आग से अब तक 1633 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक, प्री-मानसून से राहत के आसार

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प्रदेश में तापमान में बढ़तरी के साथ ही जंगलों के धधकने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। जून में हुई बारिश से भले ही जंगल में आग लगने की घटनाओं में कमी आई हो लेकिन एक बार फिर जंगल धधकने लगे हैं।


प्रदेश में इस बार जंगल की आग से तीन गुना से भी ज्यादा जंगल खाक हुए हैं। नवंबर 2023 से लेकर अब तक प्रदेश में 1633 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। जंगल की आग के कारण प्रदेश में इस बार छह लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसके साथ ही करोड़ों की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है।

अब क 1200 से ज्यादा स्थानों पर लगी आग
आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में अब तक 1200 से ज्यादा स्थानों पर आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। आग से इस फायर सीजन में सबसे ज्यादा नुकसान कुमाऊं मंडल में हुआ है। कुमाऊं क्षेत्र में अब तक 588 आग की घटनाओं में 829.68 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। जबकि गढ़वाल में 512 आग की घटनाएं सामने आई है। जिसमें 674.055 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गया है। वहीं वन्यजीव विहार से जुड़े क्षेत्रों में 100 मामले सामने आए हैं।

प्री-मानसून से राहत के आसार
जंगलों की आग लगने की घटनाओं में बारिश होने से कुछ कमी तो आई लेकिन तापमान बढ़ने से फिर आग की घटनाएं सामने आ रही हैं। जंगलों की आग से अब प्री-मानसून से राहत मिलने के आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तराखंड में 12 जून के बाद प्री-मानसून की बारिश हो सकती है।