Paper Leak Protest: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, इन 2 शर्तों को पूरा करने वाले छात्र तुरंत होंगे रिहा?

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Supreme Court on Paper Leak Protest

Supreme Court on Paper Leak Protest: पेपर लीक विरोध में गिरफ्तार छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने दो शर्तों को पूरा करने वाले छात्रों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।

Paper Leak Protest Supreme Court News: देशभर में हुए पेपर लीक विरोधी-प्रदर्शनों (Paper Leak Protests) के बाद मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से छात्रों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी खबर आई है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में हुए उग्र प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों को लेकर शीर्ष अदालत ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने निर्देश दिया है कि प्रदर्शन के दौरान पकड़े गए छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए, लेकिन इसके लिए कोर्ट ने दो शर्तें भी तय की हैं। आइए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट से किसे राहत मिली है और किसे नहीं…

सुप्रीम कोर्ट की वो 2 शर्तें, जिनसे मिलेगी तुरंत रिहाई

1. उम्र 18 साल से कम हो

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए राज्यों को राहत देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए वे सभी छात्र, जो 18 साल के कम उम्र के हैं, उन्हें बिना किसी देरी के तुरंत रिहा किया जाए।

2. कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो

जिन छात्रों का पहले से कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड (No Criminal Antecedents) नहीं है, उन्हें भी राहत दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी किसी भी FIR में ऐसे बेदाग छात्रों के खिलाफ कोई सख्त या दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

किन प्रदर्शनकारियों को नहीं मिलेगी कोई राहत?

बेंच ने अपने आदेश में यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि जिन लोगों का आपराधिक बैकग्राउंड है या जिन्होंने कानून को अपने हाथ में लेकर भारी हिंसा या ज्यादती की है, उन्हें इस संरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि जिसने भी कानून तोड़ा है, उस पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

पुलिस ज्यादती पर भी कोर्ट सख्त, होगी उच्चस्तरीय जांच

सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान और अन्य राज्यों में शांतिपूर्ण छात्रों पर पुलिस ने बर्बरता की। राजद (RJD) सांसद मनोज झा द्वारा दायर एक याचिका में दावा किया गया कि बिहार में आंदोलन के दौरान एक पुलिस अधिकारी ने AK-47 का इस्तेमाल किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने गंभीर रुख अपनाते हुए कहा, ‘एक पूरी तरह से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जिसने भी ज्यादती की है और कानून हाथ में लिया है, उसे कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए। अगर जिम्मेदारी तय नहीं की गई, तो किसी भी जांच का कोई मतलब नहीं रह जाता।’ कोर्ट ने पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए बल प्रयोग के साथ-साथ पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की जांच के लिए एक हाई-पावर कमेटी बनाने के संकेत दिए हैं।

इन राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ-साथ कई राज्यों को भी नोटिस जारी किया है। इनमें महाराष्ट्र, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली शामिल हैं। इन सभी से मामले पर जवाब मांगा गया है।

कोर्ट ने सबूत सुरक्षित रखने का भी दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन से जुड़े सभी अहम रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। इसमें CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा वीडियो, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और PCR लॉग शामिल हैं। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा सार्वजनिक न किया जाए।

क्या है पूरा मामला?

देशभर में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए थे। कई राज्यों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी हुआ। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान भी झड़प हुई थी। इसी दौरान कई छात्रों की गिरफ्तारी और पुलिस बल प्रयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल छात्रों को राहत देने के साथ-साथ मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत पर भी जोर दिया।

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