उत्तराखंड में सियासी भूचाल: BJP को लगा बड़ा झटका, पूर्व विधायक यशपाल बेनाम ने पार्टी से दिया इस्तीफा

उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा मोड़ देखने को मिला है। पौड़ी विधानसभा सीट से पूर्व विधायक और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष यशपाल बेनाम ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। ठीक 8 साल बाद पार्टी को अलविदा कहने के उनके इस फैसले ने पौड़ी ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बेनाम ने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है, हालांकि राजनीतिक पंडित इसके पीछे पार्टी के भीतर बीते समय से चल रही खींचतान और हिंदुत्ववादी संगठनों के भारी विरोध को भी मुख्य वजह मान रहे हैं।
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36 सेकंड के वीडियो संदेश से इस्तीफे की घोषणा
यशपाल बेनाम ने एक 36 सेकंड का संक्षिप्त वीडियो संदेश जारी कर अपने इस्तीफे का ऐलान किया। इस वीडियो में उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से उनका इस्तीफा तत्काल स्वीकार करने और इस पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। बेनाम ने वीडियो में किसी नेता या पार्टी पर सीधा आरोप नहीं लगाया और केवल ‘व्यक्तिगत कारण’ ही बताए। लेकिन इस अचानक उठाए गए कदम से गढ़वाल की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि उनका अगला सियासी कदम क्या होगा।

18 अक्टूबर का संयोग: जिस तारीख को आए, उसी तारीख को छोड़ी पार्टी
यशपाल बेनाम के इस इस्तीफे में एक अनोखा राजनीतिक संयोग भी देखने को मिला। बेनाम ठीक 8 साल पहले 18 अक्टूबर 2018 को भाजपा में शामिल हुए थे। ठीक आठ साल बाद, 18 अक्टूबर 2026 को ही उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके समर्थकों का मानना है कि पार्टी के भीतर लगातार बन रहे दबाव और उपेक्षा के कारण बेनाम लंबे समय से असहज महसूस कर रहे थे।
हिंदुत्ववादी संगठनों का भारी विरोध और बेनाम का दर्द
यशपाल बेनाम के भाजपा कार्यकाल का सबसे विवादास्पद मोड़ मई 2023 में आया, जब उनकी बेटी की शादी को लेकर व्यापक विवाद खड़ा हो गया था। बेनाम की बेटी का विवाह अमेठी के एक मुस्लिम युवक से दोनों परिवारों की सहमति से तय हुआ था। शादी का निमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विश्व हिंदू परिषद (VHP), बजरंग दल और अन्य हिंदुत्ववादी संगठनों ने इसका तीव्र विरोध शुरू कर दिया।
हिंदूवादी संगठनों ने पौड़ी में प्रदर्शन किया, पुतले फूंके और आरोप लगाया कि एक जनप्रतिनिधि होकर बेनाम इस तरह के विवाह को बढ़ावा दे रहे हैं। कुछ संगठनों ने तो इसे ‘लव जिहाद’ से जोड़ते हुए सार्वजनिक रूप से बहिष्कार का आह्वान भी किया था। इस चौतरफा दबाव, धमकियों और जनाक्रोश के बीच यशपाल बेनाम को पुलिस सुरक्षा में शादी कराने के बजाय सार्वजनिक भावनाओं का सम्मान करने की बात कहते हुए शादी का कार्यक्रम रद्द या स्थगित करना पड़ा था।
इस घटनाक्रम के बाद से ही बेनाम खुद को पार्टी और उससे जुड़े दक्षिणपंथी संगठनों के बीच अलग-थलग और असहज महसूस कर रहे थे। माना जा रहा है कि उस वक्त का घटनाक्रम और पार्टी नेतृत्व से अपेक्षित समर्थन न मिलना भी उनके इस इस्तीफे की एक बड़ी पृष्ठभूमि बना।
यशपाल बेनाम निर्दलीय दबदबे से विधायक तक
पौड़ी गढ़वाल की स्थानीय राजनीति में यशपाल बेनाम का एक मजबूत और स्वतंत्र जनाधार रहा है। वर्ष 2007 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में बेनाम ने पौड़ी सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर दांव खेला था। उन्होंने राज्य के कई स्थापित राजनीतिक दिग्गजों को शिकस्त देकर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। स्थानीय निकाय राजनीति में भी बेनाम की मजबूत पकड़ रही है। वे तीन बार पौड़ी नगर पालिका के अध्यक्ष चुने गए। दो बार उन्होंने निर्दलीय के रूप में यह चुनाव जीता, जबकि एक बार भाजपा उम्मीदवार के रूप में पालिका अध्यक्ष बने। दलगत निष्ठा से इतर पौड़ी शहर की आम जनता में उनकी व्यक्तिगत पकड़ रही है। वे समय-समय पर अपने स्वतंत्र फैसलों के लिए जाने जाते रहे हैं।
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अब आगे क्या? अगले कदम पर टिकीं नजरें
इस्तीफे के बाद बेनाम ने कहा है कि वे जल्द ही अपने समर्थकों और स्थानीय जनता के साथ संवाद कर अपने अगले राजनीतिक कदम का फैसला लेंगे। उनके इस्तीफे के साथ ही पौड़ी जिले के सियासी समीकरण नए सिरे से बनने लगे हैं। चर्चाएं हैं कि क्या बेनाम एक बार फिर से निर्दलीय राजनीति की राह चुनेंगे या कांग्रेस या किसी अन्य क्षेत्रीय दल का दामन थामेंगे। क्योंकि पौड़ी विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है ऐसे में संभावना है कि वे किसी और सीट पर हाथ आजमाएं, बहरहाल, पूरे उत्तराखंड की निगाहें यशपाल बेनाम के अगले राजनीतिक दांव पर टिकी हुई हैं
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