केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा तोहफा! 8वें वेतन आयोग की बैठक में सैलरी और HRA पर आया नया अपडेट
केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और देश भर के पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद शानदार और राहत भरी खबर सामने आ रही है। नई दिल्ली में 8वें वेतन आयोग ने कर्मचारी संगठनों और विभिन्न पेंशन यूनियनों के साथ अपनी अहम मैराथन बैठकों का दौर शुरू कर दिया है, जो आने वाले 10 अगस्त तक लगातार जारी रहने वाला है।
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में काम कर रहे इस आयोग की बैठकों का मुख्य केंद्र फिटमेंट फैक्टर, बेसिक सैलरी में भारी बढ़ोतरी, भत्तों के दोबारा पुनर्गठन और पेंशन में सुधार जैसे बेहद अहम मुद्दे बने हुए हैं। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए 18 महीने की समय सीमा तय किए जाने के बाद, अब यह पूरी प्रक्रिया अपने आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है।
दिल्ली में चल रही हाई-लेवल बैठकें और आगे का प्लान
नई दिल्ली में चल रही यह उच्चस्तरीय बातचीत इसलिए भी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि आयोग अपने कुल 18 महीनों के कार्यकाल का एक बड़ा हिस्सा पहले ही सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है। हालांकि पैनल की तरफ से इन बैठकों का कोई आधिकारिक एजेंडा खुलकर साझा नहीं किया गया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि चर्चा का पूरा फोकस केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनभोगियों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर ही है।
नई दिल्ली में स्टेकहोल्डर्स के साथ विचार-विमर्श करने के बाद, 8वां वेतन आयोग आने वाले हफ्तों में देश के अन्य प्रमुख शहरों जैसे चेन्नई, पुडुचेरी, चंडीगढ़ और जयपुर का भी दौरा करने वाला है।
कब तक सौंपी जाएगी आयोग की अंतिम रिपोर्ट?
यहाँ यह समझना बेहद जरूरी है कि 8वां वेतन आयोग एक अस्थायी संस्था है, जिसका गठन सरकार द्वारा 3 नवंबर, 2025 को किया गया था। इस तीन सदस्यीय पैनल की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में है, जबकि प्रोफेसर पुलक घोष और सदस्य-सचिव पंकज जैन इसके अन्य महत्वपूर्ण सदस्य हैं।
ऐसी पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि आयोग अपने गठन के तय 18 महीनों के भीतर केंद्र सरकार को अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप देगा, जिसके हिसाब से इसकी संभावित समय-सीमा मई-जून 2027 के आसपास रहने वाली है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स की क्या हैं बड़ी मांगें?
नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और देश भर की अन्य प्रमुख यूनियनों ने जोरदार मांग उठाई है कि फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.83 कर दिया जाए। अगर यह मांग मान ली जाती है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से सीधी छलांग लगाकर 69,000 रुपये तक पहुंच जाएगी। हालांकि, इस पर अभी तक कोई भी अंतिम मुहर नहीं लगी है, और आयोग सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ही कोई ठोस फैसला लेगा।
दूसरी तरफ, पेंशनर्स यूनियनों की तरफ से मांग की जा रही है कि फुल पेंशन को अंतिम आहरित वेतन यानी Last Drawn Salary का 67 प्रतिशत और फैमिली पेंशन को 50 प्रतिशत तक किया जाए। इसके साथ ही, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग पेंशनभोगियों को बढ़ी हुई दरों से अतिरिक्त पेंशन का लाभ देने और फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को बढ़ाकर सीधे 3,000 रुपये महीना करने का प्रस्ताव भी पटल पर रखा गया है।
यूनियनों ने एक्स (X), वाई (Y) और जेड (Z) कैटेगरी के तमाम शहरों के लिए हाउस रेंट अलाउंस यानी एचआरए (HRA) को क्रमशः 36%, 24% और 12% करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा, साल 2026 की शुरुआत तक महंगाई भत्ता (DA) के 50% के आंकड़े को पार कर जाने के कयासों के बीच, इसे मूल वेतन में मर्ज करने और नए सिरे से सभी भत्तों को तय करने को लेकर भी गंभीर चर्चाएँ चल रही हैं।
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