कागजों में ‘मौत’, गांव में जिंदा मिले : 2-2 लाख के बीमा क्लेम का मामला, 59 बैंक खातों के दस्तावेज भी जांच के दायरे में

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Declared dead on paper after being alive

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में कथित फर्जीवाड़े की जांच के तार अब मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ के कबीरधाम तक पहुंच गए हैं। मामला इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि जिन ग्रामीणों को दस्तावेजों में मृत बताकर उनके नाम पर दो-दो लाख रुपये का बीमा क्लेम निकाले जाने की बात सामने आई है, उनमें से दो अपने गांव में जीवित मिले हैं। वहीं तीसरे व्यक्ति के परिजनों का कहना है कि वह रोजगार के लिए रायपुर गया हुआ है।

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मामला पंडरिया विकासखंड के अंतिम छोर पर मध्यप्रदेश की सीमा से लगे ग्राम पंचायत भेलकी के आश्रित गांव बदनाचुआ से जुड़ा है। यहां बाबूलाल और गंगाराम मरावी अपने परिवार के साथ गांव में मौजूद मिले। वहीं रामकुमार के परिजनों ने बताया कि वह रोजी-रोटी के सिलसिले में रायपुर गया हुआ है। 

थाने बुलाया गया तो ग्रामीणों को पता चला मामला
ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ दिन पहले उन्हें पूछताछ के लिए कुकदूर थाने बुलाया गया था। उनका दावा है कि इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनके नाम कथित बीमा फर्जीवाड़े की जांच में सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अपने नाम से बीमा कराए जाने की जानकारी नहीं थी। उनका यह भी दावा है कि उन्हें इस बात का पता नहीं था कि उन्हें दस्तावेजों में मृत बताकर कथित तौर पर दो-दो लाख रुपये का बीमा क्लेम किया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित ग्रामीण जीवित हैं तो उनके नाम पर मृत्यु से जुड़े दस्तावेज कैसे तैयार हुए और बीमा क्लेम की रकम आखिर किसने हासिल की?

MP में 482 कथित क्लेम की चल रही जांच
मिली जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत 482 कथित फर्जी बीमा क्लेम जांच के दायरे में हैं। इन मामलों में करीब 9 करोड़ 60 लाख रुपये की राशि का उल्लेख किया गया है। इसी जांच की कड़ी में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के तीन ग्रामीणों के नाम सामने आने की जानकारी है। पुलिस दस्तावेजों के मुताबिक, भोपाल के अजाक थाने में अपराध क्रमांक 01/26 के तहत कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, उनके इस्तेमाल और बीमा दावों में कथित धोखाधड़ी से संबंधित मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि दस्तावेज तैयार कर बीमा कंपनियों से क्लेम की राशि हासिल की गई। हालांकि इसमें किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। 

59 बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल
जांच में बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज भी अहम कड़ी बनकर सामने आए हैं। पुलिस दस्तावेजों के अनुसार, ICICI बैंक की इंदौर स्थित पिपल्याहाना शाखा से 59 बैंक खातों के अकाउंट ओपनिंग फॉर्म, KYC दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट से संबंधित जानकारी हासिल की गई है। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक की बेंगलुरु स्थित रामानगरम शाखा से भी संबंधित दस्तावेज जुटाए जाने का उल्लेख है। पुलिस दस्तावेज में तीन संदिग्धों से संबंधित अकाउंट ओपनिंग फॉर्म, KYC और बैंक स्टेटमेंट मिलने की बात भी कही गई है। साथ ही छत्तीसगढ़ से जुड़े तीन पॉलिसीधारकों और खाताधारकों के संबंध में जानकारी मिलने का उल्लेख है। इन दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित बैंक खाते किन दस्तावेजों के आधार पर खोले गए, उनका संचालन कौन कर रहा था और बीमा क्लेम से मिली रकम किन खातों में पहुंची। 

जिंदा हैं तो मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बना?
इस पूरे मामले ने बीमा क्लेम से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ग्रामीण जीवित हैं तो उनके नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र किसने तैयार करवाए और वे कहां से जारी हुए? बीमा राशि जारी करने से पहले दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया? बैंक खातों की KYC में कथित गड़बड़ी कैसे नहीं पकड़ी गई? साथ ही दो-दो लाख रुपये की बीमा राशि का वास्तविक लाभ किसे मिला? जांच में इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है। फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि पूरा मामला कुछ लोगों तक सीमित है या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका है।

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