बड़ी खबर-कर्ज के बोझ तले हांफने लगा उत्तराखंड, साल दर साल बढ़ रहा मर्ज

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लंबी लड़ाई और न जाने कितनी जान गंवाने के बाद मिला पहाड़ी राज्य उत्तराखंड विकास तो नहीं कर पाया अल्बत्ता कर्ज के बोझ तले जरुर लगातार दबता जा रहा है। अब तो ये हालत हो गए हैं कि प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति इस कर्ज के बोझ को अपने कंधों पर उठाए घूम रहा है। उत्तराखंड को बने 22 साल हो गए लेकिन किसी की भी सरकार ने प्रदेश का विकास न करके भ्रष्टाचार, घोटालों का विकास जरुर किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत का सपना उत्तराखंड में पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। अलबत्ता केंद्र पर निर्भर होना प्रदेश की मजबूरी बनता जा रहा है।

मीडिया में प्रकाशित एक खबर बताती है कि बीते वित्तीय वर्ष 2021-22 में उत्तराखंड पर 84 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। इससे पहले भी कर्ज का आंकड़ा हजार करोड़ रुपए में रहा है। माना कि कोरोना संक्रमण महामारी के बीच आर्थिक तंगी और उससे उबरने के लिए राज्य को कर्ज पर कर्ज लेना पड़ा। लेकिन कोरोना माहमारी से उबरने के बाद भी राज्य में कर्ज का बोझ कम होता नहीं दिखाई नहीं दे रहा है। जब अलग राज्य की मांग की गई थी तो यही कहा गया था कि इसका एक अलग मॉडल के रूप में विकास किया जाएगा।


प्रदेश में पर्यटन, तीर्थटन, बिजली आदि से विकास की आपार संभावनाएं हैं, अगर इनके विकास पर ठीक से फोकस किया जाता तो, आज प्रदेश कर्ज के बोझ तले नहीं डूबता। अगर बात कि जाए सरकारों की तो राज्य में अब तक एक अंतरिम और पांच निर्वाचित सरकारें बनकर आयी हैं, और इन सभी सरकारों के सामने आर्थिक संसाधनों को जुटाना एक चैलेंज रहा।


उत्तराखंड वित्तीय समीक्षा रिपोर्ट
गौर करने वाली बात है कि राज्य की वित्तीय समीक्षा की रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्य के एक-एक व्यक्ति पर एक लाख रुपए से अधिक के कर्ज दिखाई दे रहा है। निरंतर बढ़ रही कर्ज की दर वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में वर्ष 2020-21 में कर्ज 11 फीसद से अधिक दर से बढ़ा।


25 फीसद से अधिक दर से बढ़ रहा कर्ज
2020-21 के मुकाबले 2021-22 में कर्ज की दर बढ़कर 16 फीसद को पार कर गई। वित्तीय समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार 2022-23 में कर्ज 25 फीसद से अधिक दर से बढ़ रहा है। वहीं आरबीई के मुताबिक पिछले 17 वर्षों में राज्य पर 74 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज बढ़ गया है।


2022.23 में राज्य का 655571.49 करोड़ रुपये का बजट है। साथ ही 21453 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता का अनुमान बताया गया है। जबकि 15527 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता राशि 2021.22 में मिली थी।


कर्ज का बढ़ता ग्राफ
वित्तीय वर्ष, कर्ज की राशि (करोड़ रुपए में)
2019-20- 65982
2020-21- 73478
2021-22- 85486

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