संसार को वरिष्ठ पत्रकार आनंद सिंह नेगी ने किया अलविदा

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अल्मोड़ा जिले के अब तक के एक बड़ी खबर सामने आ रही है जानकारी के अनुसार बता दे कि यहां पर वरिष्ठ पत्रकार आनंद सिंह नेगी जो कि मलबे में दबे थे उनकी मृत्यु की खबर सामने आ रही है और दोपहर लगभग 3:30 बजे उनका शव मलबे से बरामद हो गया है। मंगलवार को भिकियासैंण के रापड़ गांव में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार आनंद सिंह नेगी अपने परिवार के साथ मलवे में दब गए थे जिसके बाद रेस्क्यू कर उनके परिवारों में से उनकी पत्नी को सकुशल बाहर निकाल लिया गया था वही पहुंच और पति की मृत्यु की खबर सामने आ चुकी थी लेकिन अब प्रशासनिक सूत्रों से पता चला है कि
गत दिवस को मूसलाधार बारिश से रात 01 बजे के करीब आनंद सिंह नेगी पुत्र मदन सिंह नेगी उम्र 60 वर्ष के मकान पर पहाड़ी से मलबा आ गिरा।

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वह कुछ समझ पाते तब तक मलबे से मकान क्षतिग्रस्त हो गया। आनंद सिंह नेगी की पत्नी उषा उम्र 55 वर्ष ने भागकर जान बचाई। जबकि आनंद सिंह नेगी व उनके बड़े भाई गोवर्धन सिंह की लड़की के दो बच्चे तनुज पुत्र मदन सिंह 12 वर्ष व किरन पुत्री मदन सिंह उम्र 16 वर्ष के दो किशोर मलबे में दब गए। वह कुछ समय से नाना आनंद सिंह के यहां रह रहे थे। घटना के बाद सुबह होने पर एसडीआरएफ, पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। आनंद नेगी के पोता—पोती किरन व तनुज को तो सुबह ही मृत अवस्था में मलबे से निकाल लिया गया, लेकिन आनंद सिंह नेगी का दोपहर तक कुछ पता नहीं चल पाया। आंखिर करीब 3.30 बजे दोपहर के वक्त प्रशा​सनिक सूचना आई कि आनंद सिंह नेगी का शव भी बरामद कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि पानी की टंकी से आये मलबे ने उनके दो मंजिला मकान को ढहा दिया। आनंद नेगी निचले कमरे में सोये थे, इस कारण उन पर पहली मंजिल के भवन का पूरा मलब गिर गया, जिस कारण शव को बाहर निकालने में भी काफी देरी हुई।


आनंद सिंह नेगी एक वरिष्ठ और संवेदनशील पत्रकार थे। उनका पैत्रक गांव भिकियासैंण तहसील के रापड़ में था। दैनिक अखबार अमर उजाला में सेवाकाल का अधिकांश समय उन्होंने रानीखेत व बागेश्वर में बिताया था। वह समाचार पत्र के उप संपादक थे। सेवानिवृत्ति के बाद वह एक एनजीओ से जुड़ गये थे। उम्र बढ़ने के साथ ही आनंद सिंह नेगी को अपने घर—गांव की याद रापड़ खींच ले गयी। वहां उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन में दो मंजिला भवन बनाया और बीते कुछ समय से परिवार सहित वहीं बस गये। रात के पहर तेज बारिश से उनका मकान ढह गया और आनंद नेगी मलबे में दबकर हमेशा के लिए इस संसार को अलविदा कहकर चले गये। आनंद नेगी का इस तरह चला जाना निश्चित रूप से पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई बहुत मुश्किल है।

तहसीलदार दिवान गिरि गोस्वामी ने बताया कि एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम ने पत्रकार आनंद नेगी के शव को को दोपहर के वक्त मलबे से निकालने में सफलता पा ली। उन्होंने बताया कि भारी मलबा आने से दो मंजिला मकान करीबी रात एक बजे ढह गया था। चूंकि यहां पतला पैदल मार्ग होने के कारण जेसीबी नहीं पहुंच सकती थी अतएव रेस्क्यू करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। फिलहाल शव को सीएचसी भिकियासैंण पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया गया है।

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