भारतीय सीमा में लावारिस मिले पाक सैनिकों के शव, सामने आई चौंकाने वाली जानकारी

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इस्लामाबाद: कारगिल विजय दिवस की वर्षगांठ से ठीक पहले पाकिस्तान के वरिष्ठ सांसद और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर्रहमान ने अपनी ही सेना और सैन्य प्रतिष्ठान के रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। एक सार्वजनिक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि 1999 के कारगिल युद्ध में हताहत हुए पाकिस्तानी सैनिकों के वास्तविक आंकड़े देश से हमेशा छिपाए गए। मौलाना ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने अपने ही शहीद जवानों के शवों को स्वीकार करने से मना कर दिया था, जिसके बाद भारतीय सेना ने इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया।

कैप्टन कर्नल शेर खान का उदाहरण और आंकड़ों में हेरफेर

फजलुर्रहमान ने सैन्य प्रतिष्ठान से जवाब मांगते हुए कहा कि देश को स्पष्ट किया जाए कि युद्ध में वास्तव में कितने सैनिक मारे गए थे और कितनों के पार्थिव शरीर वापस लाए गए। उन्होंने कैप्टन कर्नल शेर खान का जिक्र करते हुए बताया कि उनके शव को भी पाकिस्तान ने भारत के लगातार दबाव और आग्रह के बाद ही स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि मृतकों की संख्या सैकड़ों में थी, लेकिन पाकिस्तानी जनता के सामने हमेशा झूठे आंकड़े पेश किए गए।

कारगिल युद्ध और पाकिस्तान के आधिकारिक झूठ का पर्दाफाश

मौलाना के इस बयान ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान के आधिकारिक दावों की पोल खोल दी है। मई से जुलाई 1999 के बीच लद्दाख के कारगिल क्षेत्र में चले इस युद्ध में पाकिस्तान लगातार यह दावा करता रहा कि घुसपैठ करने वाले कश्मीरी उग्रवादी थे, जबकि वे वास्तव में पाकिस्तानी थलसेना के नियमित सैनिक थे। सच को छिपाने की रणनीति के तहत ही पाकिस्तान सरकार अपने सैनिकों के शवों को लेने से मुकर गई थी, जिसके बाद भारतीय सेना ने पूर्ण सैन्य मर्यादा और धार्मिक परंपराओं के साथ उनका अंतिम संस्कार किया था। अंततः भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ के जरिए 26 जुलाई 1999 को सभी चौकियों को वापस हासिल कर ऐतिहासिक विजय प्राप्त की थी।