क्रूर शासक लेकिन कच्ची कब्र!, क्यों औरंगजेब की कब्र पर नहीं दिखती शाही चमक?

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आज कल मुगल बादशाह औरंगजेब(Aurangzeb) की कब्र काफी चर्चाओं में है। फरवरी में सिनेमाघरों में विक्की कौशल अभिनीत संभाजी पर आधारित फिल्म छावा रिलीज हुई और इसने औरंगजेब पर बहस का ताजा दौर शुरु कर दिया। मुगल शासक और उसकी कब्र लोगों में आक्रोश की वजह बन गई।

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महाराष्ट्र में इसे लेकर इतना बवाल हो रहा है की पुलिस को वहां धारा 163 तक लगानी पड़ गई। जहां एक तरफ मुगल शासक औरंगजेब की कब्र को लेकर इतना बवाल हो रहा है वहीं दूसरी तरफ जो भी औरंगजेब की कब्र के बारे में सुन रहा है। उसके मन में एक ही सवाल आ रहा है की आखिर इतने बड़े मुगल शासक की कब्र इतनी साधारण क्यों है। क्यों औरंगजेब की कब्र दिल्ली जैसी जगह पर ना होकर एक गुमनाम जगह पर है। चलिए जानते है इस आर्टिकल में।

सबसे विवादास्पद मुगल बादशाह रहा औरंगजेब

Aurangzeb की मौत को आज 300 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। लेकिन आज भी उसका का ये कच्ची मिट्टी का मकबरा अक्सर खबरों में रहता है। कभी वहां नेता द्वारा नमाज पढ़ने की वजह से। तो कभी हिंदू संगठनों द्वारा मकबरे को गिराने की मांग को लेकर। हमेशा से ही इसको लेकर विवाद खड़ा हुआ है।

भारतीय इतिहास में वो सबसे विवादास्पद मुगल बादशाह माना जाता है। सत्ता के लालच में उसने अपने ही परिवार के खिलाफ क्रूर फैसले लिए। अपने पिता शाहजहां(aurangzeb father) को बंदी बना लिया और उन्हें आगरा के किले में नजरबंद कर दिया।

भाई के साथ भी किया सौतेला व्यवहार

अपने बड़े भाई दारा शिकोह को हराने के बाद उसने उसे पूरे शहर में बेइज्जत करते हुए घुमाया और फिर सिर काटकर दिल्ली के किले में भेज दिया। सिर्फ दारा ही नहीं उसने अपने दूसरे भाइयों मुराद बख्श और सुलेमान शिकोह को भी ज़हर देकर मौत के घाट उतार दिया।

उसकी नीतियां ना सिर्फ उसके परिवार बल्कि पूरे साम्राज्य के लिए कठोर रहीं। उसने कई मंदिरों को तुड़वाया और जबरन धर्मांतरण करवाया। उसके शासनकाल में जनता पर कड़े धार्मिक प्रतिबंध लगाए गए, जिससे उसकी नीतियों को लेकर आज भी मतभेद बने हुए हैं।

अपने अंतिम दिनों में बेटे को लिखा पत्र

Aurangzeb को भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे बड़ा साम्राज्य विरासत में मिला था और जिसने अपने जीवन काल में इसका सबसे ज्यादा विस्तार किया। हालांकि औरंगजेब की जिंदगी के अंतिम साल बेहद खराब(aurangzeb kaise mara tha) वक्त में गुजरे।
इस दौरान मुगल शासन बेहद कमजोर भी हो गया था। भारत में मराठाओं का प्रभुत्व लगातार बढ़ रहा था।
A Short History of Aurangzib में जादुनाथ सरकार लिखते हैं कि अपनी जिंदगी के अंतिम दिनों में औरंगजेब ने अपने बेटे आजम को लिखे एक पत्र में कहा –

मुझे नहीं पता कि मैं कौन हूं और मैं क्या कर रहा हूं मैंने राज्य में कोई सच्चा शासन नहीं किया और ना ही किसानों की देखभाल की जिंदगी जो इतनी कीमती है बेकार चली गई।

मिट्टी की कब्र क्यों बनाई गई? Aurangzeb Grave

20 फरवरी 1707 को औरंगजेब की मौत(Aurangzeb Death) हो गई जिसके बाद औरंगजेब की कब्र अभी के संभाजी नगर के खुल्दाबाद में बनवा दी गई। औरंगजेब की कब्र वाली जगह यानी दो गज जमीन कच्ची है और कब्र के बीचों बीच एक सब्जे का पौधा लगा हुआ है।
दरअसल मुगल शासक औरंगजेब को जब ये लगा की उसके पास अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है तो उसने अपनी वसीयत लिखी जिसमें औरंगजेब ने अपने बेटे आजम शाह से कहा कि जब मेरी मौत हो तो खुल्दाबाद में मेरी मिट्टी की कब्र बनाई जाए और कब्र पर सिर्फ सफेद चादर ही चढ़ाई जाए।

दिल्ली में क्यों नहीं बनी कब्र?

दरअसल उसे औरंगाबाद से बेहद लगाव था। औरंजगेब ने अपनी जिंदगी के करीब 37 साल औरंगाबाद यानी की छत्रपति संभाजीनगर में बिताए। औरंगाबाद में ही औरंगजेब ने अपनी बेगम का कब्र भी बनवाई थी। जिसे आज दक्कन का ताज कहा जाता है। इसके अलावा यहीं पर उसके पीर की कब्र भी है। जिसे वो बहुत माना करता था। औरंगजेब ने ये भी कहा था कि मेरी मौत भारत में कहीं भी हो लेकिन मुझे दफन यहीं सूफी संत जैनुद्दीन शिराजी के पास करना।

मेहनत के पैसों से बने कब्र

अपनी वसीयत में भी उसने ये भी लिखा था कि जितना पैसा मैंने अपनी मेहनत से कमाया है उसे ही मेरे मकबरे में लगाया जाए। वो अपने निजी खर्च के लिए टोपियां सिला करता था। औरंजेब की कब्र को बनाने में 14 रुपये 12 आने खर्च किए गए।
औरंगजेब की इच्छानुसार उसे एक बेहद सादे मकबरे में सैयद जैनुद्दीन सिराज के पास दफन किया गया।

मुगल बादशाहों के मकबरों में भव्यता का पूरा ध्यान रखा जाता था। सुरक्षा के इंतजाम भी होते थे। हालांकि औरंगजेब का मकबरा लकड़ी से बना था। औरंगजेब का कहना था कि उसकी कब्र पर किसी भी किस्म का गुम्मद या कोई इमारत ना बनाई जाए जैसी गरीबों की कब्र होती है वैसी ही बनाई जाए।

ऐसा इसलिए भी है कि इस्लाम में कब्र को लेकर सबसे जरूरी बात ये कही गई है कि खुली हुई कब्र ही सबसे सही है। ऐसी कब्र जिसमें बारिश की नमी और गीलापन हो ऐसी कब्र विनम्रता और सादगी की मिसाल मानी जाती है। खुली कब्र मिट्टी से ढकी होती है लेकिन उसपर कोई पक्का ढांचा या छत नहीं होती इससे प्राकृतिक तत्व जैसे सूरज की रोशनी और बारिश का पानी सीधे कब्र तक पहुंचता है।

मुगल बादशाह औरंगजेब और बाबर की कब्रें खुली हैं

औरंगजेब इस्लाम को लेकर बहुत कट्टर था और क्रूर होने के साथ ही औरंगजेब का संबंध इस्लामी विद्वानों सूफी संतों और आधयात्मिक मार्गदर्शकों से भी रहा। औरंगजेब की कब्र के ठीक बीच में एक छोटा सा सब्जे का पौधा लगा हुआ है जिसे हर 2-3 महीने में बदल दिया जाता है