आरटीओ विभाग ने सत्ताधारी दल के साथ मिलकर राजस्व की लगाई चपत

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हल्द्वानी एसकेटी डॉटकॉम

कहते हैं कि अगर सुरक्षा करने वाला ही नुकसान करने वालों के साथ मिल जाए तो देश ज्यादा दिन तक सुरक्षित नहीं रह सकता यही बात सरकारी खजाने में राजस्व बढ़ाने की जिम्मेदारी लेने वाले अगर राजस्व की चपत लगाने लग जाएं तो सरकारी खजाना तो क्या भरेगा सत्ताधारी लोगों को लाभ पहुंचाकर अपनी अच्छी इमेज जरूर बंद जाती है।

ऐसा ही एक मामला में पिछले दिनों सामने आया जब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित मोर्चा के कार्यक्रम में कई स्कूलों की बसें भीड़ को लाने के लिए लगाई गई बकायदा संभागीय परिवहन विभाग के आला अधिकारियों ने सत्ता धारियों के निर्देश पर कई स्कूल संचालकों को बसे लगवाने का फरमान जारी किया जिसके बाद इस कार्यक्रम में दर्जनों बसें विभिन्न स्कूलों की कार्यक्रम में भीड़ लाते हुए दिखाई दी।

नियमों के अनुसार अगर यह बसें लगाई गई तो इन बसों से 1 दिन का टैक्स जो सरकार के खजाने में जाना चाहिए वह भरा जाना चाहिए जानकारी के अनुसार यह रकम 10,000 प्रति बस होनी चाहिए। अगर किसी स्कूल के कार्यक्रम के लिए यह बस जाती हैं तो उसके लिए बकायदा पर परमिशन लेनी पड़ती है उसके लिए भी ₹3000 प्रति बस प्रति दिन के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है इसमें कोई स्कूल लगने बच्चों को पिकनिक टूर पर अथवा किसी अन्य स्टडी टूर पर ले जाता है तो आरटीओ विभाग से अपने ही बच्चों को ले जाने के लिए टैक्स संभागीय परिवहन विभाग को दिया जाता है। अगर यही स्कूल की बसें किसी गैर सरकारी कार्यक्रम के लिए जाती हैं तो प्रतिवस प्रतिदिन ₹10000 का टैक्स जमा किया जाना चाहिए।

लेकिन जिस विभाग पर सरकारी राजस्व जुटाने की जिम्मेदारी होती है तथा जनता के पैसे से विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन तथा पेंशन दी जाती है वही व सरकारी राजस्व की इस ढंग से चपत लगवा देता है तो निश्चित रूप से विभाग और प्रदेश की माली हालत कमजोर होनी तय है।

ब्लॉक कार्यालय के समीप रविवार 29 दिसम्बर को सत्ताधारी पार्टी के अनुसूचित मोर्चा के कार्यक्रम में प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को आना था इस कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए विभिन्न स्कूलों की बसें भी लाने के लिए लगाई गई। बकायदा इस बात की भी जानकारी आई है कि स्कूल एसोसिएशन के सिरमौर पद पर आसीन पदाधिकारी ने इस सारे मामले की कमान अपने हाथ में ले रखी थी। जानकारी के मुताबिक सत्ताधारी तथा सत्ता में बैठे लोगों को खुश करने और अपने नंबर बढ़ाने के लिए विभाग के आला अधिकारियों ने सरकारी खजाने की लाखों रुपए की चपत लगवा दी।

आरटीओ विभाग चालान के नाम पर जब सड़क पर उतरता है तो कोरना काल में भी वह स्कूल की बसों में ड्राइवर कंडक्टर तथा आया कि ड्रेस नहीं होने पर भी चालान कर देता है वही जब ऐसे मामले पर लाखों रुपए का राजस्व वसूलना था तो खुद ही वह राजस्व की चपत लगाने में अपनी भूमिका निभाता हुआ दिखाई दिया

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