उत्तराखंड में MBBS एडमिशन में फर्जीवाड़ा मास्टरमाइंड गैंग एक्टिव, एक गलती से हुआ खुलासा

NEET की तैयारी में दिन-रात एक करने वाले छात्रों ये खबर आपके लिए है। युवाओं की मेहनत पर पानी फेरने के लिए एक उत्तराखंड में मास्टरमाइंड गैंग एक्टिव हो गया है। जिसने उत्तराखंड के इतिहास का सबसे हैरान कर देने वाला MBBS एडमिशन घोटाला किया।
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उत्तराखंड में MBBS एडमिशन में फर्जीवाड़ा
दरअसल ये पूरा मामला देहरादून का है। जहां सरकारी मेडिकल सीटों पर सेंधमारी की इतनी बड़ी साजिश रची गई जिसे सुनकर आप भी सन्न रह जाएंगे। इस मामले में पांच लोगों पर मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया है। मीडिया रिपोर्टस की मानें तो उत्तराखंड में स्वाति, खुशी और परी नाम की इन लड़कियों ने ऑनलाइन पोर्टल के जरिए एक MBBS की सरकारी सीटों में कोटे के लिए आवेदन किया।
डॉक्यूमेंट्स में तीनों लड़किया स्वातंत्रता संग्राम सेनानी की नातिन
इन तीनों के डॉक्यूमेंट्स में एक ही दावा किया गया था कि ये स्वतंत्रता संग्राम सेनानी धर्मवीर वर्मा की नातिन है। जिसके चलते ये एमबीबीएस की सरकारी सीट की हकदार हैं। जब ये लड़कियां सीट पक्की करने पहुंचीं तो चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने इस खेल को पकड़ लिया। निदेशालय को शक हुआ कि चारों अलग अलग घर की लड़कियां है।
तीनों के डॉक्यूमेंट्स में धर्मवीर वर्मा का ही नाम
तीनों के डॉक्यूमेंट्स में धर्मवीर वर्मा का ही नाम है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने तुरंत देहरादून के जिलाधिकारी को एक चिट्ठी लिखी। जब डीएम के आदेश पर तहसील प्रशासन ने इन चारों मामलों की जांच करने पहुंचा तो जो सच सामने आया, वो हैरान कर देने वाला था।
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इस नाम का कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं
जिस धर्मवीर वर्मा के नाम का स्वतंत्रता सेनानी कार्ड लगाकर ये लड़कियां डॉक्टर बनने चली थीं। कलक्ट्रेट के 1 फरवरी 2005 से लेकर आज तक के रिकॉर्ड में उस नाम का कोई स्वतंत्रता सेनानी मिला ही नहीं। यानी एक फर्जी सेनानी के नाम पर एक नहीं बल्की 3 लड़कियां मेडिकल सीट पर कब्जा करने को तैयार थी। जब राजस्व अधिकारियों ने इन लड़कियों के पते की जांच की तो एक और खुलासा हुआ।
तृप्ति नाम की एक लड़की का पता गलत
तृप्ति नाम की एक लड़की के आवेदन में मोथरोवाला का पता लिखा गया था। पटवारी जब वहां पहुंचे तो न तृप्ति मिली, न उसका परिवार, पड़ोसियों से पूछा गया तो किसी ने इस नाम को कभी सुना ही नहीं था। और तो और, फॉर्म में जो मोबाइल नंबर लिखा था, वो किसी अनजान आदमी का निकला।
सभी के डॉक्यूमेंट्स में कई गड़बड़ियां
इसके अलावा भी इन सभी के डॉक्टूमेंट्स में कई और गडबड़ियां थी। ये रिपोर्ट जैसे ही उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह के पास पहुंची। उन्होंने 10 सितंबर को इन चारों के प्रमाणपत्र तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए। हालांकि वहीं इस मामले में क्लेमनटाउन और रायपुर थाने में संबंधित पटवारियों ने केस दर्ज करा दिए हैं।
पांचों लोगों के प्रमाणपत्र संदिग्ध, रद्द किया
इस बड़े खुलासे के बाद चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना का बयान भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो उन्होंने साफ कहा है कि काउंसलिंग के दौरान ही हमें पांचों लोगों के प्रमाणपत्र संदिग्ध लगे थे। हमने तुरंत जिला प्रशासन को अलर्ट किया। जिसके बाद इन्हें रद्द कर दिया गया। फिलहाल नीट काउंसलिंग का दूसरा चरण जारी है और हमारी नजर हर दस्तावेज पर है।
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