मुकेश बोरा- सत्ता, शह-मात,जेल और जमानत

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आखिर कई षडयंत्रों की बेड़ियों के बाद बाहर निकले दुग्ध संघ अध्यक्ष मुकेश बोरा फिलहाल मिली सासर तो जमानत

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नैनीताल skt. com

लाल कुआं दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा के नाम के आगे सत्ता शह -मात ,जेल और जमानत शब्दों की लंबी श्रृंखला जुड़ी हुई है आखिरकार षड्यंत्र की इस लंबी लड़ाई के बाद वह जमानत पर बाहर आने में कामयाब हो गए हैं फिलहाल उन्हें उत्तराखंड हाई कोर्ट की एकल पीठ ने सशर्त जमानत दी है उनके जमानत पर बाहर आने से उन्हें राजनीतिक रूप से जहां मजबूती मिलने की उम्मीदें बड़ी है वहीं उन्हें षड्यंत्र कर दूसरी बार-बार मुकदमे लिखवाने की साजिश भी धीरे-धीरे बेनकाब हो सकती है

बड़ी खबर सामने आई है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे लालकुआं दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश सिंह बोरा को सशर्त जमानत दे दी है। आरोपी के खिलाफ थाना लालकुआं में एफआईआर संख्या 170/2024 के तहत धारा 376(2)(n), 506 आईपीसी और धारा 9(m)/10 पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में हुई।

यह है पूरा मामला

पीड़िता, जो एक विधवा महिला है, 2021 में नौकरी की तलाश में थी। इसी दौरान उसने लालकुआं दुग्ध संघ में नौकरी के लिए अभियुक्त मुकेश सिंह बोरा से संपर्क किया। आरोप है कि अभियुक्त ने उसे स्थायी नौकरी देने का झांसा देकर 10 नवंबर 2021 को काठगोदाम स्थित ज़ायका होटल में बुलाया और वहां उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने घटना के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बनाए और नौकरी छीनने व वीडियो वायरल करने की धमकी दी। पीड़िता के अनुसार, 26 दिसंबर 2021 को आरोपी ने उसे फिर से ज़ायका होटल बुलाकर दुष्कर्म किया। आरोप यह भी है कि अभियुक्त ने पीड़िता को अपने दोस्तों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया और मना करने पर उसके ड्राइवर कमल बेलवाल ने जान से मारने की धमकी दी।मामले में एक नया मोड़ तब आया जब पीड़िता ने अपनी नाबालिग बेटी के यौन उत्पीड़न का भी आरोप लगाया। इस आधार पर पुलिस ने मुकदमे में पॉक्सो एक्ट की धारा 9(m)/10 जोड़ी।

दोनों पक्षों की दलीलें

अभियुक्त के वरिष्ठ अधिवक्ता ने जमानत याचिका पर बहस करते हुए कहा कि कथित घटनाएं 2021 की हैं, लेकिन एफआईआर 2024 में दर्ज हुई, जिससे आरोपों की सत्यता पर संदेह होता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पीड़िता ने अपने बयान बार-बार बदले, जिससे मामला कमजोर पड़ता है।वहीं, राज्य के उप महाधिवक्ता ने इसका विरोध किया और कहा कि अभियुक्त के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं तथा उसने जांच में सहयोग नहीं किया।

सशर्त जमानत मंजूर

सभी दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अभियुक्त को जमानत देते हुए कई कड़ी शर्तें लगाई हैं

अभियुक्त जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करेगा और आवश्यकतानुसार जांच में उपस्थित होगा।

वह किसी भी रूप में पीड़िता या उसकी नाबालिग बेटी को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।

अभियुक्त बिना न्यायालय की अनुमति के देश नहीं छोड़ सकेगा।

यदि अभियुक्त के पास पासपोर्ट है, तो उसे कोर्ट में जमा करना होगा, अन्यथा हलफनामा देना होगा।

न्यायालय के आदेश के अनुसार, अभियुक्त को व्यक्तिगत मुचलके और दो विश्वसनीय जमानतदारों की गारंटी पर रिहा किया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने शर्तों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।