतनी बड़ी टैक्स राशि देखकर पूरा परिवार सदमे में आ गया.
12 करोड़ रुपये का वाटर टैक्स
नोटिस में 12 करोड़ रुपये का वाटर टैक्स भी लगा दिया गया है. परिवार का कहना है कि यह दावा पूरी तरह अव्यावहारिक और तथ्यहीन है. उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि का पानी एक सामान्य परिवार के लिए इस्तेमाल करना संभव ही नहीं है.
परिवार बोला लापरवाही का खामियाजा हमें क्यों भुगतना पड़े?
नोटिस मिलने के बाद परिवार के लोगों ने नगर निगम से संपर्क किया. परिवार का आरोप है कि निगम की लापरवाही और डेटा एंट्री में हुई गलती का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है. उनका कहना है कि जीवनभर की कमाई से बनाए गए मकान पर उसकी कीमत से कई गुना अधिक टैक्स का नोटिस भेजना बेहद गंभीर मामला है. यदि जल्द ही इस गलती को नहीं सुधारा गया तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे.
नगर निगम ने बताया टाइपिंग या डेटा एंट्री की गलती
इस पूरे मामले पर नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह टाइपिंग या डेटा एंट्री की त्रुटि प्रतीत होती है. अधिकारियों के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी गई है और यदि कोई गलती पाई जाती है तो उसे तत्काल ठीक किया जाएगा. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। हालांकि, परिवार का कहना है कि इतनी बड़ी चूक को केवल “टाइपिंग मिस्टेक” बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
GIS सर्वे और कर निर्धारण प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस घटना के बाद नगर निगम की जीआईएस सर्वे प्रणाली, कर निर्धारण प्रक्रिया और रिकॉर्ड की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. लोगों का कहना है कि यदि डेटा एंट्री में इतनी बड़ी गलती हो सकती है, तो अन्य संपत्तियों के टैक्स निर्धारण पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि नगर निगम इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को कब तक राहत मिलती है.
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