हल्द्वानी- ट्रेन की चपेट में आने से संदिग्ध परिस्थितियों में युवक की मौत, डेढ़ साल पहले बड़े भाई की भी इसी तरह ट्रेन की चपेट में आने से हुई थी मौत,

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लालकुआं। देर शाम काठगोदाम से दिल्ली को जा रही शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से हुए दर्दनाक हादसे ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। संदिग्ध परिस्थितियों में ट्रेन की चपेट में आने से किशनपुर सकुलिया निवासी 38 वर्षीय हरीश आगरी की दर्दनाक मौत हो गई। विडंबना देखिए कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व इसी रेल ट्रैक पर उनके बड़े भाई बिशन आगरी की भी ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। अब छोटे भाई की भी असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक ही परिवार के तीन भाइयों की असमय मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार 3 नवंबर की शाम करीब चार बजे हरीश आगरी मोतीनगर बाजार से अपने घर किशनपुर सकुलिया लौट रहे थे। इसी दौरान काठगोदाम से दिल्ली जा रही शताब्दी एक्सप्रेस की चपेट में आ गए। हादसा इतना भीषण था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर पहुंची जीआरपी और सिविल पुलिस उन्हें मृत्यु की पुष्टि के लिए हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी चिकित्सालय ले गई, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
सबसे मार्मिक पहलू यह है कि हरीश आगरी अपने पीछे पत्नी और एक नन्ही बेटी को छोड़ गए हैं। वह दिल्ली में नौकरी करते थे और दीपावली का त्योहार मनाने के लिए एक सप्ताह पूर्व ही छुट्टी लेकर घर आए थे। परिवार को क्या पता था कि त्योहार की खुशियां मनाने घर लौटा बेटा अब कभी वापस नहीं लौटेगा।
हरीश अपने चार भाइयों में मझले थे। परिवार पहले ही दो बेटों को खोने का गम झेल चुका था। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व उनके बड़े भाई बिशन आगरी की भी मोतीनगर के समीप रेलवे लाइन पार करते समय जम्मू तवी एक्सप्रेस की चपेट में आने से मौत हो गई थी। बिशन अपने पीछे सात बेटियों को छोड़ गए थे। परिवार अभी इस गहरे सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि अब हरीश की मौत ने पुराने जख्म फिर हरे कर दिए। कुछ वर्ष पूर्व एक अन्य भाई की भी असमय मौत हो चुकी थी। इस तरह चार भाइयों में से तीन की असमय मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है।
वरिष्ठ समाजसेवी बिपिन जोशी ने बताया कि बुधवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोपहर बाद हरीश की अंतिम शवयात्रा निकाली जाएगी। रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
एक ही परिवार के तीन बेटों की असमय विदाई और मासूम बच्ची के सिर से पिता का साया उठ जाने की इस घटना से किशनपुर सकुलिया में हर आंख नम है

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