PM Modi Birthday: RSS के दफ़्तर से की शुरुआत, इमरजेंसी में अंडरग्राउंड, जानें कैसे रही यात्रा

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PM MODI POLITICAL CAREER

PM Modi 76th Birthday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 17 सितंबर 2026 को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। वो 13 साल गुजरात के सीएम रहे हैऔर पिछले 12 साल से भारत के प्रधानमंत्री की कमान संभाल रहे हैं। लेकिन उनका राजनितिक सफर आसान नहीं रहा। RSS के दफ़्तर से शुरुआत से लेकर इमरजेंसी में अंडरग्राउंड और फिर 1990 के राजनीतिक वनवास के बाद देश के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर। जानिए नरेंद्र मोदी का राजनितिक सफर।

76 साल के PM मोदी का राजनितिक सफर

गुरराज के वडनगर में 17 सितंबर 1950 में नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ ता। परिवार की चार की दुकान से उनका सफर शुरू हुआ और फिर बाद में RSS के संगठनात्मक काम से होकर वो उन्होंने गुजरात के सीएम और फिर देश के पीएम का सफर तय किया।

चाय की दुकान से शुरू किया सफ़र

उन्होंने वडनगर की एक चाय की दुकान से अपने जीवन की शुरुआत की। प्रधानमंत्री की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, उनका परिवार साधारण परिस्थितियों में रहता था। वो बचपन में परिवार की चाय की दुकान पर हाथ बंटाते थे। कई बार इसका जिक्र खुद पीएम मोदी ने कई इंटरव्यूज में किया है। उन्होंने बताया कि वो रेलवे स्टेशन और ट्रेन में चाय बेचते थे।

पीएम मोदी के बचपन की तस्वीरें

RSS के बने प्रचारक

बता दें कि अपनी किशोरावस्था में वो स्वामी विवेकानंद के विचारों से काफी प्रभावित हुए। करीब 17 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया था। दो साल तक उन्होंने भारत के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की। जिसके बाद वो अहमदाबार पहुंचे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS से जुड़े। धीरे-धीरे वो संघ के संगठनात्मक काम से जुड़ते ए। PMO की जीवनी के अनुसार, वे साल 1972 में RSS के प्रचारक बने। उन्होंने वहां अलग-अलग जिम्मेदारियों में काम किया।

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1975 की इमरजेंसी में हुए अंडरग्राउंड प्रतिरोध

जून 1975 में इमरजेंसी लगी। उस दौरान RSS पर बैन लगा। ऐसे में 25 वर्षीय मोदी अंडरग्राउंड हो गए। उन्होने गिरफ्तारी से बचने के लिए कभी सिख तो भी अलग-अलग रूप धारण किया। वे सरदार का भेष बनाकर काफी दिनों तक टहलते रहे। साथ ही वो इमरजेंसी विरोधी साहित्य बांटते रहे।

1975 के दौरान की तस्वीर या फिर प्रतीकात्मक रूप में भेष बदले हुए प्रचारक का चित्रण

1990 का दशक: संगठन की कमान

मोदी 1990 के दशक में गुजरात बीजेपी के मुख्य रणनीतिकार बने। लेकिन पार्टी के अंदर सरकार और संगठन में बढ़ते प्रभाव के कारण मतभेद गहरे होते गए। जो आगे चलकर बड़े संकट में बदल गए। यहीं वो दौर था जब डा. मुरली मनोहर जोशी के साथ नरेंद्र मोदी ने जम्मी कश्मीर के लाल चौंक पर पहली बार तिरंगा झंडा फहराया था।

1995 की बगावत

साल 1995 के गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 182 में से 121 सीटें मिली। जीत के साथ केशुभाई पटेल मुख्यमंत्री बने। उस समय मोदी जरात BJP में संगठन के बेहद महत्वपूर्ण नेता थे। लेकिन कुछ ही महीनों बाद केशुभाई के नेतृत्व के खिलाफ शंकरसिंह वाघेला ने बगावत कर दी।

मोदी की गुजरात से विदाई

वाघेला अपने समर्थक विधायकों का एक बड़े समूह को मध्य प्रदेश के खजुराहो ले गए। जिसके बाद से ही उनका गुट ‘खजुरिया’ और केशुभाई समर्थक ‘हजूरिया’ कहलाया। ऐसे में केशुभाई को सीएम का पद छोड़ना पड़ा। जिसके बाद सुरेश मेहता मुख्यमंत्री बने। नरेंद्र मोदी को भी गुजरात के बाहर संगठन की जिम्मेदारी देने पर फैसला हुआ।

2001 में मुख्यमंत्री पद की शपथ

सितंबर 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नरेंद्र मोदी को फोन आया। इसी के बाद से उनके राजनीतिक जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ। जिसके बाद 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने।

2002 का गोधरा कांड

2002 के गोधरा कांड के बाद गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा हुई। इसमें कई राजनितिक विषेशज्ञ और विपक्ष मोदी की सरकार की भूमिका को लेकर सवाल उठाता आया है। आज भी ये एक डिबेटेबल टॉपिक है। ये उनके राजनितिक जीवन का सबसे विवादित दौर रहा।

‘गुजरात मॉडल’ से बनाई राष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री के रूप में मोदी ने गुजरात का विकास किया। अपने ‘गुजरात मॉडल’ से उन्होंने पहचान बनाई। 2012 में लगातार तीसरी विधानसभा जीत उन्होंने दर्ज की। इसी के बाद से उनकी राष्ट्रीय भूमिका और भी ज्यादा स्पष्ट हो गई।

2014 में पहले बार बने PM, फिर सफर चलता रहा

13 सितंबर 2013 को बीजेपी ने 2014 लोकसभा चुनाव के लिए नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। इसी के बाद उनका अभियान राष्ट्रीय चुनाव के केंद्र में आया।

2014 में पहली बार नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पद को संभाला। जिसके बाद 2019 और फिर 2024 में दूसरी और तीसरी बार उन्होंने पीएम पद की शपथ ग्रहण की। 2024 में BJP को अकेले बहुमत नहीं मिला। इसलिए केंद्र में गठबंधन सरकार बनी

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