करोड़ों का घोटाला दबाने के लिए सचिव से घूस की पेशकश, जानें फिर क्या हुआ

अक्सर सुर्खियों में रहने वाला उत्तराखंड सचिवालय इन दिनों फिर एक बार सुर्खियों में है. इस बार एक सचिव से घूस की पेशकश किए जाने की खबरों को लेकर उत्तराखंड सचिवालय सुर्खियां बटोर रहा है.
सचिव रंजीत सिंहा से घूस की पेशकश
दरअसल हाल ही में वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के नाम पर करोड़ों का घोटाला सामने आया है. घोटाले की जांच शुरू हुई तो साफ्टवेयर डेवलपमेंट का काम देख रही कंपनी सवालों के घेरे में आ गई. जिसके बाद तकनीकि शिक्षा के सचिव रंजीत सिंहा ने आरोपी कंपनी के खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिए हैं.
घूस की पेशकश से असहज हुए सचिव
जांच से परेशान सॉफ्टवेयर कंपनी ने मामले को रफा दफा करने के लिए सचिवालय में सचिव के पास अपना प्रतिनिधि भेज कर घूस की पेशकश कर दी. कंपनी चाहती थी कि कुछ ले देकर मामला यहीं खत्म कर दिया जाए. इस दौरान सचिवालय में बैठे सचिव रंजीत सिन्हा घूस की पेशकश से असहज तो हुए ही साथ ही नाराज भी नजर आए. हालात ये हुए कि सचिव ने सॉफ्टवेयर कंपनी के प्रतिनिधि को तुरंत कार्यालय से बाहर जाने को कह दिया. अब पूरे मामले की सचिव ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दे दिए हैं.
पहले भी सामने आ चुके हैं इस तरह के मामले
बता दें उत्तराखंड सचिवालय में ऐसा वाक्या पहली बार भले ही खुल कर आया हो लेकिन ऐसे ही मिलते जुलते मामलों को लेकर सचिवालय हमेशा से चर्चाओं में आता रहा है. हाल ही में उत्तराखंड बेरोजगार संगठन के अध्यक्ष बॉबी पंवार अपने साथियों के संग पैसों से भरी अटैचियां लेकर सचिवालय के गेट पर प्रदर्शन करते नजर आए थे. बॉबी पंवार का आरोप था कि पैसों की थैली लेकर पहुंचने वालों से ही अफसर मिलते हैं.
उत्तराखंड सचिवालय के हिस्से में आए ऐसे विवाद बताते हैं कि सूबे में सचिवालय और सचिवालय में बैठे अधिकारियों को लेकर जो छवि बनी है वो अच्छी नहीं कही जा सकती है. उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी दफ्तर यानी सचिवालय में भले ही जनता और मीडिया के प्रवेश को सीमित कर दिया गया हो लेकिन घूस की पेशकश लेकर पहुंचने वालों का प्रवेश निर्बाधित रूप से हो सकता है
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