छात्रों के लिए अभिभावक ‘अपार ID’ बनवाएं, इसे अनिवार्य नहीं कर सकते’, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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अपार आईडी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला।

Photo : PTI

SC on Apaar Ids: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने एक अहम फैसले में कहा कि ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) योजना के तहत बच्चों के लिए ‘वन स्टूडेंट, वन यूनिक आईडी’ बनाना अभिभावकों के लिए अनिवार्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट का यह फैसला 24 करोड़ छात्रों पर लागू होगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि सरकार ‘अपार’ योजना को स्वैच्छिक बताती है, लेकिन व्यवहार में बच्चों को इसमें शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योजना को वैकल्पिक बताया गया है, लेकिन इसे आधार से जोड़ दिया गया है, ऐसे में ‘अपार’ आईडी लेने के लिए पहले आधार पहचानपत्र बनवाना लगभग अनिवार्य हो जाता है।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने कहा कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को ओडिशा उच्च न्यायालय के उस निर्देश को पूरे देश में लागू करने का आदेश देगा, जिसमें ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आईडी जारी करने के लिए सहमति-पत्र में अभिभावकों को सहमति देने से इनकार करने या इस योजना से बाहर रहने का विकल्प देने का प्रावधान करने को कहा गया है।

प्रत्येक छात्र को 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या दी जाती है

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई अपार (एपीएएआर) योजना के तहत प्रत्येक छात्र को 12 अंकों की एक विशिष्ट और आजीवन मान्य पहचान संख्या दी जाती है। यह सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड के एक डिजिटल भंडार के तौर पर काम करता है, जिसमें अंकपत्र, डिग्री और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों से जुड़ी उपलब्धियां एक ही स्थान पर सुरक्षित रखी जाती हैं।

ओडिशा HC का फैसला देश भर में होगा लागू

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ चार छात्रों के अभिभावकों की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह कहते हुए विद्यार्थियों के लिए अपार आईडी योजना की वैधता को चुनौती दी गई है कि यह उन्हें आधार पहचानपत्र प्राप्त करने के लिए बाध्य करती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि चूंकि केंद्र सरकार ने ओडिशा उच्च न्यायालय के दिसंबर, 2025 के फैसले को चुनौती नहीं दी है, इसलिए वह सीबीएसई को इस फैसले को पूरे देश में लागू करने का निर्देश देगी।

डेटा संरक्षण से जुड़ी चिंताओं के समाधान करने का निर्देश देगी

पीठ ने कहा, ‘हम सीबीएसई को यह फैसला पूरे देश में लागू करने का निर्देश देंगे, क्योंकि उच्च न्यायालय के आदेश को स्वीकार कर लिया गया है। साथ ही, सीबीएसई से इन मुद्दों पर भी गौर करने को कहा जाएगा।’ पीठ ने कहा कि औपचारिक आदेश बाद में जारी किया जाएगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह सीबीएसई को याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई सहमति और डेटा संरक्षण से जुड़ी चिंताओं के समाधान करने का निर्देश देगी।

शिक्षा का अधिकार संवैधानिक अधिकार-जयसिंह

उन्होंने के.एस. पुट्टास्वामी मामले में 2019 के आधार संबंधी फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों को आधार बनवाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता तथा परीक्षा में बैठने के लिए ’अपार’ को जरूरी बनाना उसी सिद्धांत का उल्लंघन है। जयसिंह ने कहा, ‘शिक्षा का अधिकार संवैधानिक अधिकार है। किसी बच्चे से परीक्षा देने के लिए आधार और ‘अपार’ बनवाने को कहना संविधान के खिलाफ है।’ उन्होंने कहा कि योजना का क्रियान्वयन डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023, के अनुरूप नहीं है, खासकर सूचित सहमति, सहमति वापस लेने और विद्यार्थियों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के मामले में।

आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।