कृषि विभाग अपनी ही दुकान बंद करने पर आमदा, कार्यालय गेट पर ताले ने काश्तकारों को सरे बाजार लूटने को छोड़ा

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हल्द्वानी एसकेटी डॉट कॉम

सरकार अपने विभाग में को कमाई करने के लिए प्रोत्साहित करती है लेकिन यहां तो ऐसे विभाग के और देदार बैठे हुए हैं जो अपनी दुकान को खुद ही बंद करने पर तुले हुए हैं अधिकारियों की अकर्मण्यता की वजह से बाबरी क्षेत्र का किसान सरे बाजार में महंगी कीटनाशक दवाइयों और बीज के लिए दर-दर भटक कर रह गया है.

कृषि रक्षा केंद्र का मुख्य गेट जिस पर अधिकारियों की लापरवाही से लटका हुआ है ताला जिससे काश्तकारों का यहां आना हुआ है बंद

हम बात कर रहे हैं किस विभाग के बरेली रोड स्थित कृषि रक्षा केंद्र की जो मेडिकल कॉलेज की बाउंड्री के अंदर स्थित है यहां सबसे बड़ी बात है कि विभागीय अधिकारियों की अकर्मण्यता की वजह से यहां के बरेली रोड की ओर खुलने वाले गेट पर ताला लगा दिया है जिससे किसान यहां नहीं आ पा रहे हैं के अलावा कर्मचारियों को कल कॉलेज के बरेली रोड स्थित गेट से मेडिकल कॉलेज होते हुए अपने ऑफिस में आना पड़ रहा है.

कर्मचारियों की की परेशानी भी देखी जा सकती है जहां आधा किलो मीटर से अधिक का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है वहीं अगर इन्हें फोटोस्टेट या किसी अन्य जरूरी स्टेशनरी लाना है तो जो जो कार्य यह 5 मिनट में कर लेते थे वही कार्य करने में अब इन्हें एक से डेढ़ घंटा लग जा रहा है क्योंकि मेडिकल कॉलेज के अंदर से ही इन्हें पुनः बरेली रोड स्थित गेट पर आना पड़ता है अथवा इन्हें रामपुर रोड फोटोस्टेट तथा अन्य जरूरी सामान लाना पड़ रहा है

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कृषि रक्षा केंद्र के तौर पर कभी यह कार्यालय किस किसानों के लिए बहुत बड़ा धार होता था जब किसान यहां पर पहुंचते थे और अपने खेतों में नुकसानदायक कीटों को मारने के लिए विभाग से दवाइयां ले जाता था और इस के द्वारा विभाग की काव्य आमदनी होती थी. कृषि रक्षा अधिकारी किसानों को अमूल्य सुझाव देकर उपज की पैदावार बढ़ाने मैं मदद करते थे. कृषि रक्षा अधिकारी के तौर पर तैनात बीडी शर्मा के यहां पर सैकड़ों की संख्या में किसानों ने लाभ उठाया उनके खेती प्रधान क्षेत्रों में भ्रमण करने से किसान उनके बताए गए सुझाव के अनुसार खेती मे कीटनाशक दवाइयां का छिड़काव करते थे.

लेकिन अब यह सब बंद हो चुका है जिला कृषि अधिकारी एवं भीमताल में बैठने वाले सभी कृषि विभाग के अधिकारी इस कृषि रक्षा केंद्र की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं और ना ही कोई जनप्रतिनिधि इस कृषि रक्षा केंद्र की बात उठा रहा है जिसका नुकसान खेती और किसानों को हो रहा है उत्तराखंड कृषि प्रधान आज होने के साथ ही जैविक खेती को भी वह स्थान देने की बात की जाती है लेकिन ऐसे अकर्मण्य अधिकारियों के रहते हुए कृषि का और अधिक भला होने की उम्मीद नहीं की जा सकती है. जिस विभाग का मुख्य गेट ही ताले से बंद दिखता हो कैसे किसान और बागवान पहुंचेंगे. कृषि विभाग की लापरवाही से हजारों की संख्या में किसानों मिलने वाली दवाइयो से जहां वंचित होना पड़ रहा है वहीं कहीं ना कहीं खेती पर भी असर पर पड़ रहा है.

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