VVIP पते पर 200 करोड़ का फ्राड: पीएम आवास के पास …………… जानें कैसे सुलझा केस
Delhi Bungalow Fraud: लुटियंस दिल्ली के अमृता शेरगिल मार्ग पर स्थित 100 करोड़ के बंगले के नाम पर बिल्डर से 135 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। जाली दस्तावेजों के जरिए एसबीआई नीलामी का झूठा दावा कर धोखाधड़ी की गई।
Delhi Bungalow Fraud: दिल्ली के सबसे पॉश और वीवीआईपी इलाकों में से एक अमृता शेरगिल मार्ग पर स्थित कोठी नंबर 9 इन दिनों एक बड़े प्रॉपर्टी घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। प्रधानमंत्री आवास, विदेशी दूतावासों और संसद के पास स्थित इस बेहद ही सुरक्षित इलाके की संपत्ति का कभी खुले बाजार में बिकना नामुमकिन सा माना जाता था।
दिल्ली पुलिस ने संपत्ति घोटाले से संबंधित मामले में 38 साल के बिजनेसमैन व्यवसायी मोहित गोगिया को गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप हैं कि उन्होंने दिल्ली के इसी आलीशान बंगले के नाम पर अपनी जिंदगी का सबसे बड़े फर्जीवाड़े अंजाम दिया और इस फर्जीवाड़े से सभी भौचक्के रह गए।
क्या है मामला?
दरअसल, मोहित गोगिया ने यूनिट ग्रुप के सह-संस्थापक कृष्णा कुमार अग्रवाल की बेटी और रियल एस्टेट डेवलपर सोनकशी बंसल को यह झांसा दिया कि अमृता शेरगिल मार्ग का यह बंगला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जब्त कर लिया गया है और इसे बैंक नीलामी के जरिए करीब 75 करोड़ रुपये में बेचा जा रहा है।
पुलिस के अनुसार इस दावे के पीछे जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था, जिससे यह संपत्ति करीब 200 करोड़ रुपये के कथित प्रॉपर्टी फ्रॉड के केंद्र में आ गई। मोहित गोगिया के शिकार कोई आम या पहली बार घर खरीदने वाले लोग नहीं, बल्कि वे अनुभवी रियल एस्टेट डेवलपर थे जो अमृता शेरगिल मार्ग और गुरुग्राम की डीएलएफ कैमेलियास जैसी प्रीमियम संपत्तियों पर नजर रखते थे।
पुलिस ने 6 लोगों को किया है गिरफ्तार
जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस घोटाले में गोगिया, उनकी पत्नी श्वेता और व्यवसायी अभिनव पाठक सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया है। अमृता शेरगिल मार्ग पर एक बंगले की कीमत 100 करोड़ रुपये तक हो सकती है, लेकिन पुलिस का कहना है कि गोगिया ने दावा किया कि मुख्य संपत्ति और उसके साथ लगी 9ए कोठी दोनों मिलकर 75 करोड़ रुपये में मिल जाएंगी।
SBI की नीलामी लिस्टिंग में शामिल करने का दावा
पुलिस का आरोप है कि गोगिया ने, खरीदने वाले परिवार को भरोसा दिलाया कि बैंक की नीलामी प्रक्रिया तक उसकी पहुंच है और वह इसे ओपन मार्केट में आने से पहले सुरक्षित कर सकता है। सोनक्षी बंसल ने पुलिस को बताया कि संपत्ति के एक सुरक्षा गार्ड ने भी उन्हें बताया था कि प्रॉपर्टी एसबीआई के पास है। हालांकि, पुलिस के एक सूत्र ने स्पष्ट किया कि एसबीआई ने कभी भी इस बंगले को नीलामी के लिए सूचीबद्ध नहीं किया था, बल्कि यह किसी तीसरे पक्ष के ऋण के लिए केवल बंधक के रूप में गिरवी रखा गया था।
सोनाक्षी ने पुलिस को बताया कि अक्टूबर 2024 तक वह 75 करोड़ में से 43 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी थीं और बाकी रकम के लिए उन्हें एसबीआई से लोन मिलने का भरोसा दिया गया था। इसके साथ ही गोगिया ने बंसल के चचेरे भाई और बिजनेस पार्टनर मृणाल मित्तल को गुरुग्राम के सेक्टर 63 का एक विकसित प्लॉट 60 करोड़ रुपये में बेचने का भी वादा किया। पुलिस का आरोप है कि इन दोनों सौदों को मिलाकर लगभग 135 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जो आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांचे जा रहे मामलों में सबसे बड़ा है।
शिकायत में क्या-क्या आरोप?
पुलिस के मुताबिक गोगिया के वादे जल्द ही बहानों में बदलने लगे। सोनाक्षी बंसल की शिकायत के अनुसार, गोगिया ने पहले नवंबर 2024 में इनकम टैक्स छापों का हवाला दिया और मार्च 2025 तक दोनों संपत्तियों का कब्जा सौंपने का वादा किया लेकिन दो महीने बाद भी कब्जा नहीं मिला और गोगिया ने दावा किया कि 1.3 करोड़ रुपये का दूसरा कर्ज बकाया होने के कारण संपत्ति जारी नहीं हो पा रही है।
शिकायत के अनुसार, बंसल ने इस रकम को चुकाने के लिए एक और चेक जारी किया। इसके बाद उन्हें वे कागजात और चाबियां दी गईं जिन्हें गोगिया ने संपत्ति के असली कागजात बताया था, लेकिन फिर भी कब्जा नहीं मिला। मई में जब परिवार ने गोगिया से आमने-सामने बात की, तो उसने भुगतान की गई रकम के बदले पोस्ट-डेटेड चेक थमा दिए और कहा कि अगर महीने के अंत तक कब्जा न मिले तो इन्हें भुना लेना।
बाउंस हुए चेक तो पुलिस के पास पहुंचे पीड़ित
हालांकि वे चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद जून 2025 में परिवार ने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया और मामला आर्थिक अपराध शाखा को ट्रांसफर कर दिया गया। अमृता शेरगिल मार्ग पर हरे-भरे नीम और गुलमोहर के पेड़ों के बीच कोठी नंबर 9 और 9ए एक-दूसरे के बगल में स्थित हैं। बंसल को ऑफर की गई कोठी नंबर 9 खाली पड़ी है, जबकि 9ए में नेमप्लेट और बाहर खड़ी एसयूवी गाड़ियां साफ तौर पर वहां रहने का संकेत देती हैं।
बाहर तैनात सुरक्षा गार्ड शंभू ने बताया कि मालिक की कुछ साल पहले मौत हो चुकी है और अब उनकी पत्नी, बेटी व अन्य परिवार के लोग वहीं रहते हैं। खुद को मालिक की बेटी बताने वाली एक महिला ने संपत्ति की बिक्री के बारे में कुछ भी जानकारी होने से साफ इनकार किया और कहा कि ये बंगले बरसों से उनके परिवार के पास हैं।
राजेंद्र नगर में आलीशान घर
मोहित गोगिया का आखिरी ज्ञात पता राजेंद्र नगर का एक घर है जो अमृता शेरगिल मार्ग से महज 7 किलोमीटर दूर है। उस इमारत की तीसरी मंजिल पर बने इस घर की भव्य बनावट और वहां आने-जाने वाली लग्जरी गाड़ियों को देखकर हर कोई हैरान रहता था। गोगिया की गिरफ्तारी पहली बार नहीं हुई थी, बल्कि इससे पहले सितंबर में उन्हें पंजाब के जीरकपुर में 181 एकड़ जमीन से जुड़े एक कथित धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत मिल गई थी।
जांच अधिकारियों का आरोप है कि एक और गिरफ्तारी की आशंका के चलते वह फरार हो गए थे। गोगिया के अलावा चार अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
कौन है पूरे फ्रॉड गैंग का मास्टरमाइंड
पुलिस पश्चिम दिल्ली के एक मजबूत फाइनेंसर 49 वर्षीय राम सिंह की भूमिका की भी जांच कर रही है, जो इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड हो सकता है। आठवीं कक्षा तक पढ़े राम सिंह ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर 2005 में सुभाषि नगर में ‘बाबा जी फाइनेंस’ नाम से एक निजी ऋण फर्म शुरू की थी जो अनियोजित लोन देने और प्रॉपर्टी ब्रोकरेज का काम करती थी। उसकी डिस्क्लोजर रिपोर्ट के मुताबिक उसका केवल एक ही कर्मचारी है, फिर भी गोगिया समेत सभी आरोपियों ने उसे अपना बॉस बताया है।
कैसे काम करता है गैंग?
पुलिस के सामने दिए बयानों में गोगिया ने दावा किया कि वह 2022 में राम सिंह से मिला था और अच्छे रिटर्न के लिए उसने अपना पैसा बाबा जी फाइनेंस में लगाया था। गोगिया ने पुलिस को बताया कि जुलाई-अगस्त 2023 में राम सिंह ने सुझाव दिया कि हमें बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा इकट्ठा करना चाहिए और विवादित व गिरवी रखी गई संपत्तियों को बेचने के नाम पर एडवांस पैसे वसूलने की योजना बनाई।
एक तरफ जहां मोहित गोगिया सार्वजनिक बैंक रिकॉर्ड से जब्त संपत्तियों की पहचान करता, संभावित शिकार तलाशता और दस्तावेज फर्जी तैयार करता था, वहीं अन्य लोग फर्जी खाते दिलाने में मदद करते थे। इस काम के बदले गोगिया को ठगी गई कुल रकम का 30 प्रतिशत हिस्सा मिलता था। गोगिया ने पुलिस को यह भी बताया कि अगर कोई उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत करता या कोर्ट केस दर्ज करता, तो वे किसी नए व्यक्ति को फंसाकर उसके पैसों से पुराने वाले का हिसाब चुका देते थे।
हालांकि, 2024 में पड़े इनकम टैक्स छापों ने इस पूरे खेल पर पानी फेर दिया। गोगिया को बकाया चुकाने के लिए 3.5 करोड़ रुपये देने पड़े जिससे वह पूरी तरह कंगाल हो गया और यह स्थिति ऐसे वक्त में आई जब वह अपने सबसे बड़े ग्राहक यानी यूनिट ग्रुप के परिवार को फंसाने की कोशिश कर रहा था। उसने पुलिस को बताया कि इसके बाद लोगों ने पैसे लौटाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया और आपराधिक मामले दर्ज होने लगे। गोगिया की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद दिल्ली पुलिस ने राम सिंह को जांच में शामिल होने को कहा, लेकिन उसने पांच महीने तक समन नजरअंदाज किया।
कोर्ट ने जारी किया गैर-जमानती वारंट
इसके बाद कोर्ट ने गैर-जमानत वारंट जारी कर दिया। जानकारी के मुताबिक, राम सिंह अभी गिरफ्तार नहीं हुआ है, लेकिन पूछताछ के दौरान उसने सभी आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि उसने गोगिया को केवल उसके प्रॉपर्टी बिजनेस में निवेश के लिए पैसे ट्रांसफर किए थे।
वहीं दूसरी ओर, राजेंद्र नगर में गोगिया के पुराने इलाके में उन यादों के निशान भी धुंधले पड़ने लगे हैं, जिसने दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों को कथित रूप से चूना लगाया था। उसके पुराने मकान के बाहर अब उसका नाम सुनते ही लोग असमंजस में पड़ जाते हैं और यही पूछते हैं कि यहां मोहित नाम का कोई शख्स कभी रहता भी था या नहीं।
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