लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ा झटका या राहत? जानिए अंदर की बात

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8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) को लेकर पिछले काफी समय से देश भर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच तमाम तरह की चर्चाएं और अटकलें चल रही हैं। खास तौर पर फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी और न्यूनतम वेतन में होने वाली संभावित वृद्धि को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे थे। अब जाकर केंद्र सरकार ने पहली बार संसद के पटल पर इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर अपना आधिकारिक रुख साफ कर दिया है।

सरकार ने अपनी बात रखते हुए यह स्पष्ट किया है कि 8वां वेतन आयोग एक पूरी तरह से स्वतंत्र निकाय के रूप में अपने कार्य को अंजाम दे रहा है। इसके साथ ही आयोग की आंतरिक कार्यवाही, बैठकों या फिर विचाराधीन प्रस्तावों की कोई भी अंदरूनी जानकारी सरकार को देना उसकी किसी भी तरह की कानूनी बाध्यता नहीं है।

फिटमेंट फैक्टर और आंतरिक बैठकों पर क्या बोली सरकार?

राज्यसभा में एक सांसद द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सदन को बताया कि 8वें वेतन आयोग के ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) के प्रावधानों के मुताबिक आयोग पूरी तरह से स्वतंत्र रहकर अपने फैसले ले रहा है।

उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट किया कि जब तक आयोग अपनी फाइनल रिपोर्ट पूरी तरह तैयार करके सौंप नहीं देता, तब तक उसे अपनी बैठकों, जरूरी सुझावों, आपसी विचार-विमर्श या फिर फिटमेंट फैक्टर जैसे किसी भी प्रस्ताव की कोई भी जानकारी सरकार के साथ साझा करने की आवश्यकता नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि फिलहाल केंद्र सरकार के पास भी आयोग की अंदरूनी चर्चाओं या संभावित सिफारिशों का कोई भी आधिकारिक विवरण मौजूद नहीं है।

कर्मचारी संगठनों की बड़ी मांगों पर क्या कहा गया?

राज्यसभा सांसद जावेद अली द्वारा सरकार से यह सवाल पूछा गया था कि क्या विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और वेतन की गणना के लिए ‘फैमिली यूनिट’ (परिवार का आकार) का दायरा बढ़ाने की चल रही मांगों पर सरकार विचार कर रही है?

इस पर सरकार की तरफ से किसी भी मांग के सीधे तौर पर पक्ष या विपक्ष में कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया गया। सरकार का तर्क है कि चूंकि आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में पूरी तरह से स्वतंत्र है, इसलिए उसकी अंतिम सिफारिशें आने से पहले किसी भी कच्चे प्रस्ताव पर सरकार की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया देना बिल्कुल उचित नहीं होगा।

अब तक कितनी बैठकें हुईं और क्या है रिपोर्ट की समय-सीमा?

संसद में जानकारी देते हुए सरकार ने यह भी साफ किया कि उनके पास इस बात का कोई आधिकारिक आंकड़ा या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है कि आयोग ने अब तक कुल कितनी बैठकें आयोजित की हैं या फिर किन-किन कर्मचारी संगठनों एवं अन्य संबंधित हितधारकों से अब तक चर्चा की जा चुकी है। इसका मुख्य कारण भी यही बताया गया कि आयोग पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और इस तरह की हर छोटी-बड़ी जानकारी सार्वजनिक करना उसके लिए अनिवार्य नहीं है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पिछले साल 3 नवंबर 2025 को जारी अपने प्रस्ताव के तहत 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का आधिकारिक गठन किया था। इस प्रस्ताव के अनुसार, आयोग को अपने गठन की तारीख से लेकर अगले 18 महीनों के भीतर अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपनी हैं। फिलहाल सरकार की तरफ से इस निर्धारित समय-सीमा में किसी भी तरह के बदलाव या विस्तार को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की गई है।

कर्मचारियों की मुख्य मांगें और आगे की स्थिति

देशभर के केंद्रीय कर्मचारी संगठन काफी समय से फिटमेंट फैक्टर और सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में 7वें वेतन आयोग के 2.57 के फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर सीधे 3.83 किए जाने की मांग शामिल है। इसके अलावा न्यूनतम बेसिक सैलरी को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने, वेतन की गणना के लिए फैमिली यूनिट का आकार 3 से बढ़ाकर 5 करने और परिवार की आधिकारिक परिभाषा में कर्मचारियों के माता-पिता को भी शामिल करने जैसी बड़ी मांगें प्रमुखता से उठाई जा रही हैं।

हालांकि, इन तमाम मांगों पर कोई भी अंतिम मुहर केवल 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने और उसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही लग पाएगी। सरकार के इस ताज़ा बयान से यह बिल्कुल साफ हो गया है कि फिलहाल फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन या किसी भी अन्य सैलरी रिवीजन को लेकर कोई भी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे कयासों को नजरअंदाज करते हुए कर्मचारियों को आयोग की अंतिम रिपोर्ट और उसके बाद सरकार के आधिकारिक फैसले का इंतजार करना चाहिए।

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