रामनगर में बच्चे के लिए नदी की लहरी में उतरी मां

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मां की ममता ने कोसी नदी की लहरों को हराया, हथिनी ने बचाई अपने बच्चे की जान।

रामनगर। कहते हैं कि दुनिया में मां की ममता से बड़ा कोई कवच नहीं होता है, फिर चाहे वह इंसानी रूप में हो या वन्य जीव के रूप में। रामनगर में कोसी नदी के तट पर प्रकृति का एक ऐसा ही रोंगटे खड़ा कर देने वाला नजारा देखने को मिला।

झुंड के साथ नदी पार कर रहे एक नवजात हाथी काे मां ने बचा लिया। रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत हाथियों का एक झुंड गुरुवार को शांत भाव से रिगोंड़ा के समीप कोसी नदी पार कर रहा था।

झुंड के साथ एक नन्हा एक माह का हाथी का बच्चा भी अपनी मां क कदमों से कदम मिलाकर चल रहा था। तभी अचानक नदी की लहरों ने अपना रौद्र रूप दिखाया और पानी का बहाव तेज हो गया
मासूम बच्चा तेज धारा की चपेट में आ गया और असहाय होकर बहने लगा। पानी की लहरें नन्हें बच्चे को अपनी ओर खींच रही थी। वह अपनी छोटी सी जान बचाने के लिए लहरों से जूझ रहा था संघर्ष कर रहा था।

लेकिन एक मां अपने कलेजे के टुकड़े को डूबते व बहते हुए देखा तो बिना एक पल गंवाए हथिनी चिंघाड़ते हुए भारी और तेज कदमों से उफनती नदी की ओर बच्चे को बचाने के लिए गई।

मां उस तेज बहाव के बीच अपने बच्चे के लिए एक मजबूत चटटान बनकर खड़ी हो गई। उसने अपनी ममतामयी सूंड से बहते हुए बच्चे को थामा, उसे सहारा दिया और उसे हिम्मत देती रही।

एक तरफ मां की ममता का सुरक्षा कवच था तो दूसरी ओर उस नवजात का जीने का संघर्ष। कुछ ही पलों के रोंगटे खड़े कर देने वाले इस घटनाक्रम के बाद मां अपनी सूंड के सहारे उस नन्हें शावक को सुरक्षित नदी के किनारे ले आई।

पानी की लहरों को मात देकर वह मां अपने बच्चे को सहारा देकर जंगल की ओर चली गई। हाथी अच्छे तैराक होते हैं। हाथी खासकर बरसात के समय में अपने बच्चों को बीच में रखकर चलते हैं।

लेकिन कोसी नदी पार करने के दौरान हाथी का अनुमानित एक माह का बच्चा बह गया। हाथियों में मातृत्व की भावना काफी मजबूत होती है। बच्चों के लिए किसी भी हद से गुजर सकते हैं

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