8th Pay Commission: 2.57 फिटमेंट फैक्टर के बाद भी कर्मचारियों की बढ़ेगी केवल इतनी सैलरी, ये है कैलकुलेशन
8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर चर्चा तेज है. कर्मचारी संगठन करीब 3.8 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ 2.0 से 2.25 के बीच की संभावना जता रहे हैं. सवाल ये है कि क्या ज्यादा फिटमेंट फैक्टर होने से सैलरी भी ज्यादा बढ़ेगी? या फिर कहानी कुछ और है.
देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है, दूसरी ओर आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करने में जुटा है. कर्मचारी संगठन आयोग से ज्यादा फिटमेंट फैक्टर तय करने की मांग कर रहे हैं. नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. हालांकि कई एक्सपर्ट्स कर रहे हैं कि इतना बड़ा फिटमेंट फैक्टर मिलना मुश्किल है. उनका अनुमान है कि आयोग 2.0 से 2.25 के बीच फिटमेंट फैक्टर तय कर सकता है. बहरहाल सिफारिशें सामने आने में अभी काफी वक्त है, लेकिन इस बीच फिटमेंट फैक्टर काफी चर्चाओं में है.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ज्यादा फिटमेंट फैक्टर का मतलब ज्यादा सैलरी बढ़ना है? टोटल सैलरी पर फिटमेंट फैक्टर का असर कैसे होता है? साथ ही जानेंगे कि कैसे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर होने पर सैलरी उस अनुपान में नहीं बढ़ती है?
आखिर क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
आसान भाषा में कहें तो फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणांक यानी मल्टीप्लायर होता है. इसका उपयोग वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों के मूल वेतन और पेंशनभोगियों की पेंशन को नए वेतन ढांचे में बदलने के लिए किया जाता है. इस गुणांक का गुणा बेसिक सैलरी से किया जाता है. यानी जितना ज्यादा यह नंबर होगा, बेसिक सैलरी भी उतना ही गुना होगी. इसका फायदा ये होता है कि इससे सभी स्तर के कर्मचारियों के वेतन में एक समान बढ़ोतरी करना आसान हो जाता है. ध्यान देने वाली बात ये है कि फिटमेंट फैक्टर का सीधा असर केवल बेसिक सैलरी पर पड़ता है. हालांकि HRA जैसे कुछ भत्ते बेसिक सैलरी के आधार पर तय होते हैं, इसलिए बेसिक बढ़ने पर उनका असर भी बदलता है. वहीं DA की गणना सरकार की ओर से तय दरों के अनुसार होती है.
क्या फिटमेंट फैक्टर जितना होगा, सैलरी भी उतनी ही बढ़ेगी?
इस सवाल का जवाब नहीं है. कई लोग सोचते हैं कि अगर फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय होता है, तो उनकी सैलरी 157% बढ़ जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं होता. फिटमेंट फैक्टर का असर मुख्य रूप से बेसिक सैलरी पर पड़ता है, जबकि कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी में बेसिक पे के अलावा महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य भत्ते भी शामिल होते हैं.
पिछले वेतन आयोगों से क्या पता चलता है?
पिछले वेतन आयोगों के आंकड़े बताते हैं कि फिटमेंट फैक्टर ज्यादा होने का मतलब यह नहीं कि कुल वेतन भी उतना ही बढ़ जाएगा. 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, लेकिन BankBazaar के विश्लेषण के अनुसार, ग्रॉस सैलरी में करीब 14.29% की बढ़ोतरी हुई थी. दूसरी ओर 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सिर्फ 1.86 था, फिर भी ग्रॉस सैलरी में 54% की बढ़ोतरी हुई थी.
ऐसा क्यों हुआ?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह महंगाई भत्ता (DA) है. जब 7वां वेतन आयोग लागू हुआ, तब कर्मचारियों को पहले से 125% DA मिल रहा था. यानी पुराने वेतन में पहले ही बड़ा महंगाई भत्ता जुड़ा हुआ था. इसलिए 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू होने के बाद भी कुल वेतन में बढ़ोतरी सीमित रही. ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) के मुताबिक, 7वें वेतन आयोग में पुराने वेतन ढांचे को भी संतुलित किया गया था. इसी कारण कर्मचारियों की औसत ग्रॉस सैलरी में बढ़ोतरी सिर्फ 14.29% रही. वहीं, 6वें वेतन आयोग के समय DA केवल 24% था. इसलिए 1.86 फिटमेंट फैक्टर का असर ज्यादा दिखाई दिया और कर्मचारियों की कुल सैलरी में 54% की बढ़ोतरी हुई.
8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ सकती है सैलरी?
वित्तीय वेबसाइट BankBazaar के अनुमान के मुताबिक, अगर 8वें वेतन आयोग में 2.0 से 2.57 के बीच फिटमेंट फैक्टर तय होता है, तो लेवल-11 से लेवल-18 तक के कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी में लगभग 31% से 68% तक बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि यह सिर्फ एक अनुमान है. अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार कौन-सा फिटमेंट फैक्टर मंजूर करती है और उस समय DA समेत अन्य भत्तों की स्थिति क्या होगी.
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