मुक्त विश्वविद्यालय में अब खुला 56 नई भर्तियों का घोटाला, शासन से नहीं ली परमिशन, मंत्री के चेहतों को किया भर्ती

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हल्द्वानी/देहरादून एसकेटी डॉट कॉम

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय एक स्वायत्तशासी संगठन था लेकिन सरकार ने इसका यह स्वैच्छिक अधिकार छीन कर इसे अपने कब्जे में किया। मंत्री के मौखिक आदेश पर 30 पद तथा आउटसोर्सिंग में 26 लोगो को भर्ती कर लिया गया। इनमे से अधिकतर मंत्री के रिश्तेदार एवम स्टाफ से हुड लोंगो के परिजन एवम स्वयं निजी तौर पर स्टाफ में कार्य कर रहे लोग शामिल हैं।

यूनिवर्सिटी में बिना पद और आदेश के बिना 56 लोगों की नियुक्ति का मामला सामने आया है। हालाकिं इस मामले पर तत्काल कार्यवाही पर वित्त सचिव अमित नेगी ने उच्च शिक्षा सचिव को सख्त कार्रवाई करने के लिए पत्र भी लिखा था । एक साल बाद भी इस पत्र का कोई जवाब उन्हें नही मिला। और न ही उन्होंने यह पूछने की जरूरत समझी की मेरे आदेश का क्या हुआ।

लेकिन जिन लोगों की भर्ती की गई थी वह नेताओं और अफसरों की ख़ास और चेहते होने के चलते उनपर किसी तरह कार्रवाई नहीं हो पाई। बता दे पत्र एक साल पहले ही लिखा जा चूका है लेकिन किसी तरह की इन कर्मचारियों के ऊपर कार्रवाई मुनासिब नहीं समझी गई।

शासनादेश के अनुसार किसी भी पद को तब स्वीकृत किया जाता है जब उन पदों की रिक्तिया भर्ती पद का आदेश हो इसके बिना नियुक्तियां शासन के आदेश के बिना नहीं होंगी। यह नियम संविदा (कॉन्ट्रैक्ट), दैनिक वेतन (डेली वेज), कार्य प्रभारित (वर्क चार्ज), नियत वेतन (फिक्स्ड सैलरी), अंशकालिक (पार्ट टाइम) एवं अनौपचारिक नियुक्तियां पर लागू होगा। इसके आलावा अन्य नियुक्तियां शून्य मानी जाएंगी।

आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि इस तरह की कोई नियुक्तियां भविष्य में की गई हों तो उनके मेहनताना का भुगतान स्वं अधिकारी के वेतन, पेंशन से करेंगे। 
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब ऑडिट द्वारा जारी रिपोर्ट में यह सामने आया की 30 लोगों के वेतन पर हर महीने 44 लाख का खर्च आ रहा है। जिसके बाद सामने आया की विश्वविद्यालय ने बिना पद विज्ञप्ति के 30 लोगों की भर्ती कर रखी है जिनमे से प्रशासनिक,अकादमिक, तकनीकी एवं परामर्शदाताओं भर्ती की गई थी। हालाकिं जिन अधिकारीयों के नेतृत्व में यह भर्तियां हुई है उनपर कार्रवाई की जाएगी इसके आलावा विभागीय सूत्रों के अनुसार सभी नियुक्तियां उच्च स्तर से मौखिक आदेश पर हुई हैं। इनमें रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के सलाहकार के पुत्र की भी नियुक्ति भी शामिल है। जबकि विभागीय मंत्री के स्टाफ के भी कुछ लोगों एवं उनके रिश्तेदारों को नियुक्तियां दी गई हैं।

 
आउटसोर्स मे हुए 26 लोग हुए भर्ती

यूनिवर्सिटी ने26 लोगो को स्वयं के खर्चे पसर नियक्ति दी है। इसका भी खुलासा हुआ है। यह खर्च यूनिवर्सिटी अपने मद से कर रह है।लेकिन सारा पैसा यूजीसी तथा सरकार से ही आता है।

कुलपति उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ओम प्रकाश सिंह नेगी का कहना है की,’विश्वविद्यालय में वर्ष 2017-18  व 2018-19 में बिना पद-सृजन के आउटसोर्सिंग के माध्यम से 18 लिपिक, एक योग प्रशिक्षक एवं  नौ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों कुल 26 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इन नियुक्तियों के लिए किसी भी तरह की स्वीकृति नहीं थी। पद और शासन के आदेश के बिना विश्वविद्यालय में नियुक्तियों का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। विश्वविद्यालय ने आउटसोर्स से कुछ लोगों को अपने खर्च पर रखा, लेकिन ऑडिट से इसका कोई मतलब नहीं है। नियुक्तियों के मामले में मेरे पास शासन से कोई पत्र नहीं आया।

वही इस मामले में उच्च शिक्षा मंत्री डा.धन सिंह रावत ने कहा है बिना पद और शासनादेश के कर्मचारियों की तैनाती के मसले को दिखवाया जाएगा,

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